बातों का है यह मायाजाल,
बातों का है यह संसार।
उन्मुक्त पर है मेरी छुटपुट बातें,
छुटपुट पर हैं औरों कि मुक्त बातें,
और यहां है मेरी पूरी बातें।
जी हां, मै उन्मुक्त ही हूं। भारत के एक कस्बे से, एक आम भारतीय।
मेरी पत्नी शुभा अध्यापिका है। वह भी एक चिट्ठा ‘ मुन्ने के बापू‘ के नाम से ब्लॉगर पर लिखती है।
मैं पहले से ही दो और चिट्ठे, ब्लौगर पर उन्मुक्त नाम से और वर्ड-प्रेस पर छुटपुट नाम से लिखता हूं। आप सोच रहे होंगे कि फिर यह तीसरा चिट्ठा क्यों शुरू किया?
छुटपुट में इस दुनिया मे और लोग क्या कह रहें हैं मेरी टिप्पणी के साथ रहता है। उन्मुक्त मे मेरे विचार रहते हैं पर यह अक्सर कड़ियों में होते हैं। किसी भी विचार पर लिखने के पहले, उसकी रूप रेखा बना लेता हूं पर बड़े विषय को कड़ियों में ही लिखता हूं – एक साथ बड़े विषय पर लिखना मुश्किल रहता है।
बड़े विषय पर कड़ियों मे लिखने मे आसानी होती है पर पढ़ने मे पूरा विषय एक जगह ही अच्छा लगता है – कारण,
- दो कड़ियों के बीच अक्सर कुछ और चिठ्ठियां भी आ जातीं है जिससे निरंतरता भंग होती है;
- कड़ियों मे लिखने से तारत्म्यता भी गड़बड़ होती है।
इससे लगा कि बाद मे सारी कड़ियों को जोड़ कर पूरे विषय को एक जगह कर दिया जाय और यदि उस विषय पर कुछ नया आये तो कड़ियों पर जोड़ने की जगह उसे यहीं पर जोड़ा जाय ताकि उस विषय पर एक जगह पूरी जानकारी भी रहेगी। पूरे विषय को एक साथ पढ़ने का आनंद ही अलग है।
ब्लौगर के अपने फायदे हैं तो वर्ड-प्रेस के अपने। बस इसी उधेड़-बुन मे यह नया चिठ्ठा शुरू कर दिया। जो विषय पहले कड़ियों मे उन्मुक्त मे प्रकाशित हो चुके हैं उसमें से कुछ की कड़ियों को एक चिट्ठी में परिवर्तित करके यहां प्रकाशित किया जा रहा है। इनमें कुछ संशोधन तारत्म्यता के लिये या फिर कुछ नया आ गया हो तो उसे जोड़ने के लिये किया गया है। यदि इस विषय पर कुछ नया आता है तो उन्मुक्त के चिठ्ठे पर लिख कर इसमे उसी लेख पर जोड़ दूंगा ताकि एक जगह सारी सूचना मिल जाये। यहां इन लेखों की पीडीएफ फाईल भी है उसे आप चाहें तो डाउनलोड करके कंप्यूटर मे या मुद्रित करके पढ़ सकते हैं।
मेरे एक मित्र के पुत्र की आखें कमजोर हैं वह अक्सर ऐसे प्रोग्राम के बारे में पूछता रहता है जिसमें पढ़ना न पड़े और वह सुन सके। इसलिये एक पॉडकास्ट ‘बकबक‘ नाम से शुरू की। पॉडकास्ट की अधिकतर फाईलें ogg, ओपेन सोर्स फॉरमैट, मे हैं। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
- Windows पर कम से कम Audacity, Mplayer, VLC Media Player एवं Winamp में;
- Linux पर लगभग सभी प्रोग्रामो में; और
- Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer, और VLC Media Player में,
सुन सकते हैं। हांलाकि अब इसे ‘Bakbak‘ (बकबक) पर स्थानान्तरित कर दिया है,
यह ogg फॉरमैट में क्यों है इसके बारे में आप मेरी चिट्ठी ‘पापा, क्या आप इलझन में हैं‘ पर पढ़ सकते हैं। इसे 0gg मानक में यहां चटका लगा कर सुन सकते हैं। यदि इसे एमपी-३ मानक में सुनना चाहें तो ► चिन्ह पर चटका लगा कर सुन सकते हैं।
कुछ समय पहले, १९ नवम्बर २००६ में, ‘द टेलीग्राफ’ समाचारपत्र में ‘Hitchhiking through a non-English language blog galaxy‘ नाम से लेख छपा था। इसमें भारतीय भाषा के चिट्ठों का इतिहास, इसकी विविधता, और परिपक्वत्ता की चर्चा थी। इसमें कुछ सूचना हमारे में बारे में भी है, जिसमें कुछ त्रुटियां हैं। इसको ठीक करते हुऐ मेरी पत्नी शुभा ने एक चिट्ठी ‘भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर‘ नाम से प्रकाशित की है। इस चिट्ठी हमारे बारे में सारी सूचना है। इसमें यह भी स्पष्ट है कि हम क्यों अज्ञात रूप में चिट्टाकारी करते हैं और इन चिट्ठों का क्या उदेश्य है। 
मेरा बेटा मुन्ना वा उसकी पत्नी परी, विदेश में विज्ञान पर शोद्ध करते हैं।
मेरे तीनों चिट्ठों एवं पॉडकास्ट की सामग्री तथा मेरे द्वारा खींचे गये चित्र (दूसरी जगह से लिये गये चित्रों में लिंक दी है) क्रिएटिव कॉमनस् शून्य (Creative Commons-0 1.0) लाईसेन्स के अन्तर्गत है। यह क्रिएटिव कॉमनस् के द्वारा निकाला गया नया लाइसेन्स है। इसमें लेखक कोई भी अधिकार अपने पास नहीं रखता है। इसकी शर्तें नायाब हैं इनको यहां देखें।
अथार्त, मेरे तीनो चिट्ठों, पॉडकास्ट फीड एग्रेगेटर की सारी चिट्ठियां, कौपी-लेफ्टेड हैं या इसे कहने का बेहतर तरीका होगा कि वे कॉपीराइट के झंझट मुक्त हैं। आपको इनका किसी प्रकार से प्रयोग वा संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को), या फिर मेरी उस चिट्ठी/ पॉडकास्ट से लिंक दे दें।
शायद इसी लिये, मेरे किसी अज्ञात मित्र ने, मेरे तीनो चिट्ठों को मिला कर ‘उन्मुक्त – Unmukt: हिन्दी चिट्ठाकार उन्मुक्त की चिट्ठियाँ‘ नामक वेबसाइट शुरू की है। मैं नहीं जानता कि यह कौन व्यक्ति है, वह ऐसा क्यों करता है लेकिन जानना चाहूंगा।
मेरे परिवार के दो अन्य सदस्य थे: टॉमी जो कि गोल्डन रिट्रीवर था लेकिन अब नहीं रहा और एक बॉक्सर जो अभी भी हमारे परिवार का हिस्सा है।
हमें प्रसन्नता होगी यदि कोई मेरी या मेरी पत्नी की चिट्ठियों में से, काम की कड़ियां, हिन्दी विकिपीडिया में डाल दे।
मुझे आप से ईमेल पर बात कर प्रसन्नता होगी। मेरा ई-मेल का पता यह है।

