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भूमिका।। तारे और ग्रह।। प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र।। यूरोप में खगोल शास्त्र।। हेर संगीत नाटक (Hair Musical)।। पृथ्वी की गतियां।। राशियां (Signs of Zodiac)।। विषुव अयन (precession of equinoxes): हेयर संगीत नाटक के शीर्ष गीत का अर्थ।। ज्योतिष या अन्धविश्वास।। अंक विद्या, डैमियन – शैतान का बच्चा।। अंक लिखने का इतिहास।। हस्तरेखा विद्या और निष्कर्ष।।
आज ज्योतिष, अंक, और हस्तरेखा विद्या समाज के अंग बन चुके हैं पर इनके पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है। यह विद्यायें कुछ लोगो के जीवन व्यापन का साधन हैं तो कुछ लोगो को, कष्ट से मुक्ति दिलाने की झूटी दिलासा दे कर, शान्ति पहुंचाते हैं। इस लेख में उन बातों की चर्चा होगी जिससे पता चलता है कि इनका विज्ञान से कोई संबन्ध नहीं है। सबसे पहले हम ज्योतिष विद्या के बारे में बात करेंगे, पर पहले तारे, ग्रह और तब राशि के बारे में।
तारे और ग्रह
रात में आकाश में कई पिण्ड चमकते रहते हैं, इनमें से अधिकतर पिण्ड हमेशा पूरब की दिशा से उठते हैं और एक निश्चित गति प्राप्त करते हैं और पश्चिम की दिशा में अस्त होते हैं। इन पिण्डों का आपस में एक दूसरे के सापेक्ष भी कोई परिवर्तन नहीं होता है। इन पिण्डों को तारा (Star) कहा गया। पर कुछ ऐसे भी पिण्ड हैं जो बाकी पिण्ड के सापेक्ष में कभी आगे जाते थे और कभी पीछे – यानी कि वे घुमक्कड़ थे। Planet एक लैटिन का शब्द है जिसका अर्थ इधर-उधर घूमने वाला है। इसलिये इन पिण्डों का नाम Planet और हिन्दी में ग्रह रख दिया गया।
हमारे लिये आकाश में सबसे चमकीला पिण्ड सूरज है, फिर चन्द्रमा और उसके बाद रात के तारे या ग्रह। तारे स्वयं में एक सूरज हैं। ज्यादातर, हमारे सूरज से बड़े ओर चमकीले, पर इतनी दूर हैं कि उनकी रोशनी हमारे पास आते आते बहुत क्षीण हो जाती है इसलिये दिन में नहीं दिखायी पड़ते पर रात में दिखायी पड़ते हैं। कुछ प्रसिद्ध तारे इस प्रकार हैं:
- सबसे प्रसिद्ध तारा, ध्रुव तारा (Polaris या North star) है। यह इस समय पृथ्वी की धुरी पर है इसलिये अपनी जगह पर स्थिर दिखायी पड़ता है। ऐसा पहले नहीं था या आगे नहीं होगा। ऐसा क्यों है, इसके बारे में आगे चर्चा होगी।
- तारों में सबसे चमकीला तारा व्याध (Sirius) है। इसे Dog star भी कहा जाता है क्योंकि यह Canis major (बृहल्लुब्धक) नाम के तारा समूह का हिस्सा है।
- मित्रक (Alpha Centauri), नरतुरंग (Centaurus) तारा समूह का एक तारा है। यदि सूरज को छोड़ दें तो तारों में यह हमसे सबसे पास है। प्रकाश की किरणें १ सेकेन्ड मे ३x(१०)८ मीटर की दूरी तय करती हैं। एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो कि प्रकाश की किरणें एक साल में तय करती हैं। इसकी हमसे दूरी लगभग ४.३ प्रकाश वर्ष है। वास्तव में यह एक तारा नहीं है पर तीन तारों का समूह है जो एक दूसरे के तरफ चक्कर लगा रहें हैं, इसमें Proxima Centauri हमारे सबसे पास आता है।
ग्रह और चन्द्रमा, सूरज नहीं हैं। यह अपनी रोशनी में नहीं चमकते पर सूरज की रोशनी को परिवर्तित करके चमकते हैं।, तारे टिमटिमाते हैं पर ग्रह नहीं। तारों की रोशनी का टिमटिमाना, हवा में रोशनी के अपवर्तन (refraction) के कारण होता है। यह तारों की रोशनी पर ही होता है क्योंकि तारे हमसे बहुत दूर हैं और इनके द्वारा आती रोशनी की किरणें हम तक पहुंचते पहुंचते समान्तर हो जाती हैं पर ग्रहों कि नहीं।
प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र
पहले के ज्योतिषाचार्य वास्तव में उच्च कोटि के खगोलशास्त्री थे और अपने देश के खगोलशास्त्री दुनिया में सबसे आगे। अपने देश में तो ईसा के पूर्व ही मालुम था कि पृथ्वी सूरज के चारो तरफ चक्कर लगाती है। यजुर्वेद के अध्याय ३ की कण्डिका ६ इस प्रकार है,
आयं गौ: पृश्रिनरक्रमीदसदन् मातरं पुर: ।
पितरं च प्रचन्त्स्व:।।
डा. कुँवर चन्द्र प्रकाश सिंह द्वारा इसका काव्यानुवाद एवं टिप्पणी की है। इसे भुवन वाणी ट्रस्ट, मौसम बाग, सीतापुर रोड, लखनऊ-२२६०२० ने प्रकाशित किया है। उन्होंने इस कण्डिका में काव्यानुवाद व टिप्पणी इस प्रकार की है,
‘प्रत्यक्ष वर्तुलाकार सतत गतिशीला।
है अंतरिक्ष में करती अनुपम लीला।।
अपनी कक्षा में अंतरिक्ष में संस्थित।
रवि के सम्मुख हैं अविरत प्रदक्षिणा-रत।।
दिन, रात और ऋतु-क्रम से सज्जित नित नव।
माता यह पृथ्वी अपनी और पिता दिव।।
हे अग्नि। रहो नित दीपित, इस धरती पर।
शत वर्णमयी ज्वालाओं से चिर भास्वर।।
फैले द्युलोक तक दिव्य प्रकाश तुम्हारा।
मेघों में विद्युन्मय हो वास तुम्हारा।।
लोकत्रय में विक्रम निज करो प्रकाशित।
त्रयताप- मुक्त हो मानव पर निर्वृत्तिरत।।
टिप्पणी – यह मंत्र बड़ा कवित्वपूर्ण है। इसमें अग्नि के पराक्रम का चित्रात्मक वर्णन है। इसमें श्लेषालंकार है। ‘गौ पृश्नि:’ का अर्थ गतिशील बहुरंगी ज्वालाओं वाला अग्नि किया गया है। महर्षि दयानन्द ने ‘गौ:’ का अर्थ पृथ्वी किया है। यह पृथ्वी अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर अंतरिक्ष में घूमती है। इसी से दिन-रात, कृष्ण-शुक्ल पक्ष, अयन, वर्ष, ऋतु आदि का क्रम चलता है। अनुवाद में यही अर्थ ग्रहण किया गया है। अग्नि पृथ्वी का पुत्र भी कहा गया है। इस मंत्र में विशेष ध्यान देने की बात है- पृथ्वी का अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर घूमना। इससे सिद्ध है कि वैदिक ऋषि को पृथ्वी के सूर्य के चारों ओर घूमने का ज्ञान था।’
प्राचीन भारत में अन्य प्रसिद्ध खगोलशास्त्री तथा उनके द्वारा किया गया कार्य इस प्रकार है:
- याज्ञवल्क्य (ईसा से दो शताब्दी पूर्व) हुऐ थे। उन्होने यजुर्वेद पर काम किया था। इसलिये यह कहा सकता है कि अपने देश ईसा के पूर्व ही मालुम था कि पृथ्वी सूरज के चारो तरफ घूमती है। यूरोप में इस तरह से सोचना तो 14वीं शताब्दी में शुरु हुआ।
- आर्यभट्ट (प्रथम) (४७६-५५०) ने आर्य भटीय नामक ग्रन्थ की रचना की। इसके चार खंड हैं – गीतिकापाद, गणितपाद, काल क्रियापाद, और गोलपाद। गोलपाद खगोलशास्त्र (ज्योतिष) से सम्बन्धित है और इसमें ५० श्लोक हैं। इसके नवें और दसवें श्लोक में यह समझाया गया है कि पृथ्वी सूरज के चारो तरफ घूमती है।
- भास्कराचार्य ( १११४-११८५) ने सिद्धान्त शिरोमणी नामक पुस्तक चार भागों में लिखी है – पाटी गणिताध्याय या लीलावती (Arithmetic), बीजागणिताध्याय (Algebra), ग्रह गणिताध्याय (Astronomy), और गोलाध्याय। इसमें प्रथम दो भाग स्वतंत्र ग्रन्थ हैं और अन्तिम दो सिद्धांत शिरोमणी के नाम से जाने जाते हैं। सिद्धांत शिरोमणी में पृथ्वी के सूरज के चारो तरफ घूमने के सिद्धान्त को और आगे बढ़ाया गया है।
यूरोप में खगोल शास्त्र
यूरोप के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री तथा उनके द्वारा किया गया कार्य इस प्रकार है:
- टौलमी (९०-१६८) नाम का ग्रीक दर्शनशास्त्री दूसरी शताब्दी में हुआ था। इसने पृथ्वी को ब्रम्हाण्ड का केन्द्र माना और सारे पिण्डों को उसके चारों तरफ चक्कर लगाते हुये बताया। इस सिद्धान्त के अनुसार सूरज एवं तारों की गति तो समझी जा सकती थी पर ग्रहों की नहीं।
- कोपरनिकस (१४७३-१५४३) एक पोलिश खगोलशास्त्री था, उसका जन्म १५वीं शताब्दी में हुआ। यूरोप में सबसे पहले उसने कहना शुरू किया कि सूरज सौरमंडल का केन्द्र है और ग्रह उसके चारों तरफ चक्कर लगाते हैं।
