वामन, राजा बलि से याचना करते हुऐ चित्र विकिपीडिया से।
इस चिट्ठी में चर्चा है कि हमें क्यों मुक्त सॉफ्टवेयर और मुक्त मानक का प्रयोग करना चाहिये।
आज सितंबर माह का तीसरा शनिवार है। यह दिन मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस (Freedom software Day) के रूप में मनाया जाता है। इसलिये यह चिट्ठी आज प्रकाशित की जा रही है।
राजा बलि, प्रह्लाद के पौत्र थे पर उनमें असुर भाव था। इस भाव को नष्ट करने और उसका घमंड चूर करने के लिये भगवान विष्णु ने अवतार लिया। इस अवतार में वे बौने रूप में थे। इसे नाते उनका नाम वामन (Vamana) रखा गया था। यह कथा भगवान के वामन अवतार नाम से जानी जाती है। इस विज्ञान कहानी में उसी कथा का पुट है। इसीलिये इसका नाम ‘वामन की वापसी’ है।
‘पर उन्मुक्त जी, इस विज्ञान कहानी का, मुक्त मानक से क्या सम्बन्ध?’
दोनो में कुछ तो सम्बन्ध है। आप आगे क्यों नहीं पढ़ते। यह लेख निम्न भागों में है।
- मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं;
- यह क्या होते हैं;
- इनका क्या फायदा है;
- प्रसिद्ध खगोलशास्त्री जयंत विष्णु नार्लीकर (Jayant Vishnu Narlikar) की लिखी विज्ञान कहानी वामन की वापसी;
- इन कहानी और मुक्त मानक में क्या सम्बन्ध है।
मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं?
महात्मा गाँधी ने एक बार कहा था,
‘Means are more important than the end: it is only with the right means that the desired end will follow.’
साधन अंत से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि साधन ठीक होगें तो ही वांछित अंत मिल सकता है।
गांधी जी का दर्शन, कानून का भी मूलभूत सिद्वांत है। लार्ड डैनिंग (Lord Denning) पिछले शताब्दी के सबसे प्रसिद्व न्यायाधीशों में से एक थे। उनका कहना है,
‘But it is fundamental in our law that the means that are adopted… should be lawful means. A good end does not justify bad means.’ RVS IRC Exparte Rossminster Ltd. 1979 ( 3) AllELR 385.
हमारी न्याय प्रणाली में यह महत्वपूर्ण है कि जो भी साधन प्रयोग में लाये जाएँ वे कानूनी हो। एक अच्छे अंत को पाने के लिए, खराब साधन को ठीक नहीं कहा जा सकता है।
यदि इस बात को हम सूचना प्रधोगिकी के क्षेत्र में देखें तो,
- सूचना प्रधोगिकी का अंत है – सबको सूचना को पहुँचाना।
- इसका साधन है कि यह किस तरह से किया जाए। इसमें किस तरह के सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाए, किस तरह के मानक प्रयोग किये जाएँ।
मुक्त सॉफ्टवेयर और मुक्त मानक अच्छे साधन हैं इसलिए इसका प्रयोग करना उचित है और इन्हीं के प्रयोग से हम सूचना प्रधोगिकी के वांछित अंत को पा सकेंगे।
मुक्त मानक क्या होते हैं?
मानक, कम्पयूटर दुनिया में, सूचना रखने का तरीका होता है ताकि कोई भी कम्पयूटर प्रोग्राम,
- उस सूचना को समझ सके।
- उसे आपकी स्क्रीन पर दिखा सके और
- यदि जरूरत पड़े तो उसमें संशोधन किया जा सके।
कम्पूयटर में अलग-अलग तरह की सूचनाएं अलग-अलग मानक में रखी जाती हैं। जैसे कि टेक्सट (text), वीडियो, आडियो, चित्र के लिए अलग अलग मानक है। किसी एक तरह की सूचना को भी रखने के भी कई मानक होते हैं। जैसे आडियो फाइल को mp3 में या ogg मानक में रखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त भी कई अन्य मानक भी हैं।
मानक अक्सर मालिकाना होते हैं।
- मानक के काम करने का तरीका यदि गुप्त हो तब मानक ट्रेड सीक्रेट की तरह सुरक्षित होता है। एम एस वर्ड अपनी टैक्सट फाइलों को doc मानक में रखता है। यह गुप्त है और ट्रेड सीक्रेट की तरह सुरक्षित है।
- मानक प्रकाशित होकर भी मालिकाना हो सकता है। इस दशा में वे पेटेंट की तरह सुरक्षित किये जाते हैं। चित्र भी, कई तरह के मानक में रखे जाते हैं जिसमें एक मानक gif है। यह मानक पेटेंट की तरह सुरक्षित हुआ करता था। यही कारण है कि यह मानक बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका।
