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	<title>लेख &#187; गणित/ पहेली</title>
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	<description>उन्मुक्त पर हैं मेरी छुटपुट बातें, छुटपुट पर हैं औरों कि मुक्त बातें - यहां है मेरी पूरी बातें।</description>
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		<title>लेख &#187; गणित/ पहेली</title>
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		<title>२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान</title>
		<link>http://unmukth.wordpress.com/2006/08/15/binary-puzzle/</link>
		<comments>http://unmukth.wordpress.com/2006/08/15/binary-puzzle/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 15 Aug 2006 07:53:13 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[गणित/ पहेली]]></category>
		<category><![CDATA[विज्ञान]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी]]></category>

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		<description><![CDATA[भूमिका

कुछ दिन पहले, पहेली  चिठ्ठे पर नारद जी की छड़ी नाम की यह पहेली बूझी गयी।
&#8216;तो हुआ ऐसा कि नारद जी एक बार अपनी ७ इन्च लम्बी सोने की छड़ी लेकर धरती पर भ्रमण को आए। अब उन्हें सारे चिट्ठों की जानकारी वाले सजाल बनाने में सप्ताह भर का समय लगना था। तो वे [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&blog=230997&post=48&subd=unmukth&ref=&feed=1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div class='snap_preview'><br /><p align="center">भूमिका
</p>
<p align="left">कुछ दिन पहले, <a href="http://pahelee.wordpress.com/">पहेली</a>  चिठ्ठे पर नारद जी की छड़ी नाम की यह पहेली बूझी गयी।</p>
<blockquote><p>&#8216;तो हुआ ऐसा कि नारद जी एक बार अपनी ७ इन्च लम्बी सोने की छड़ी लेकर धरती पर भ्रमण को आए। अब उन्हें सारे चिट्ठों की जानकारी वाले सजाल बनाने में सप्ताह भर का समय लगना था। तो वे एक होटल में एक कक्ष लेने का विचार बना कर वहाँ पहुँच गए। अब इनके पास कोई धनराशि तो थी नहीं , पर सात दिन के किराए के रूप में होटल के मैनेजर ने नारद जी से ७ (सात) इन्च लम्बी सोने की छड़ी लेना स्वीकार कर लिया। पर मैनेजर ने हर रोज का किराया उसी दिन लेना चाहा। तो इस बार की पहेली यह है कि नारद जी को कम से कम छड़ी के कितने टुकड़े करने होंगे, ताकि वो,<br />
होटल का किराया चुका सकें? और<br />
उन टुकड़ों की लम्बाई क्या होगी?&#8217;</p>
</blockquote>
<p>श्री र.च. मिश्र ने इसका  सही जवाब दिया और वह है, १, २ और ४ इन्च के टुकड़े करने होंगे।</p>
<p>इस पहेली के कई रूप हैं और यह रूप इसका सबसे आसान रूप है। इसके कठिन रूप का जवाब इतनी आसानी से नहीं दिया जा सकता है। यह जवाब २ की पॉवर के अंक (१, २, ४, ८, १६, &#8230;.) की एक सिरीस है; अंकों की यह सिरीस मूलभूत है। इसका सम्बन्ध बहुत चीजों से है,</p>
<ul>
<li>शतरंज के जादू;</li>
<li>सृष्टि के अन्त; और</li>
<li>उससे भी, जिससे हम सब जुड़े हैं यानि कि कमप्यूटर विज्ञान से।</li>
</ul>
<p>शतरंज का जादू , सृष्टि का अन्त? यह क्या बला है? चलिये एक क्रम से चर्चा करते हैं ताकि हम कहीं चक्कर न खा जायें। चर्चा का क्रम यह रहेगा:</p>
<ul>
<li>शतरंज का जादू क्या है;</li>
<li>सृष्टि का अन्त;</li>
<li>नारद जी की छड़ी वाली पहेली के अन्य रूप;</li>
<li>इस पहेली के हल का शतरंज के जादू एवं सृष्टि का अन्त से रिश्ता;</li>
<li>इस पहेली के हल का कमप्यूटर विज्ञान से सम्बन्धों का जिक्र।</li>
</ul>