- केपलर (१५७१-१६३०) एक जर्मन खगोलशास्त्री था, उसका जन्म १६वीं शताब्दी में हुआ था। वह गैलिलियो के समय का ही था। उसने बताया कि ग्रह सूरज की परिक्रमा गोलाकार कक्षा में नहीं कर रहें हैं, उसके मुताबिक यह कक्षा अंड़ाकार (Elliptical) है। यह बात सही है।
- गैलिलियो (१५६४-१६४२) एक इटैलियन खगोलशास्त्री था उसे टेलिस्कोप का आविष्कारक कहा जाता है पर शायद उसने बेहतर टेलिस्कोप बनाये और सबसे पहले उनका खगोलशास्त्र में प्रयोग किया।
टौलमी के सिद्धान्त के अनुसार शुक्र ग्रह पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाता है और वह पृथ्वी और सूरज के बीच रहता है इसलिये वह हमेशा बालचन्द्र (Crescent) के रूप में दिखाई देगा। कोपरनिकस के मुताबिक शुक्र सारे ग्रहों की तरह सूरज के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है इसलिये चन्द्रमा की तरह उसकी सारी कलायें (phases) होनी चाहिये। गैलिलियो ने टेलिस्कोप के द्वारा यह पता किया कि शुक्र ग्रह की भी चन्द्रमा की तरह सारी कलायें होती हैं इससे यह सिद्ध हुआ कि ग्रह – कम से कम शुक्र तो – सूरज की परिक्रमा कर रहे हैं। गैलिलियो ने सबसे पहले ग्रहों को सूरज का चक्कर लगाने का प्रयोगात्मक सबूत दिया। पर उसे इसका क्या फल मिला। चर्च ने यह कहना शुरू कर दिया कि यह बात ईसाई धर्म के विरूद्ध है और गैलिलियो को घर में नजरबन्द कर दिया गया।
भौतिक शास्त्र में हर चीज देखी नहीं जा सकती है और किसी बात को सत्य केवल इसलिये कहा जाता है कि उसको सिद्धान्तों के द्वारा समझाया जा सकता है। यदि पृथ्वी को सौरमंडल का केन्द्र मान लिया जाय तो किसी भी तरह से इन ग्रहों की गति को नहीं समझा जा सकता है पर यदि सूरज को सौरमंडल का केन्द्र मान लें तो इन ग्रहों और तारों दोनों की गति को ठीक प्रकार से समझा जा सकता है। इसलिए यह बात सत्य मान ली गयी कि सूरज ही हमारे सौरमंडल के केन्द्र में है जिसके चारों तरु पृथ्वी एवं ग्रह घूम रहे हैं।
Hair Musical हेयर संगीत नाटक
१९६० के दशक में, हेयर संगीत नाटक {Hair (musical)} का मंचन अमेरिका में शुरू किया गया। इसका सबसे पहले मंचन १७ अक्टूबर १९६७ को हुआ। इसका मंचन आज तक अलग-अलग देशों में हो रहा है पर अपने देश में कभी नहीं हुआ। यह उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका में लोग वियतनाम जंग के खिलाफ हो रहे थे, हिप्पी सभ्यता जन्म ले रही थी। बहुत से लोगों का कहना है कि हिप्पी सभ्यता, इसी संगीत नाटक से जन्मी। इसमें लड़के और लड़कियां राशि के चिन्हों को दर्शाते थे, कुछ दृश्यों में निर्वस्त्र होते थे कुछ में वे अमेरिकी झण्डे को पहने होते थे। इसलिये शायद यह चर्चित तथा विवादास्पद हो गया।
इसका शीर्षक गीत इस प्रकार है This is the dawning age of Aquarius है। इस गाने के शब्द यहां हैं और इसे आप यहां देख वा सुन सकते हैं। यह गाना अपने देश में भी प्रचलित है। इस गाने का शब्दिक अर्थ है कि कुम्भ राशि का समय आने वाला है लोग इसका शब्दिक अर्थ तो जानते हैं – पर यह नहीं समझते कि यह क्या है। क्या वास्तव में कुम्भ राशि का समय आ रहा है? यह क्यों कहा जा रहा है? इसका गाने के अर्थ का भी हमारे विषय से सम्बन्ध है। इसको समझने के लिये जरूरी है कि पृथ्वी की गतियों एवं राशियों को समझें।
पृथ्वी की गतियां
हमारी पृथ्वी की बहुत सारी गतियां हैं:
- पृथ्वी अपनी धुरी पर २४ घंटे में एक चक्कर लगा रही है। इसलिये दिन और रात होते हैं।
- पृथ्वी सूरज के चारों तरफ एक साल में एक चक्कर लगाती है। यदि हम उस तल (plane) की कल्पना करें जिसमें पृथ्वी और सूरज का केन्द्र, तथा उसकी परिक्रमा है तो पायेंगे कि पृथ्वी की धुरी, इस तल से लगभग साढ़े २३ डिग्री झुकी है पृथ्वी के धुरी झुके रहने के कारण अलग-अलग ऋतुयें आती हैं। हमारे देश में गर्मी के दिनों में सूरज उत्तरी गोलार्द्ध में रहता है और जाड़े में दक्षिणी गोलार्द्ध में चला जाता है। यानी कि साल के शुरू होने पर में सूरज दक्षिणी गोलार्द्ध में रहता है पर वहां से चलकर उत्तरी गोलार्द्ध और फिर वापस दक्षिणी गोलार्द्ध के उसी विन्दु पर पहुंच जाता है।
- पृथ्वी की धुरी भी घूम रही है और पृथ्वी की धुरी लगभग २५७०० साल में एक बार घूमती है। इस समय हमारी धुरी सीधे ध्रुव तारे पर है इसलिये ध्रुवतारा हमको घूमता नहीं दिखाई पड़ता है और दूसरे तारे घूमते दिखाई देते हैं। हजारों साल पहले हमारी धुरी न तो ध्रुव तारा पर थी और न हजारों साल बाद यह ध्रुव तारा पर होगी। तब ध्रुवतारा भी रात में पूरब की तरफ से उदय होगा और पश्चिम में अस्त होता दिखायी देगा।
- हमारा सौरमंडल एक निहारिका में है जिसे आकाश गंगा कहा जाता है। इसका व्यास लगभग १,००,००० प्रकाश वर्ष है। हमारी पृथ्वी आकाश गंगा के केन्द्र से लगभग ३०,००० प्रकाश वर्ष दूर है और हमारा सौरमंडल भी इस आकाश गंगा के चक्कर लगा रहा है और हमारी पृथ्वी भी उसके चक्कर लगा रही है।
- हमारी आकाश गंगा और आस-पास की निहारिकायें भी एक दूसरे के पास आ रही हैं। यह बात डाप्लर सिद्धान्त से पता चलती है। हमारी पृथ्वी भी इस गति में शामिल है।
मुख्य रूप से हम पृथ्वी की पहली और दूसरी गति ही समझ पाते हैं, तीसरी से पांचवीं गति हमारे जीवन से परे है। वह केवल सिद्धान्त से समझी जा सकती है, उसे देखा नहीं जा सकता है। हमारे विषय के लिये दूसरी और तीसरी गति महत्वपूर्ण है।
तारा समूह
ब्रम्हाण्ड में अनगिनत तारे हैं और अनगिनत तारा समूह। कुछ चर्चित तारा समूह इस प्रकार हैं:
- सप्त ऋषि ( Great/ Big bear or Ursa Major): यह उत्तरी गोलार्ध के सात तारे हैं। यह कुछ पतंग की तरह लगते हैं जो कि आकाश में डोर के साथ उड़ रही हो। यदि आगे के दो तारों को जोड़ने वाली लाईन को सीधे उत्तर दिशा में बढ़ायें तो यह ध्रुव तारे पर पहुंचती है।
- ध्रुवमत्स्य/ अक्षि ( Little Bear or Ursa Minor): यह सप्त ऋषि के पास उसी शक्ल का है इसके सबसे पीछे वाला तारा ध्रुव तारा है।
- कृतिका (कयबचिया) Pleiades: पास-पास कई तारों का समूह है हमारे खगोलशास्त्र में इन्हें सप्त ऋषि की पत्नियां भी कहा गया है।
- मृगशीर्ष (हिरन- हिरनी) Orion: अपने यहां इसे हिरण और ग्रीक में इसे शिकारी के रूप में देखा गया है पर मुझे तो यह तितली सी लगती है।
- बृहल्लुब्धक (Canis Major): इसकी कल्पना कुत्ते की तरह की गयी पर मुझे तो यह घन्टी की तरह लगता है। व्याध (Sirius) इसका सबसे चमकीला तारा है। अपने देश में इसे मृगशीर्ष पर धावा बोलने वाले के रूप में देखा गया जब कि ग्रीक पुराण में इसे Orion (शिकारी) के कुत्ते के रूप में देखा गया।
- शर्मिष्ठा (Cassiopeia): यह तो मुझे कहीं से सुन्दरी नहीं लगती यह तो W के आकार की दिखायी पड़ती है और यदि इसके बड़े कोण वाले भाग को विभाजित करने वाली रेखा को उत्तर दिशा में ले जायें तो यह ध्रुव तारे पर पहुंचेगी।
- महाश्व (Pegasus): इसकी कल्पना अश्व की तरह की गयी पर यह तो मुझे टेनिस के कोर्ट जैसा लगता है।
जाहिर है मैं इन सब तारा समूह के सारे तारे देख कर आकृतियों कि कल्पना नहीं कर रहा हूं, पर इन तारा समूह के कुछ खास तारों को ले कर ही कल्पना कर रहा हूं।
राशियां Signs of Zodiac
यह तो थे आकाश पर कुछ मुख्य तारा समूह। इन सब का नाम हमने कभी न कभी सुना है। इनके अलावा बारह तारा समूह जिन्हें राशियां कहा जाता है उनका नाम हम अच्छी तरह से जानते हैं। इन सब को छोड़ कर, किसी तारा समूह के लिये तो खगोलशास्त्र की पुस्तक ही देखनी पड़ेगी। बारह तारा समूह, जिन्हें राशियां कहा जाता है, उनके नाम तो हम सब को मालुम हैं पर साधरण व्यक्ति के लिये इन्हें आकाश में पहचान कर पाना मुश्किल है। यह बारह राशियां हैं,