मुक्त मानक, मालिकाना मानक के विपरीत होते हैं। किसी मानक को मुक्त होने के लिए कम से कम निम्न शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए। मुक्त मानक को,
- पूरी तरह से लिखा और प्रकाशित होना चाहिए। ताकि कोई भी व्यक्ति चाहे तो उसे अपने कम्पयूटर प्रोग्राम में लागू कर सके।
- सबको हर समय के लिए बिना किसी शर्त, रॉयल्टी या फीस के उपलब्ध होना चाहिए।
- किसी तटस्थ संस्था के द्वारा लागू किया जाना चाहिए जहाँ पर निर्णय सर्वसम्मत्ति से या बहुमत से हो। ताकि अधिक से अधिक लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
- टेक्सट फाइलों के लिए ASCII, odt मुक्त मानक है लेकिन doc मुक्त मानक नहीं हैं;
- चित्रों के लिए Jpeg 2000, png मुक्त मानक हैं लेकिन bmp नहीं है;
- आडियो और विडियो फाइलों के लिए ogg, theora मुक्त मानक हैं लेकिन mp3 नहीं है;
- प्रस्तुतिकरण के लिए odp मुक्त मानक है लेकिन ppt नहीं है;
- वेब पेज लिखने के लिए html/xhtml, यूनिकोड (Unicode), लेटेक्स (Latex) मुक्त मानक हैं।
मुक्त मानक क्यों उचित साधन हैं
मुक्त मानक महत्वपूर्ण हैं। मैं इस बात को, इसी चिट्ठे में, इसी श्रंखला की चिट्ठी ‘मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं?‘ में लिख चुका हुं। इसे मैं ई-पाती श्रंखला की चिट्ठी ‘पापा, क्या आप उलझन में हैं‘ पर भी प्रकाशित कर चुका हूं। इन दोनो चिट्टियों का पॉडकास्ट आप मेरी बकबक पर यहां और यहां सुन सकते हैं। ‘पापा, क्या आप उलझन में हैं’ चिट्ठी का पॉडकास्ट आप मेरी बकबक के अतिरिक्त पॉडभारती के ८वें अंक में भी सुन सकते हैं।
मैंने इसी विषय पर एक और चिट्ठी अपने छुटपुट चिट्ठे की चिट्ठी ‘मुक्त मानक का प्रयोग करना क्यों बेहतर है‘? चिट्ठी पर किया है। यह चिट्ठियां न केवल मुक्त मानक के महत्व पर इसके फायदे को भी बताती हैं।
मुक्त मानक का प्रयोग करना हमेशा फायदेमन्द ही होता है; इसमें कोई नुकसान नहीं है – यही कारण है कि ये उचित साधन हैं।
मुक्त मानक न केवल एकाधिकार समाप्त करते हैं पर एक स्वस्थ प्रतिद्वन्तता प्रेरित करते हैं। सूचना प्रधोगिकी में सबसे ज्यादा उन्नति मुक्त मानक के द्वारा है चाहे वह अंतरजाल हो, या वेब सूचना स्थानान्तरित करने का तरीका। यह सब मुक्त मानक पर आधारित हैं न की किसी मालिकाना मानक पर। इसके कम से कम निम्न फायदें हैं:
- इनका प्रयोग करने से किसी भी प्रकार का लाइसेंस अथवा पेटेंट का भय नहीं होता हैं।
- सारे मुक्त मानक के लिए कोई न कोई ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं। जिसका प्रयोग मुफ्त में, बिना कॉपीराइट उल्लघंन के किया जा सकता है।
- मुक्त मानक में रखी गई फाइलें कभी भी खो नहीं सकती हैं। वह हमेशा लोगों के लिए उपलब्ध रहेगी।
- मुक्त मानक किसी भी सॉफ्टवेयर में लागू किया जा सकता है। इस कारण भी व्यक्ति अपनी सूचना या फाइलों का वास्तव में स्वामी रहता है।
यही कारण है कि वे एक उचित साधन हैं।
जयंत विष्णु नार्लीकर की विज्ञान कहानी – वामन की वापसी
पंचतत्र की एक कहानी कछुआ और खरगोश के बीच हुई रेस के बारे में है। आधुनिक युग में, इस कहानी में कुछ जोड़ा गया है। मैंने इस कुछ दिन उन्मुक्त चिट्ठे पर यहां लिखा था। इसके द्वारा मैंने ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर के महत्व को बताने का प्रयत्न किया था। लेकिन मुक्त मानक का महत्व बताने के लिए मैं एक दूसरी कहानी ‘वामन की वापसी’ (The Return of Vaman) के बारे में चर्चा करना चाहूंगा।
‘वामन की वापसी’ कहानी प्रसिद्व खगोलशास्त्री जयंत विष्णु नार्लीकर (Jayant Vishnu Narlikar) के द्वारा लिखी एक विज्ञान कहानी है। यह कहानी तीन व्यक्तियों के इर्द-गिर्द घूमती है।
- भौतिक शास्त्री,
- कम्यूटर वैज्ञानिक, और