- मेष (Aries)
- वृष ( Taurus)
- मिथुन (Gemini)
- कर्क (Cancer)
- सिंह (Leo)
- कन्या (Virgo)
- तुला (Libra)
- वृश्चिक (Scorpio)
- धनु (Sagittarius)
- मकर (Capricorn)
- कुम्भ (Aquarius)
- मीन (Pisces)
इन बारह तारा समूहों को ही क्यों इतना महत्व दिया गया? इसके लिये पृथ्वी की दूसरी और तीसरी गति महत्वपूर्ण है।
यदि पृथ्वी, सूरज के केन्द्र और पृथ्वी की परिक्रमा के तल को चारो तरफ ब्रम्हाण्ड में फैलायें, तो यह ब्रम्हाण्ड में एक तरह की पेटी सी बना लेगा। इस पेटी को हम १२ बराबर भागों में बांटें तो हम देखेंगे कि इन १२ भागों में कोई न कोई तारा समूह आता है। हमारी पृथ्वी और ग्रह, सूरज के चारों तरफ घूमते हैं या इसको इस तरह से कहें कि सूरज और सारे ग्रह पृथ्वी के सापेक्ष इन १२ तारा समूहों से गुजरते हैं। यह किसी अन्य तारा समूह के साथ नहीं होता है इसलिये यह १२ महत्वपूर्ण हो गये हैं। इस तारा समूह को हमारे पूर्वजों ने कोई न कोई आकृति दे दी और इन्हे राशियां कहा जाने लगा।
यदि आप किसी आखबार या टीवी पर राशिचक्र को देखें या सुने तो पायेंगें कि वे सब मेष से शुरू होते हैं, यह अप्रैल-मई का समय है। क्या आपने कभी सोचा हैकि यह राशि चक्र मेष से ही क्यों शुरू होते हैं? चलिये पहले हम लोग विषुव अयन (precession of equinoxes) को समझते हैं, उसी से यह भी स्पष्ट होगा।
विषुव अयन (precession of equinoxes)
विषुव अयन और राशि चक्र के मेष राशि से शुरू होने का कारण पृथ्वी की तीसरी गति है। साल के शुरु होते समय (जनवरी माह में) सूरज दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है और वहां से उत्तरी गोलार्द्ध जाता है। साल के समाप्त होने (दिसम्बर माह) तक सूरज उत्तरी गोलार्द्ध से होकर पुनः दक्षिणी गोलार्द्ध पहुचं जाता है। इस तरह से सूरज साल में दो बार भू-मध्य रेखा के ऊपर से गुजरता है। इस समय को विषुव (equinox) कहते हैं। यह इसलिये कि, तब दिन और रात बराबर होते हैं। यह सिद्धानतः है पर वास्तविकता में नहीं, पर इस बात को यहीं पर छोड़ देते हैं। आजकल यह समय लगभग २० मार्च तथा २३ सितम्बर को आता है। जब यह मार्च में आता है तो हम (उत्तरी गोलार्द्ध में रहने वाले) इसे महा/बसंत विषुव (Vernal/Spring Equinox) कहते हैं तथा जब सितम्बर में आता है तो इसे जल/शरद विषुव (fall/Autumnal Equinox) कहते हैं। यह उत्तरी गोलार्द्ध में इन ऋतुओं के आने की सूचना देता है।
विषुव का समय भी बदल रहे है। इसको विषुव अयन (Precession of Equinox) कहा जाता है। पृथ्वी अपनी धुरी पर २४ घन्टे में एक बार घूमती है। इस कारण दिन और रात होते हैं। पृथ्वी की धुरी भी घूम रही है और यह धुरी २५,७०० साल में एक बार घूमती है। यदि आप किसी लट्टू को नाचते हुये उस समय देखें जब वह धीमा हो रहा हो, तो आप देख सकते हैं कि वह अपनी धुरी पर भी घूम रहा है और उसकी धुरी भी घूम रही है। विषुव का समय धुरी के घूमने के कारण बदल रहा है। इसी लिये pole star भी बदल रहा है। आजकल ध्रुव तारा पृथ्वी की धुरी पर है और दूसरे तारों की तरह नहीं घूमता। इसी लिये pole star कहलाता है। समय के साथ यह बदल जायगा और तब कोई और तारा pole star बन जायगा।
पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग २५,७०० साल में एक बार घूमती है। वह १/१२वें हिस्से को २१४१ या लगभग २१५० साल में तय करती है। वसंत विषुव के समय सूरज मेष राशि में ईसा से १६५० साल पहले (१६५०BC) से, ईसा के ५०० साल बाद (५०० AD) तक लगभग २१५० साल रहा। अलग अलग सभ्यताओं में, इसी समय खगोलशास्त्र या ज्योतिष का जन्म हुआ। इसी लिये राशिफल मेष से शुरु हुआ पर अब ऐसा नहीं है। इस समय वसंत विषुव के समय सूरज, पृथ्वी के सापेक्ष, मीन राशि में है। यह लगभग ईसा के ५०० साल बाद (५०० AD) से शुरु हुआ। यह अजीब बात है कि विषुव के बदल जाने पर भी हम राशिफल मेष से ही शुरु कर रहें है – तर्क के हिसाब से अब राशिफल मीन से शुरु होने चाहिये, क्योंकि अब विषुव के समय सूरज, मेष राशि में न होकर, मीन राशि में है।
ईसा के ५०० साल (५०० AD) के २१५० साल बाद तक यानि कि २७वीं शताब्दी (२६५० AD) तक, वसंत विषुव के समय सूरज, पृथ्वी के सापेक्ष, मीन राशि में रहेगा। उसके बाद वसंत विषुव के समय सूरज, पृथ्वी के सापेक्ष, कुम्भ राशि में चला जायगा। यानि कि तब शुरु होगा कुम्भ का समय। अब आप हेयर संगीत नाटक के शीर्षक गीत Aquarius की पंक्ति ‘This is the dawning age of Aquarius’ का अर्थ समझ गये होंगे। अकसर लोग इस अर्थ को नहीं समझते – ज्योतिष में भी कुछ ऐसा हो रहा है।
इस बात को यदि आप देख कर समझना चाहें तो नीचे देखें
ज्योतिष या अन्धविश्वास
सूरज और चन्द्रमा हमारे लिये में महत्वपूर्ण हैं। यदि सूरज नहीं होता तो हमारा जीवन ही नहीं शुरू होता। सूरज दिन में, और चन्द्रमा रात में रोशनी दिखाता है। सूरज और चन्द्रमा, समुद्र को भी प्रभावित करते हैं। ज्वार और भाटा इसी कारण होता है। समुद्री ज्वार-भाटा के साथ यह हवा को भी उसी तरह से प्रभावित कर, उसमें भी ज्वार भाटा उत्पन करते हैं। ज्वार-भाटा में किसी और ग्रह का भी असर होता होगा, पर वह नगण्य के बराबर है। इसके अलावा यह बात अप्रसांगिक है कि हमारा जन्म जिस समय हुआ था उस समय,
- सूरज किस राशि में था, या
- चन्द्रमा किस राशि पर था, या
- कोई अन्य ग्रह किस राशि पर था,
इसका कोई सबूत नहीं है कि पैदा होने का समय या तिथि महत्वपूर्ण है। यह केवल अज्ञानता ही है।
हमारे पूर्वजों ने इन राशियों को याद करने के लिये स्वरूप दिया। पुराने समय के ज्योतिषाचार्य बहुत अच्छे खगोलशास्त्री थे। पर समय के बदलते उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया कि किसी व्यक्ति के पैदा होने के समय सूरज जिस राशि पर होगा, उस आकृति के गुण उस व्यक्ति के होंगे। इसी हिसाब से उन्होंने राशि फल निकालना शुरू कर दिया। हालांकि इसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। यदि आप ज्योतिष को उसी के तर्क पर परखें, तो भी ज्योतिष गलत बैठती है।
यदि ज्योतिष का ही तर्क लगायें तो – विषुव अयन के समय सूरज की स्थिति बदल जाने के कारण – जो गुण ज्योतिषों ने मेष राशि में पैदा होने वाले लोगों को दिये थे वह अब मीन राशि में पैदा होने वाले व्यक्ति को दिये जाने चाहिये। यानी कि, हम सबका राशि फल एक राशि पहले का हो जाना चाहिये पर ज्योतिषाचार्य तो अभी भी वही गुण उसी राशि वालों को दे रहे हैं।
सच में हम बहुत सी बातो को उसे तर्क या विज्ञान से न समझकर उस पर अंध विश्वास करने लगते हैं, जिसमें ज्योतिष भी एक है। ज्योतिष या टोने टोटके में कोई अन्तर नहीं। यह एक ही बात के, अलग अलग रूप हैं। यही बात अंक विद्या और हस्तरेखा विद्या के लिये लागू होती है। अंक विद्या पर बात करने से पहले हम लोग ओमेन नाम की फिल्म की चर्चा करेंगे।
डेमियन: ओमेन – फिल्म
1976 में एक फिल्म आयी थी जिसका नाम ओमेन (Omen) था। इसकी कहानी कुछ इस प्रकार की है कि एक अमेरिकन राजनयिक (Diplomat) के पुत्र की म़ृत्यु हो जाती है और उसकी जगह एक दूसरा बच्चा रख दिया जाता है। इस बच्चे का नाम डेमियन (Damien) है। यह बच्चा वास्तव में एक शैतान का बच्चा है और आगे चलकर इसके एन्टीक्राइस्ट (Antichrist) बनने की बात है। यह बात बाइबिल की एक भविष्यवाणी में है। कुछ लोगों को पता चल जाता है कि यह शैतान का बच्चा है और उसे मारने का प्रयत्न किया जाता है पर पुलिस जिसे नहीं मालुम कि वह शैतान का बच्चा है, उसे बचा लेती है। यह फिल्म यहीं पर समाप्त हो जाती है।
इस फिल्म के बाद, १९७८ में दूसरी फिल्म Damien: Omern II नाम से आयी। यह डैमियन के तब की कहानी है, जब वह १३ साल का हो जाता है। १९८१ में इस सीरीज में तीसरी फिल्म Oemn III: The Final Conflict आयी। इस सिरीस की चौथी फिल्म टीवी के लिये १९९१ में Omen IV : The Awakening के नाम से बनी। इन फिल्मों में यह महत्वपूण है कि डेमियन के शैतान का बच्चा होने की बात कैसे पता चली।
डेमियन के सर की खाल (Scalp) पर बालों से छिपा ६६६ अंक लिखा था। इस नम्बर को शैतान का नम्बर कहा जाता है। इससे पता चला कि यह शैतान का बच्चा है। पर क्या आप जानते हैं कि इस नम्बर को क्यों शैतान का नम्बर क्यों कहा जाता है। चलिये कुछ अंक लिखने के इतिहास के बारे में जाने, जिससे यह पता चलेगा।
अंक लिखने का इतिहास
अधिकतर सभ्यताओं में लिपि के अक्षरों को ही अंक माना गया। रोमन लिपि के अक्षर I को एक अंक माना गया क्योंकि यह शक्ल से एक उंगली जैसा है। इसी तरह II को दो अंक माना गया क्योंकि यह दो उंगलियों की तरह है। रोमन लिपि के अक्षर V को ५ का अंक माना गया। यदि आप हंथेली को देखे जिसकी सारी उंगलियां चिपकी हो और अंगूंठा हटा हो तो वह इस तरह दिखेगा। रोमन X को उन्होंने दस का अंक माना क्योंकि यह दो हंथेलियों की तरह हैं। L को पच्चास, C को सौ, D को पांच सौ और N को हजार का अंक माना गया। इन्हीं अक्षरों का प्रयोग कर उन्होंने अंक लिखना शुरू किया। इन अक्षरों को किसी भी जगह रखा जा सकता था। इनकी कोई भी निश्चित जगह नहीं थी। ग्रीक और हरब्यू (Hebrew) में भी वर्णमाला के अक्षरों को अंक माना गया उन्हीं की सहायता से नम्बरों का लिखना शुरू हुआ।
नम्बरों को अक्षरों के द्वारा लिखने के कारण न केवल नम्बर लिखे जाने में मुश्किल होती थी पर गुणा, भाग, जोड़ या घटाने में तो नानी याद आती थी। अंक प्रणाली में क्रान्ति तब आयी जब भारतवर्ष ने लिपि के अक्षरों को अंक न मानकर, नयी अंक प्रणाली निकाली और शून्य को अपनाया। इसके लिये पहले नौ अंको के लिये नौ तरह के चिन्ह अपनाये जिन्हें १,२,३ आदि कहा गया और एक चिन्ह ० भी निकाला। इसमें यह भी महत्वपूर्ण था कि वह अंक किस जगह पर है। इस कारण सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि सारे अंक इन्हीं की सहायता से लिखे जाने लगे और गुणा, भाग, जोड़ने, और घटाने में भी सुविधा होने लगी। यह अपने देश से अरब देशों में गया। फिर वहां से 16वीं शताब्दी के लगभग पाश्चात्य देशों में गया, इसलिये इसे अरेबिक अंक कहा गया। वास्तव में इसका नाम हिन्दू अंक होना चाहिये था। यह नयी अंक प्रणाली जब तक आयी तब तक वर्णमाला के अक्षरों और अंकों के बीच में सम्बन्ध जुड़ चुका था। जिसमें काफी कुछ गड़बड़ी और उलझनें (Confusion) पैदा हो गयीं।
इस कारण सबसे बड़ी गड़बड़ यह हुई कि किसी भी शब्द के अक्षरों से उसका अंक निकाला जाने लगा और उस शब्द को उस अंक से जोड़ा जाने लगा। कुछ समय बाद गड़बड़ी और बढ़ी। उस अंक वही गुण दिये जाने लगे जो कि उस शब्द के थे। यदि वह शब्द देवी या देवता का नाम था तो उस अंक को अच्छा माना जाने लगा। यदि वह शब्द किसी असुर या खराब व्यक्ति का था तो उस अंक को खराब माना जाने लगा। यहीं से शुरू हुई अंक विद्या: इसका न तो कोई सर है न तो पैर, न ही इसका तर्क से सम्बन्ध है न ही सत्यता से। यह केवल महज अन्धविश्वास है।
६६६ – शैतान का नम्बर
नीरो एक रोमन बादशाह हुआ था। वह बहुत क्रूर था लेकिन कोई यह खुले तौर पर नहीं कह सकता था। उसके नाम के अक्षरों का अंक ६६६ था। इसलिये इसे शैतान का अंक कहा जाने लगा। चलिये अब हस्तरेखा विद्या पर चलते हैं पर पहले डा. जोसेफ बेल के बारे में बात करते हैं जो कि शर्लौक होल्मस की कहानियां लिखने की प्रेणना रहे।
हस्तरेखा विद्या
इरविंग वैलेस, कल्पित (fiction) उपन्यास के बादशाह हैं, पर उनका मन हमेशा अकल्पित (non-fiction) लेख लिखने में रहता है। उनके अनुसार वे कल्पित उपन्यास इसलिये लिखते हैं क्योंकि उसमें पैसा मिलता है। उन्होंने बहुत सारे अकल्पित लेख लिखे हैं। इन लेखों को मिलाकर एक पुस्तक निकाली है, उसका नाम है, The Sunday Gentleman है यह पुस्तक पढ़ने योग्य है। इसमें एक लेख The Incredible Dr. Bell के नाम से है। यह लेख डा. जोसेफ बेल के बारे में है।
डा. जोसेफ बेल वे १९वीं शताब्दी के अंत तथा २०वीं शताब्दी के शुरू में, एडिनबर्ग में सर्जन थे और एक वहां के विश्वविद्यालय में पढ़ाते थे। वे हमेशा अपने विद्यार्थियों को कहते थे कि लोग देखते हैं पर ध्यान नहीं देते। यदि आप किसी चीज को ध्यान से देखें तो उसके बारे में बहुत कुछ बता सकते हैं। उन्होंने बहुत सारे विद्यार्थी को पढ़ाया, उनमें से एक विद्यार्थी का नाम था आर्थर कैनन डॉयल, जो कि शर्लौक होल्मस के रचयिता हैं।
इस लेख में डा. बेल के बहुत सारे उदाहरण बताये गये हैं जब उन्होंने किसी व्यक्ति को देखकर उसके बारे में बहुत कुछ बता दिया। शर्लोक होल्मस एक जासूस थे और कहानियों में ध्यान पूर्वक देखकर बहुत कुछ सुराग ढूढ़ कर हल निकालते थे। आर्थर कैनन डॉयल ने जब शर्लोक होल्मस की कहानियां लिखना शुरू किया तो उसका चरित्र डा. बेल के चरित्र पर और डा. वाटसन का चरित्र अपने ऊपर ढ़ाला।
यदि आप किसी कागज को मोड़ें तो हमेशा पायेंगे कि उस कागज को जहां से मोड़ा जाता है, उसमें चुन्नट (Crease) पड़ जाती है। इस तरह से जब हम हंथेली को मोड़ते हैं तो जिस जगह हमारी हथेली मुड़ती है, उस जगह एक चुन्नट, रेखा के रूप में पड़ जाती है। हथेलियों की रेखायें, हाथ के मुड़ने के कारण ही पड़ती हैं।
हम किसी के हाथ को ध्यान से देखें तो कुछ न कुछ उस व्यक्ति के बारे में पता चल भी सकता है। शायद यह भी पता चल जाय कि वह व्यक्ति बीमार है या नहीं। पर उसकी हंथेली की रेखाओं को देखकर यह बता पाना कि उस व्यक्ति की शादी कब होगी, वह कितनी शादियां करेगा, कितने बच्चे होंगे, या नहीं होंगे। यह सब बता पाना नामुमकिन है। यह सब भी ढ़कोसला है।
निष्कर्ष
ज्योतिष, अंक विद्या, और हस्त रेखा विद्या में कोई भी तर्क नहीं है: यह महज अन्धविश्वास है। फिर भी, हमारे समाज में बहुत सारे काम इनके अनुसार होते हैं। बड़े से बड़े लोग इन बातों को विचार में रख कर कार्य करते हैं। शायद यह सब इसलिये क्योंकि यह कभी कभी एक मनश्चिकित्सक (psychiatrist) की तरह काम करते हैं। आप परेशान हैं कुछ समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। मुश्किल तो अपने समय से जायगी पर इसमें अक्सर ध्यान बंट जाता है और मुश्किल कम लगती है। पर इसका अर्थ यह नहीं कि इनमें कोई सत्यता है या यह अन्धविश्वास नहीं है या ये टोने टुटके से कुछ अलग है।
पिछली शताब्दी में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में जब भी लोगों का नाम लिया जायगा तो उसमें दो लोग अवश्य रहेंगे – आइज़ेक एसीमोवव और कार्ल सेगन (Carl Sagan)।
यदि आपको १९८० के दशक में दूरदर्शन की याद हो तो आप हर रविवार को आने वाले टीवी सीरियल Cosmos को नहीं भूले होंगे। यह कार्ल सेगन ने ही बनायी थी। इसके बाद इसी नाम से यह पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित हुई। यहां ज्योतिष पर कार्ल सेगन के विचारों को भी सुने।
नोट: मेरे हर चिठ्ठे की तरह इस लेख की सारी चिठ्ठियां भी कौपी-लेफ्टेड हैं। आपको इनका प्रयोग व संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को) दें और अच्छा हो कि इस चिट्ठे की चिट्ठी से लिंक दे दें।
thik thak he.