- पुरातत्ववेता
भौतिक शास्त्री, गुरूत्वाकर्षण के बारे में प्रयोग करना चाहता था इसके लिए उसे गहरा गड़ढा खोदना था। यह गड्ढा खोदते समय उन्हें एक प्लेट मिलती है जिसमें कुछ लिखा हुआ है पर वे समझ नहीं पाते हैं कि उसमें क्या लिखा है क्योंकि लोग उसकी लिपि पढ़ने में असमर्थ हैं।
नीचे और खोदने पर एक घन मिलता है। घन पर तरह-तरह के चित्र बने हुए हैं। ये चित्र कुछ अजीब से हैं। प्लेट और घन दोनों एक अनजाने पदार्थ के द्वारा बने हुए हैं। जिससे उन्हें यह लगता है कि वास्तव में यह किसी उन्नत सभ्यता के द्वारा वहाँ रखे गये हैं।
लोगों के समझ में नहीं आता है कि घन को कैसे खोला जाए। लेकिन घन पर बने चित्रों में एक चित्र में दो हाथी घन को विपरीत दिशा से खींच रहे होते हैं पर उसके बाद भी वे हाथी उसे खोलने में असमर्थ दिखते हैं। यह चित्र देखकर उन्हें १७वीं शताब्दी के जर्मन वैज्ञानिक आटो वान ग्यूरिक (Otto von Guericke) के द्वारा किये गये एक प्रयोग का ख्याल आता है।
मेग्डेबुर्ग अर्धगोले
ग्यूरिक ने दो ताँबें के ५१ सेमी. व्यास के अर्द्व गोलों, को आपस में जोड़कर उसके अंदर की हवा को बाहर निकाल दी थी। इसके बाद दोनो तरफ आठ-आठ घोड़ों के खींचने पर भी वे अलग नहीं हुए थे। ग्यूरिक, इससे हवा के दबाव का महत्व बताना चाहते थे। इस प्रयोग की याद आते ही उन्हें लगा कि शायद इस घन के अंदर से भी हवा निकाल दी गई हो। वे घन पर एक पतला से छेद करते हैं जिससे हवा अंदर चली जाती है और वह घन तुरन्त खुल जाता है।
यह घन एक तरह का टाइम कैपसूल है जिसमें उस उन्नत सभ्यता के बारे में बातें थी। इस सभ्यता के लोग, कोई बीस हजार वर्ष पूर्व पृथ्वी पर रहते थे। कैपसूल के अन्दर यह बताया गया था कि किस तरह से एक खास तरह का आधुनिक कम्पयूटर बनाया जा सकता है। वे उस कम्पयूटर को बनाते हैं और उसका नाम गुरू रखते हैं। यह कम्पयूटर उन्हें एक मीटर ऊचां रोबोट बनाने का तरीका बताता है। यह रोबोट बौना है। इसलिए इसका नाम वामन रखा जाता है।
वामन कोई साधारण रोबोट नही हैं वह एक अत्यंत आधुनिक किस्म का रोबोट है। इस तरह के रोबोट की कल्पना आइज़ेक एसीमोव (Isaac Asimov) ने बाईसेन्टीनियल मैन (The Bicentennial man) नामक विज्ञान कहानी में की थी। इस कहानी में, उस रोबोट का नाम एंड्रयूज़ था। एसीमोव ने, बाद में इस कहानी को पॉस्ट्रॉनिक मैन (Positronic Man) नामक उपन्यास में बदल दिया। इसी के आधार पर बाईसेन्टीनियल मैन (Bicentennial Man) नामक फिल्म भी बनी है।
वामन बुद्विमान रोबोट है और उसमें स्वतन्त्र निर्णय लेने की क्षमता है। वह मुश्किलों को समझता है और उसका ठीक निर्णय भी लेता है।
वामन अपने बनाने वालों से इस बात की प्रार्थना करता है कि उसे बताया जाए कि वह कैसे अपनी तरह के और रोबोट बना सकता है ताकि मानव जाति की सेवा की जा सके। भौतिक शास्त्री और कम्पयूटर वैज्ञानिक उसे यह विधि नहीं सिखाते हैं चूंकि यह पता नही चलता था कि उस उन्नत सभ्यता का क्या हुआ।
वामन अपने आप को दूसरों से चोरी करवा देता है। लेकिन चोरी करने वालों से वायदा ले लेता है कि वे लोग उसे और वामन बनाने का तरीका सिखा देगें।
आधुनिक सभ्यता के समाप्त होने का कारण प्लेट पर लिखा था पर चूंकि कोई उसकी लिपि नही पढ़ पा रहा था इसलिए यह पता नही चल पा रहा था। अंत में पुरातत्ववेत्ता लिपि को पढ़ने में सफल हो जाता है जिससे पता चलता है कि जब वामन को अपने जैसा वामन बनाने की विधि मालूम होती है और बहुत से वामन बन जाते हैं तो वे मानव जाति का सारा काम अपने हाथ में लेते हैं। एक दिन वे काम करना बंद कर देते है। तब तक वह उन्नत सभ्यता इतनी अभ्यस्त हो चुकी थी कि वह स्वयं कोई काम नहीं कर पाती और उनका अन्त हो जाता है। लेकिन वे सारे बिजलीघर बन्द देते हैं जिससे वामनो को ऊर्जा मिलनी बन्द हो जाती है और वे भी समाप्त हो जाते हैं।
सच है,
‘Utopia, if there is one, is end of life.’