(ठीक ठाक है।)
apna haath mujhe dikhana or main bataunga ki aapke kitne bachche hai, or kitni shaadi hai, kon sa bachcha aapko pyar karta hai or kitne ladke or kitni ladkiya hai,
राजेश जी, मेरा हाथ पढ़ने की जरूरत नहीं। यदि आप मेरा चिट्ठा पढ़ते हैं तो न केवल यह सब पर बहुत कुछ बता सकते हैं
उन्मुक्त
priya mitra, aapne jyotish ko bakvas sabit karane ke liye adhar to bahut liye. jyotish ko khagol se bhi jora. jitni fantasi ap likh sakate the, utna to apne likh hi diya hai. lekin jyotish, ank shastra aur hast rekha vigyan ko keval kuchh logo ki ajivika ka sadhan karar dena lekhakeeya duragraha ke atirikta aur kuchh bhi nahi hai. agar jyotish ka vajud na hota. to ek sal ki sthiti ka akalan panchangon men kaise ho pata. rahi bhat bhookampon ki to ankare batate hai ki kuchh khas grahon ke takarav ya unake beech banane valee yuti ke prabhav se dunia me kai bare bhookamp aye hai. koi bhi khagolvid ya mansoon vigyani iski sateek ghoshana aj tak nahi kar saka. khagol ya kal ganana ki bat kahkar jyotish ko nakara nahi ja sakata. yah lekh batata hai ki lekhak ka pala jyotish ki dukan chalane vale chhutbhaiyon se hi para hai. jyotish parhane ka hi nahi, ganit ka vishay hai. jo ganit janata hai, vah khagol ko nakar hi nahi sakata. meri salah hai ki jyotish grantho ka aur addhyan kren, apki shankaon ko door hote der nahi lgegi aur tab apko apne is satahi lekhan ke kathit pandity par kashta bhi hoga.
पांडे जी, आपकी टिप्पणी रोमन में लिखी होने के कारण, कम समझ में आयी। यदि देवनागरी या फिर अंग्रेजी में होती तो बेहतर था। फिर भी, आपने यह लेख पढ़ा, समय दिया और उस पर टिप्पणी की, इसके लिये धन्यवाद – उन्मुक्त
Bhai aisa nahin hai, shayad aapko koi sachcha jyotishi nahi mila, nahin to aap aisa nahin kehte…. Ye ek vigyan hai… jisme samay ke anusar grahon ki ganana karke bhavishaya mein hone wali ghatnaon ka aaklan kiya jaata hai…ye bhi sachch hai ki aaj logon ne paise ke liye ise badnaam kar diya hai,…. jyogish ke liye antergyan bahut jaroori hai.. magar ab to koi bhi kuchh kitabe padh kar jyothise hone kaa daava karta hai… likhne ko bahut kuchh hai… bas .. kabhi ho sake to bhrigu samhita ya naadi samhita jo sachhi ho ke baare mein padhna aur jaan lena.. saare sahk bhram door ho jaayenge…… Aapka Ravi….
me hand ke guru ungali par chandrakar Gol hai is ka kya arth hai?
किशोर जी, मैं ज्योतिष में विश्वास नहीं करता। मुझे तो यह टोना टुटका सा लगता है। मैं आपके सवाल का जवाब न दे पाउंगा। मेरी सलाह मानिये आप भी इसके चक्कर में न पड़िये – उन्मुक्त
jawab nahi very good
yah sahi hi jotish hi eshi say pura world chal raha hi kesi ko jada milta hi keshi ko kam.
विनोद जी, मैं माफी चाहूंगा पर आपकी बात सही नहीं है। ज्योतिष में कोई सत्यता नहीं है। यह केवल वहम है। यदि आप इस लेख को पढ़ेंगे तो आपको यही पता चलेगा – उन्मुक्त।
namskar,
mai manti hu jyotish ek bahut badi vdya hai .
or es vidya ka upyog vahi kar sakte hai jinhe enka pura jyan ho. aap unka bharosha na kare jo raste par baid kar batate ho aapka hath dekhte ho agar unhe hi apna bhgya pat ahota to vah khud khu?
es halat me hote.
सिद्धी जी, टिप्पणी करने के लिये धन्यवाद। यह अपने विश्वास की बात है पर मुझे नहीं लगता है कि ज्योतिष या हस्त रेखा या अंक विद्या में कोई सत्यता है। यह किसी भी टोने टुटके की तरह है। हां, मुश्किल के समय लोगों को कभी कभी शान्ति अवश्य दे देती है कि उनके अच्छे दिन भी आयेंगे। – उन्मुक्त
maine apki baat padi lekin hamare prachin vigyan mai kuchh tou hoga kya apne usko paqda hai aap jaise hi logo ki vajah se kya hamara vigyan pichhe nahi ho gaya hai pahle aap uski gaharai mai jaye aur fir uske bare mai bole hamare yaha aaj bhi bahut se vidvan hai jo apko is bare mai apki is galat dharna ko dur karne mai samrth hai.
ye baat sahi hai ki aap mai tark karne ki shaki hai lekin aap use es vigyan ke adyayn mai lagaye ho sakta hai ki es desh ko koi aap jaisa ak achha jyotish vidhya ka jankar mil jaye aur kuchh samay ke baad aap logo ki aap jaisi galat daharna ko dur karne ka prayas karte huae hame nazar aaye aap etne prachin vigyan ko tone totke kahte hai pahle aap es ke sager mai gota lagaye fir dekhiye ki aapko kitne moti milte hai
शैलेन्द्र जी, जैसा कि मैंने लेख में लिखा है कि शुरू के ज्योतिषाचार्य एक उत्तम खगोलशात्री थे, वैज्ञानिक थे। वे तब तक वैज्ञानिक थे जब तक वे तारों की गति, स्थिति के बारे में ज्ञानार्जन करते थे। इससे, हमारे जीवन में कोई असर नहीं होता – यह अन्धविश्वास है, इसमें कोई सत्यता नहीं है। हां, जब कोई आपके बारे में बात करता है, या आपके कष्ट निवारण की बात करता है तो आपको अच्छा लगता है।
हमारा विज्ञान किसकी वजह से पीछे हुआ है यह समझने की बात है, बहस की जरूरत तो नहीं होनी चाहिये। मेरे जैसे विचार रखने वाले बहुत कम लोग हैं ज्यादातर लोग तो ज्योतिष को सच मानते हैं। यदि सच न भी मानते हों तब भी अधिकतर लोग उसके अनुसार कार्य करते हैं – उन्मुक्त।
किसी विषय पर टिप्पणी करने के लिये उसका ज्ञान होना आवश्यक है अन्यथा बात कम और कुतर्क ज्यादा होते हैं। ज्योतिष पर टिप्पणी करने से पूर्व कृपया एक संजीदा विद्यार्थी की तरह इसका ज्ञान किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से प्राप्त करें।
संजीव जी, आपकी बात सब पर लागू होती है। मेरे विचार से कुतर्क को तर्क से काटा जा सकता है। मेरी समझ में, जो थोड़ा बहुत आया, वह लिखा। यह तो विचारों और सोच की भिन्नता है। आप आये, अपने विचार रखे, इसका शुक्रिया। – उन्मुक्त
MERI UMR DO YA TIN JYOTISHIYO NE AUR HAST REKHA DEKHNE WALO NE BAHUT HI KAM BATAI HAI UNHONE MERI UMR KARIB 28-30 SAAL BATAI HAI ABHI MERI UMR 28 SAAL HAI JISKE KARAN MAIN BAHOT HI PARESHAAN RAHTA HUN. PAR AAPKE LEKH KO PADHNE KE BAD MUJME EK NAYE SHAKTI KA SANCHAR HUA HAI AUR MAIN BHI ESE PAKHAND HI SAMAJANE LAGA HUN. AAPKE VICHAAR PADHKAR ACCHA LAGA. DHANYAWAD
धीरज जी, मुझे प्रसन्नता है कि आपको मेरी चिट्ठी अच्छी लगी और आपमें नयी शक्ति का संचार हुआ। आप बिलकुल चिन्ता न करें – उन्मुक्त
I believe in astrology and this is a big factor of every person.
त्रिलोक जी, आप मेरे चिट्ठे पर आये, चिट्ठी पढ़ी, टिप्पणी की आपका शुक्रिया। न केवल आपके, पर सबके विचारों का स्वागत है। आपका यह कहना कि ज्योतिष सबके जीवन में एक बड़ा तत्व है, ठीक नहीं है। – उन्मुक्त।
उन्मुक्तजी,
आपका ये लेख पढकर मन प्रसन्न हो गया । टिप्पणियों को देखकर थोडा सा अफ़सोस भी हुआ लेकिन जिस बात से अधिक अफ़सोस होता है उसकी कहानी आपको सुनाते हैं । मैं तो अभी अविवाहित विद्यार्थी ही हूँ लेकिन मेरे कालेज के साथ के अन्य मित्र या तो शादी कर चुके हैं या कर रहे हैं । उनमें से एक मेरा अभिन्न मित्र है, उससे बात हुयी तो पता चला कि शादी के चक्कर में वो भी राशि, कुंडली, मंगली इत्यादि के चक्कर में पडा हुआ है । उसको समझाने का प्रयत्न तो किया लेकिन कुछ खास फ़ायदा नहीं हुआ ।
मेरे माता पिता का विवाह बिना कुंडली मिलाये हुआ । मेरे और मेरी बहनों के जन्म के अवसर पर भी कुंडली नहीं बनवाय़ी गयी । जब मेरी बडी बहन का विवाह होना था तो कुछ लडके वालों ने कुंडली मांगी तो याद आया कि घर पर किसी की भी कुंडली नहीं है । दीदी की कुंडली बनवाकर भेज दी गयी लेकिन हमारे परिवार वालों ने कुंडली को महत्व नहीं दिया । मौज मौज में मेरी भी कुंडली बनी जिसमें ज्योतिष ने अगले कुछ सालों का भविष्य भी बताया । उसने ये भी कहा कि “पत्नी रूपता में पति से कम” जिसको सुनकर मेरे जैसे रूपवान बेटे की माताजी ने अपना माथा पकड लिया
इस बात पर अभी भी घर में खूब विनोद होता है लेकिन कोई इन चक्करों में नहीं पडता ।
बहुत सारे लोग तर्क देते हैं कि हमारे जीवन पर विभिन्न ग्रहों के गुरूत्वाकर्षण बल का प्रभाव पडता है और इस हिसाब से ग्रहों की स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है । इस लिहाज से सोचा जाये तो गुरूत्वाकर्षण की Inverse Square Dependence से शुक्र और ब्रहस्पति की स्थिति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि आपके जन्म के समय आस पास की चीजें कहाँ रखी है । कमरे में रखे फ़्रिज को आपके पास खिसकाकर सारे ग्रहों की स्थिति के प्रभाव In Principle समायोजित किये जा सकते हैं ।
इसके अलावा पृथ्वी की गतियों और राशियों के बारे में जानकारी बहुत काम की लगी । रिचर्ड फ़ाईनमैन वाले लेख के बाद आपके चिट्ठे पर ये मेरा सबसे पसंदीदा लेख बन गया है ।
आभार,
…
भारतेन्दु जी, आपने मेरी यह चिट्ठी पढ़ी, टिप्पणी की – आपका आभार, शुक्रिया। आपकी टिप्पणी शालीनता से बाहर थी इसलिये मैंने उसे प्रकाशित नहीं किया। आशा है कि आप मुझे माफ करेंगे – उन्मुक्त
you are like a frog who jump around the well and like a pigion who feel that if he close his eyes the cat back away.
अजित जी, आपके भी विचारों का स्वागत है। आपने लेख पढ़ा, अपने विचार रखे – आपका शुक्रिया – उन्मुक्त।
Hiiii,,,
her padne walo ko is shaqhs ka namaskar main apni baat ek line main rekunga –
UNMUKTH JI AGER AAP YE KEHTE HAI KI JYOTISH GALAT HAI TO IT’S NOT FAIR . AGER AAP YE KEHTE HAI KI USKE SIDHANT GALAT HAI TO YE GALAT HAI . YE TO KUDA K US NIRDAY K KAFHI KAREEB LATA HAI JO HUM AGE ANE WALE FUTURE MAIN DEKHTE HAI. THANKS
sir, in my opinion, jyotish or bhayishvani depends upon the bessings of god and guru of astrologer, TONE or TOTKE can do only magic, but totally god and guru has super power.
शर्मा जी, मेरे विचार से किसी के पास जैसी सुपर पॉवर आप कह रहें हैं, नहीं है पर आपके विचारों का स्वागत है – उन्मुक्त।
[...] न तो ज्योतिष, न ही हस्त रेखा या अंक विद्या प…। मैं मन्दिर जाता हूं – उसकी बनावट या [...]
ज्योतिष पूर्णतया वैज्ञानिक है. कुंडली तो दूर की बात है. हमारे हाथों में भी सब कुछ दर्ज होता है. जन्म तिथि, उम्र, आयु, स्वास्थ्य, मानसिक झुकाव आदि. जरा गूगल तो कीजिये.
मनोज जी, किसी को देख कर उसके स्वास्थ के बारे में कुछ कहा जा सकता है पर यह बता पाना कि उसकी कितनी शादी हुई हैं या कितने बच्चे होंगे – नामुमकिन है। यह भी नामुमकिन है कि यह बात उसकी जन्म तिथी से निकाल ली जाय। मेरे विचार में ज्योतिष एक तरह का टोना टुटका है और इसमें कोई सत्यता नहीं है। यह मेरे विचार हैं। मैंने अपने विचारों के समर्थन में लिखा है और तर्क दिये हैं। यह इस कारण गलत नहीं हो जाता कि गूगल करने में बहुत कुछ मिलेगा। कोई बात अन्तरजाल पर लिखी हो इसका अर्थ यह नहीं कि वह सत्य है। यह केवल कारण देते हुऐ, तर्क से, काटा जा सकता है। फिर भी यदि कोई इसे मानता है, जैसे कि आप, तो उनका भी स्वागत है – उन्मुक्त।
ज्योतिष नक्षत्रों के अध्ययन का शास्त्र है। प्राचीन काल से ही भारत में नक्षत्रों एवं ग्रहों की गतियों एवं स्थितियों का अध्ययन समय की सही गणना करने के उददेश्य से किया जाता था। धार्मिक अनुष्ठानों जैसे यज्ञ इत्यादि के लिए सही समय का होना अत्यधिक आवश्यक समझा जाता था। इस उददेश्य की प्राप्ति के लिए तात्कालीन चिंतकों ने इस विधा में उल्लेखनीय महारत हासिल की जो कि उस समय अन्यत्र देखने में नही मिलता था। परंतु बाद में इस का उपयोग काल्पनिक रूप से भविष्यवाणियां करने के लिए होने लगा जो कि पूर्णतया अंधविश्वास पर आधारित थीं और जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था । अंतत यह विषय दो भागों में बंट गया — एक ज्योतिष विज्ञान अथवा एस्ट्रानमी, दूसरा फलतज्योतिष अथवा एस्ट्रालजी। ऐस्ट्रोनोमी अथवा ज्योतिष विज्ञान अब भी विज्ञान (गणित)की शाखा के रूप में स्थापित है और इसके द्वारा गणितीय आघार पर ग्रहों और सौर मंडल में घटने वाली घटनाओं का आकलन किया जाता है जो कि अब कम्पयूटरों की मदद से अधिक शुध्दता के साथ किया जाता है। फलित ज्योतिष आज भी व्यापक रुप से भविष्यवाणी करने के लिए प्रचलित है। फ़लित ज्योतिष के द्वारा भूत काल में घटने वाली घटनायें,वर्तमान मे चल रही घटनायें,और भविष्य में जो घटनायें घटेंगी,उनका देश,काल,और परिस्थिति के अनुसार कठन किया जाता है। जो लोग देश,काल,परिस्थति को समझते हैं,और उसका समायोजन करने के बाद कथन करने में पूर्ण हैं,वे ही ज्योतिषी कहे जाते हैं,केवल कुछ सिद्धान्तों के आधार पर हर किसी के प्रति कथन करना और निजी स्वार्थ के लिये जिसके प्रति कथन किया जाता है,उसे अच्छा बुरा जो भी उसके जीवन के लिये है न कथित करके केवल उसके लिये बुरी बातों का कथन कर डरा कर धन ऐंठने का उपक्रम रचने वाले लोगों ने इसे झूठा साबित करने की कोई कसर बाकी नहीं छोडी है.