एक ऎसी जगह जहाँ काम न करना पड़े, आराम ही आराम हो , स्वर्ग हो—जीवन का अंत है।
सभ्यता का अंत पता चलने के बाद, यह बहुत जरूरी हो गया कि वामन को समाप्त किया जाए ताकि वह दूसरे वामन न बना सके। क्या यह हो पाया, यह तो आप कहानी पढ़कर जान सकेंगे।
‘वामन की वापसी’ कहानी का मुक्त मानक से सम्बंध
भौतिक जीवन में सूचना लिपि में रहती है यदि लिपि पढ़ी जा सकती है तब सूचना भी समझी जा सकती है, यदि आप लिपि नहीं पढ़ सकते तब वह सूचना हमेशा के लिए खो जायेगी। जैसा कि खगोलशास्त्री जयंत विष्णु नार्लीकर (Jayant Vishnu Narlikar) के द्वारा लिखी विज्ञान कहानी ‘वामन की वापसी‘ में प्लेट पर लिखी सूचना के साथ हो रहा था। जब तक वह पढ़ी नहीं गयी, तब तक लोगों के समझ में नहीं आया कि,
- क्यों वह सभ्यता क्यों नष्ट हो गयी? और
- किस लिये वामन, लोगों को उसे अपने तरह के रोबॉट बनाने की विधि सिखाने की बात कह रहा था?
कंयूटर संसार में, सूचना की चाभी मानक में है। यदि मानक मालिकाना है तो यह हो सकता है कि उसके बनाने वाले उसे बनाना छोड़ दें और उसे बनाने का तरीका किसी और को न मालूम हो। इस दशा में वह सूचना हमेशा के लिए हाथ से निकल जायेगी।
यही कारण है कि सूचना को मुक्त मानक पर रखना ही बहुत अच्छा है। यदि हम सूचना को मुक्त मानक पर रखते हैं तब सूचना कभी भी समाप्त नही हो सकती। क्योंकि, सबको मालूम है कि मुक्त मानक को किस प्रकार से कंम्पयूटर प्रोग्राम में पढ़ा जाये। इसीलिए आडियो फाइलों को mp3 मानक जो कि मालिकाना मानक है में रखना ठीक नहीं। इसके लिए ogg मानक कहीं बेहतर है। क्योंकि यह मुक्त मानक है। यही आने वाले कल का रास्ता है।
महात्मा गाँधी ने एक बार कहा था,
‘You must be change that you want to see in the world.’
मैं चाहता हूं कि दुनिया वाले मुक्त मानक का प्रयोग करें इसीलिए मै स्वयं पहले इनका प्रयोग करता हूं। मैं अपनी आडियो फाइलें ogg, टेक्सट फाइलें doc की जगह odt, प्रस्तुतिकरण ppt की जगह odp मानक में रखता हूं क्योंकि यह मुक्त मानक हैं। यह आपको तय करना है कि आप अपनी फाइलें किस मानक में रखें।
यह लेख मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। इसकी अलग अलग कड़ियों को आप नीचे दिये गये लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।
इसकी अधिकतर कड़ियों को, आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये नीचे लिंक के बगल में ब्रैकेट ( ) के अन्दर लिखे लिंक पर चटका लगायें।
अधिकतर ऑडियो फाइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप निम्न प्रोग्रामों में सुन सकते हैं -
- Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
- Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सांकेतिक शब्द
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