आपके इस चिट्ठे पर आने के लिये शुक्रिया। आपके विचारों का भी स्वागत है। मैंने तर्क और तथ्यों के द्वारा समझाने के प्रयत्न किया है कि ज्योतिष, हस्तरेखा विद्या, अंक विद्या में कोई सत्यता नहीं है। यह तर्क या फिर तथ्यों के द्वारा ही गलत सिद्ध की जा सकती है न केवल भावनाओं के आधार पर – उन्मुक्त
अभिमन्यु जी, आपका शुक्रिया कि आप मेरे चिट्ठे पर आये और टिप्पणी की।
मैं माफी चाहूंगा कि मैं उसे प्रकाशित नहीं कर रहा हूं। वह शालीनता के दायरे से बाहर थी।
मैंने उन विचारों को भी प्रकाशित करने पर विश्वास करता हूं जो मेरी बात से मेल नहीं खाते। सब तरह के विचारों का स्वागत है यदि वे तर्कसंगत हों। यदि यदि वे क्रोध से लिखे गये हों तो नहीं – उन्मुक्त
SIR JI AAPNE LIKHA KI:-
यदि आप किसी कागज को मोड़ें तो हमेशा पायेंगे कि उस कागज को जहां से मोड़ा जाता है, उसमें चुन्नट (Crease) पड़ जाती है। इस तरह से जब हम हंथेली को मोड़ते हैं तो जिस जगह हमारी हथेली मुड़ती है, उस जगह एक चुन्नट, रेखा के रूप में पड़ जाती है। हथेलियों की रेखायें, हाथ के मुड़ने के कारण ही पड़ती हैं।
SHIRIMAAN JI CHALO AAPKI BAAT MAAN LE KI HATHELI MODNE SE CREASE BAN JAATI HAI, ” LEKIN AAPKE TARK KE ANUSAAR HATHELI MODNE SE SIRF LUCK LINE YA FIR STUDY LINE KI CREASE HI BAN SAKTI HAI”, JABKI HAATH MEI TO SHANI REKHA, SURYA REKHA, TRISHOOL MARK, KOTHI, TIL, CROSS, MACHHALI KE NISHAAN, ISKE ALAWA ANGULIYO KE PORON MEI BHI SIDHI REKHAYEN BANI HOTI HAI TO MUJE YE SAMAJ MEI NAHI AAYA KE ANGULIYA ESE KIS TARAH SE MUD SAKTI HAI KE UNME SIDHI REKHAYE BAN JAYE, AUR MUJE YE BHI SAMAJ MEI NAHI AAYA KE PAANV TO MUDTE NAHI HAI TO FIR PAAVON MEI REKHAYE KAISE BAN JAATI HAI?
ANT MEI MERA YE KAHNA HAI KI KUCHH REKHAYE TO AAP KAHTE HAI JAISE HAATH KE MUDNE SE BAN SAKTI HAI BUT ESI BAHUT SI REKHAYE HAI JINKA HAATH KE MUDNE SE KOI SAMBAND NAHI HAI, SO UNMUKT JI ISPAR AUR JAYADA JAANKARI LE. APKA CHITHHA PAD KAR MUJE TO ESA LAGA JAISE KI AAPNE KISI BOOK MEI SE YAAD KARKE VAISE KA VAISA APNE CHHITHE MEI LIKH DIYA.
KUCHH GALAT LIKH DIYA TO MAAF KARNA.
भूषन जी, आप मेरे चिट्टे पर आये, टिप्पणी की इसके लिये शुक्रिया।
मैंने जो कुछ लिखा है वह अध्यन कर लिखा है पर यह कह देना कि कहीं से कॉपी कर लिया है ठीक नहीं है – कम से कम मैं तो ऐसी किसी पुस्तक को नहीं जानता – उन्मुक्त
I Like your comments on hast rekha vigyan
sir aap ke dwara bataya gaya jyotish shastra mujhko to accha nahi laga
aap hast rekha ke bare me batane ke liye khaa aur science ke bare main bataya main to aap se santusth nahi hu.
पवन जी, आप आये, चिट्ठी पढ़ी, टिप्पणी की इसका शुक्रिया। विचारों में अन्तर तो होता ही है – उन्मुक्त
aapki ki tipnni acchi lagi agar aap ek book likhkar lunch karna chahte ho to dhany wad
jyotish andhvishvaas nhi balki saavdhan krne ka ek madhyam h, jiska logo ne galat use kiya h.
(ज्योतिष अंधविश्वास नहीं है बाल्कि सावधान करने का एक माध्यम है, जिसका लोगों ने गलत प्रयोग किया है।)
मैँने आपका लेख पढ़ा और टिप्पणियाँ भी।
अच्छा लगा।
jyotish is true and we love jyotish।
राजेन्द्र जी, आपके विचारों का भी स्वागत है – उन्मुक्त।
MR. UNMUKTA JEE BAHUT ACHHA AAPKI BAATEN KAFI HAD TAK SACHCHAI KO CHOOTI SI LAGTI HAI MAGAR HAI NAHI..
AAP NE JYOTISH VIGYAN KO KHAGOL SHASTRA KE KHMBHE PAR TAANGNE ME KOI KASAR NAHI CHHODI..
MAI SHRIMAN SHARMA JI SE PURNA SAHMAT HOON
किसी विषय पर टिप्पणी करने के लिये उसका ज्ञान होना आवश्यक है अन्यथा बात कम और कुतर्क ज्यादा होते हैं। ज्योतिष पर टिप्पणी करने से पूर्व कृपया एक संजीदा विद्यार्थी की तरह इसका ज्ञान किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से प्राप्त करें।
KYON KI JIS CHIZ KO JANANE KE LIYE LOGO NE APNA JEEVAN KE EK EK KSHAN KO SADUPYOG KARKE JAANA USH CHIJ KO AAP MUDHTA BATA RAHE HAI AAJ BHALE HI BAZAR BHERIAON TATHA GIDRO SE BHAR GAYA HO AUR DHARM KO DHANDHA BANA KE USE KAR RAHE HAI ISHKA MATLAB YAH NAHI KI DHARMA KA KOI ASTITVA NAHI HAI
AAP KE MUH SE JO SHABDA NIKLTE HAI USKA BHI ASTITV HOTA HAI ..
HO SAKTA HAI WAH SHABDA AAP BHASA ME NAHI HO ATHWA AAP KI SAMAJH ME NAHI AAYE SHAYAD AAP IS BAAT KO NAHI JANTE KI EK PER SE SUKHI PATTI JO GIRTI HAI USHKA BHI SAMBANDH BRAHMAND KE GRAHO AUR TARO SE HAI………
SO PLEASE FIRST YOU LEARN..
I AGREE WITH ALL THESE
priya mitra, aapne jyotish ko bakvas sabit karane ke liye adhar to bahut liye. jyotish ko khagol se bhi jora. jitni fantasi ap likh sakate the, utna to apne likh hi diya hai. lekin jyotish, ank shastra aur hast rekha vigyan ko keval kuchh logo ki ajivika ka sadhan karar dena lekhakeeya duragraha ke atirikta aur kuchh bhi nahi hai. agar jyotish ka vajud na hota. to ek sal ki sthiti ka akalan panchangon men kaise ho pata. rahi bhat bhookampon ki to ankare batate hai ki kuchh khas grahon ke takarav ya unake beech banane valee yuti ke prabhav se dunia me kai bare bhookamp aye hai. koi bhi khagolvid ya mansoon vigyani iski sateek ghoshana aj tak nahi kar saka. khagol ya kal ganana ki bat kahkar jyotish ko nakara nahi ja sakata. yah lekh batata hai ki lekhak ka pala jyotish ki dukan chalane vale chhutbhaiyon se hi para hai. jyotish parhane ka hi nahi, ganit ka vishay hai. jo ganit janata hai, vah khagol ko nakar hi nahi sakata. meri salah hai ki jyotish grantho ka aur addhyan kren, apki shankaon ko door hote der nahi lgegi aur tab apko apne is satahi lekhan ke kathit pandity par kashta bhi hoga.
Bhai aisa nahin hai, shayad aapko koi sachcha jyotishi nahi mila, nahin to aap aisa nahin kehte…. Ye ek vigyan hai… jisme samay ke anusar grahon ki ganana karke bhavishaya mein hone wali ghatnaon ka aaklan kiya jaata hai…ye bhi sachch hai ki aaj logon ne paise ke liye ise badnaam kar diya hai,…. jyogish ke liye antergyan bahut jaroori hai.. magar ab to koi bhi kuchh kitabe padh kar jyothise hone kaa daava karta hai… likhne ko bahut kuchh hai… bas .. kabhi ho sake to bhrigu samhita ya naadi samhita jo sachhi ho ke baare mein padhna aur jaan lena.. saare sahk bhram door ho jaayenge…… Aapka Ravi….
SHIRIMAAN JI CHALO AAPKI BAAT MAAN LE KI HATHELI MODNE SE CREASE BAN JAATI HAI, ” LEKIN AAPKE TARK KE ANUSAAR HATHELI MODNE SE SIRF LUCK LINE YA FIR STUDY LINE KI CREASE HI BAN SAKTI HAI”, JABKI HAATH MEI TO SHANI REKHA, SURYA REKHA, TRISHOOL MARK, KOTHI, TIL, CROSS, MACHHALI KE NISHAAN, ISKE ALAWA ANGULIYO KE PORON MEI BHI SIDHI REKHAYEN BANI HOTI HAI TO MUJE YE SAMAJ MEI NAHI AAYA KE ANGULIYA ESE KIS TARAH SE MUD SAKTI HAI KE UNME SIDHI REKHAYE BAN JAYE, AUR MUJE YE BHI SAMAJ MEI NAHI AAYA KE PAANV TO MUDTE NAHI HAI TO FIR PAAVON MEI REKHAYE KAISE BAN JAATI HAI?
ANT MEI MERA YE KAHNA HAI KI KUCHH REKHAYE TO AAP KAHTE HAI JAISE HAATH KE MUDNE SE BAN SAKTI HAI BUT ESI BAHUT SI REKHAYE HAI JINKA HAATH KE MUDNE SE KOI SAMBAND NAHI HAI, SO UNMUKT JI ISPAR AUR JAYADA JAANKARI LE. APKA CHITHHA PAD KAR MUJE TO ESA LAGA JAISE KI AAPNE KISI BOOK MEI SE YAAD KARKE VAISE KA VAISA APNE CHHITHE MEI LIKH DIYA.
KUCHH GALAT LIKH DIYA TO MAAF KARNA.
सुबोध सागर जी, आपने मेरी चिट्ठी पढ़ी, दो बड़ी बड़ी टिप्पणीयां की, आपका और आपके विचारों का स्वागत है – उन्मुक्त।
unmukth ji, ager apke paas thoda samay ho to please aap rajsthan main bhilwara city k paas KAROYEE vilage ek baar zarur jaaye vaha per jyotshacharya ji se mile
unse milne k baad apko jyotish kya he ye pata chalega
aur aap chahe to unse apna getup change karke mile to bhi wo apke bare me sahi hi batayenge
अभिषेक जी, बिलवारा मेरे कस्बे से दूर है। फिर भी मैं उन ज्योतिषाचार्य जी से मिलने का प्रयत्न करूंगा। आपने लेख पढ़ा इसका आपको शुक्रिया – उन्मुक्त
sir you wrote many things about astrology
but sorry you are completely wrong … I think you didn’t meet from real astrologer if you meet, then you know that what is astrology … Sir I am a engineer and still I believe at astrology but today you could not find a real astrologist because a real astrologist dose not meet at any street ,real astrologist never use that art for few money so if u want to prove your calculation then please find a real astrologer, I am sure if you find them then your death, marriage, children and your all things will be open…. if you still do not believe in astrology
then send me your birth date, time and place i will tell your future………..
सतीश जी, आप आये, चिट्ठी पढ़ी, टिप्पणी की इसका शुक्रिया। विचारों में अन्तर तो होता ही है – उन्मुक्त
apka lekh pdkr bda acha lga.mn kafi hlka sa ho gya.aaj hmare smaj me etni vrantiya feli hooei he jinko door krke hi hmara or des ka vikas smvy ho skta he.ese lekh jari rke.
main is tark-kutark main nahin jana chahata ki unmukt ji sahi hai ya unko galat kahne wale. main to ek baat janta hoon ki is jyotish aur ank shashtra iitiyadi ki line main pichle 25-30 saalon se laga hoon, parantu abhi tak kisi bhi nateeje par nahin pahoonch paya hoon. karoi ke pandit ji bhi mil chuka hoon aur in 25-30 saalon main bade se bade jyotish acharya se mulakat ki, lekin koi phal nahin mila. ant main ek hi nateejey par pahooncha hoon ki ye ek manovigayan hai, aur kuch nahin. phir bhi isko padhne main maja aatta hai. safar jaari hai. dekhta hoon kahan aur kab kitni saflta milti hai.
Dear Sir
Mujhe khed h ki aapne apna kimti samay “jyotish” jaise bakwas se vishay par barbaad kiya, khair ye hum Bhartiyo ki AAdat hoti h ki hum jise pasand nahi karte,uske piche Hth dho kar piche pad jate h.
Aap bura na mane to me aapse kuch prashn karna chahunga, Agar aap jawb de to me Aapka aabhari rahunga.
1- Yanha aapne leka likha h Jyotish “purntaya Bhartiya gyan” pe, lekin udaharan aapne sabhi bahar k diye h, kyo?
2- ek taraf aap bhartiya gyan ki tarif kar rahe h, dusri aur isi ki 1 mahatvapurna shakha par avishvas kar rahe h, kyo?
3- Aapne likha “पहले के ज्योतिषाचार्य वास्तव में उच्च कोटि के खगोलशास्त्री थे और अपने देश के खगोलशास्त्री दुनिया में सबसे आगे।” matlab kahi na kahi aap b jyotish ko mante h?
4- Krapya aap anyatha na le lekin koi b vyakti apna samay aur urja aise vishay me lagata h jisme use vishvas ho lekin aap to uske piche bhaag rahe h, jiska koi astitva hi nahi h (Aapke anusar), Aisa kyo?
5- Chalte Chalte 1 baat aur kahna chahunga krapya ise bhi anytha na le, ye kathan purntaya vyaktigat h,aap chahe to ise prakashit na kare lekin me puchana chahunga “kya aap bachapan se hi aise h”?
kise bji prakar k durvyavhar k liye kshama chahunga.
नितिन जी,
आप न केवल चिट्ठे आये पर टिप्पणी की इसके लिये धन्यवाद। मैं नहीं समझता कि मैंने इस विषय पर लिख कर समय बर्बाद किया। ज्योतिष अन्ध-विश्वास है। इस पर लोग बेकार में समय न जाया करें पर कर्म पर विश्वास करें, इसी लिये यह लेख लिखा। अब आपके प्रश्नों के उत्तर
१ – ज्योतिष केवल भारत में नहीं पर सब जगह है। इसीलिये बाहर के भी उदाहरण दिये।
२, ३, ४ – खगोलशास्त्र और ज्योतिष में फर्क है। एक विज्ञान है तो दूसरा नहीं। मैं खगोलशास्र में विश्वास करता हूं पर ज्योतिष में नहीं। मेरे विचार से, ज्योतिष अन्ध-विश्वास है। इसिलिये इसका तर्क देते हुऐ यह लेख लिखा। हांलाकि बहुत से लोग न केवल इस पर विश्वास करते हैं पर यह उन्हें यह शान्ति देता है।
५ – मेरे घर में बचपन से विज्ञान का वातावरण रहा। मैं इसी में पला और बड़ा हुआ। मेरा हमेशा से ही यही विश्वास रहा कि ज्योतिष में कोई सत्यता नहीं है। हम सब भाई-बहनों या हमारे बच्चों की न तो जन्म-कुन्डली बनी न ही हमारी शादी या कोई उत्सव किसी ज्योतिषाचार्य की सलाह से किया गया। हम सब अपने जीवन में सुखी हैं, सन्तुष्ट हैं।
उन्मुक्त
Dear Sir ji,
NAmaskar,
mafi chahungaa mai aapka samay barbad kar raha hu… mere mitra bhi mere sath hai kah rahe hai aap jaise logo ne hi bhrat ki lutiaa duboi hai.. to kripya aapse koi sambad na karu…
samay dene ke liye dhanybad…
rohit agrawal
रोहित जी,
आप मेरे चिट्ठे पर आये, इतना समय दिया, न केवल लेख पढ़ा पर टिप्पणी की – आपको धन्यवाद।
इस पर भी विचार करें क्या मुझे अपने विचार रखने की भी स्वतंत्रता नहीं है – उन्मुक्त
उन्मुक्त ji
aap ne lakh aacha likha hai par fir bhi har insaan ke man me apne andekhe bhabisya ko janne ki lalsa hoti hai
jiska fayda kuch murkh log udate hai aur aap jese log jyotish ko galat tahrane lgte hai
jab ki sach yah h ki jyotish bharat ki vidya hai jo satya hoti hai agar uska sahi jankar uplabdh ho to me to jyotish vidya ko manti hu
I Like It.
jyotesh sahi hai.yadi apko bharosa nahi ha to apna date of birth,year,time and place send kare.mai apke bare mai sab bata dooga.jyotesh se sab jana ja sakta hai. gise viswasa na ho to mujhse prasna poochhe.jyotesh par bharosa ho jayega.
शेखर जी, आप मेरे चिट्ठे पर आये, चिट्ठी पढ़ी, टिप्पणी की आपका शुक्रिया। मेरा जन्मदिन जानने की जरूरत नहीं है। यदि आप मेरा चिट्ठा पढ़ते हैं तो आप मेरे बारे में सब कुछ बता सकते हैं
उन्मुक्त
apki baat sunne me thodri logical hai magar ye jaan le ki bhagwan ki banai koi shastra galat nahi ho sakti phir jyotish to shastron ki janani hai jarurat hai isme aastha ewam biswas ke saath dubne ki
Well written Mr. Unmukt,
First of all I would like to answer the comments which said that Mr. Unmukta should learn JYOTISH before writing.
I ask those people, have they learnt Jyotish before believing it?
If anybody, who has commented here, thinks himself as real astrologist then tell me, in which city was I on 20-09-2009?
Great Dayanand gave his life to make people aware about these blind faiths but these people will never learn anything.
In the end thanks to Mr. Unmukt for this brilliant article.
Iimformation displayed on this page is usefull.