<p>पहेलियों की कई अच्छी पुस्तके हैं जिनका जिक्र मैने <a href="http://unmukth.wordpress.com/2006/07/11/puzzles-martin-gardner/">पहेलियां और मर्टिन गर्डनर</a> नाम के लेख पर किया है। इसमे हिन्दी की एक अच्छी पुस्तक &#8216;गणित की पहेलियां&#8217; है। इसके लेखक गुणाकर मुले हैं। इसे १९६१ मे राजकमल प्रकाशन ने छापा था और लगभग इसी समय मेरे बाबा ने यह पुस्तक मुझे भेंट की थी। गुणाकर मुले मेरे बचपन मे अकसर इस तरह के लेख लिखते थे। मालुम नहीं आप में से कितनो को इनकी याद है या उस समय के हैं। यह पहेलियों की मेरी पहली पुस्तक थी।</p>
<p align="center">शतरंज का जादू<br />
गुणाकर मुले की किताब &#8216;गणित की पहेलियां&#8217; मे एक अध्याय &#8216;अंकगणित की पहेलियों&#8217; पर है इसी मे वह &#8216;शतरंज के जादू&#8217; के बारे मे बताते हैं। इसका बयान करने से पहले मैं आपको एक सांकेतिक चिन्ह के बारे मे बता दूं क्योंकि इसका प्रयोग मै करूंगा।<br />
१=२/२=२^०<br />
२=२=२^१<br />
४=२x२=२^२<br />
८=२x२x२=२^३<br />
१६= २x२x२x२=२^४</p>
<p>यह सब नम्बर दो को दो से एक बार या दो से कई बार गुणा करके मिले हैं या यह कह लीजये कि ये दो की पावर (power) हैं। इन्टरनेट पर पावर को लिखने के लिये ^ चिन्ह का प्रयोग किया जाता है और मै भी इस चिठ्ठे पर इसी प्रकार से लिखूंगा। अब देखते हैं कि गुणाकर मुले किस तरह से शतरंज के जादू के बारे मे ब्यान करते हैं। यह उन्ही के शब्दों मे,</p>
<blockquote><p>&#8216;शतरंज के खेल के नियमों को आप न भी जानते हों तो कम से कम इतना तो सभी जानते हैं कि शतरंज चौरस पटल पर खेला जाता है । इस पटल पर ६४ छोटे-छोटे चौकोण होते हैं।</p>
<p>प्राचीन काल में पर्सिया में शिर्म नाम का एक बादशाह था। शतरंज की अनेकानेक चालों को देखकर यह खेल उसे बेहद पसंद आया। शतरंज के खेल का आविष्कर्ता उसी के राज्य का एक वृद्ध फकीर है, यह जानकर बादशाह को खुशी हुई। उस फकीर को इनाम देने के लिये दरबार में बुलाया गया: &#8220;तुम्हारी इस अदभुत खोज के लिये मैं तुम्हें इनाम देना चाहता हूं । मांगो, जो चाहे मांगो,&#8221; बादशाह ने कहा।</p>
<p>फकीर &#8211; उसका नाम सेसा था &#8211; चतुर था। उसने बादशाह से अपना इनाम मांगा &#8211; &#8220;हुजूर, इस पटल में ६४ घर हैं। पहले घर के लिये आप मुझे गेहूं का केवल एक दाना दें, दूसरे घर के लिये दो दाने, तीसरे घर के लिये ४ दाने, चौथे घर के लिये ८ दाने और &#8230;. इस प्रकार ६४ घरों के साथ मेरा इनाम पूरा हो जाएगा।&#8221;</p>
<p>&#8220;बस इतना  ही ?&#8221; बादशाह कुछ चिढ गया,&#8221; खैर, कल सुबह तक तुम्‍हें तुम्‍हारा इनाम मिल जाएगा।  &#8220;</p>
<p>सेसा मुस्कराता हुआ दरबार से लौट आया और अपने इनाम की प्रतीक्षा करने लगा।</p>
<p>बादशाह ने अपने दरबार के एक पंडित को हिसाब करके गणना करने का हुक्म दिया। पंडित ने हिसाब लगाया &#8230; १+ २+ ४+ ८+ १६+ ३२+ ६४+ १२८&#8230; (६४ घरों तक ) अर्थात १+ २^२ + २^३ + २^४&#8230; = (२^६४)-१ अर्थात १८,४४६,७४४,०७३,७०९,५५१,६१५ गेहूं के दाने। गेहूं के इतने दाने बादशाह के राज्य में तो क्या संपूर्ण पृथ्वी पर भी नहीं थे। बादशाह को अपनी हार स्वीकार कर लेनी पड़ी।&#8217;</p>
</blockquote>
<p>राजा तो समझ रहा था कि फकीर ने बहुत छोटा इनाम मांगा है उसकी समझ मे  नहीं आया कि उसे कितना गेहूं देना था &#8211; यही है शतरंज का जादू।</p>
<p>गौर फरमाइयेगा कि हर खाने मे कितने गेहूं के दाने रखे जा रहे हैं क्योंकि यही हमारे इस विषय के लिये महत्वपूर्ण है।</p>
<p align="center">सृष्टि का अन्त<br />
गुणाकर मुले अपनी किताब मे सृष्टि का अन्त की कथा का वर्णन कुछ इस तरह से करते हैं। यह उन्ही के शब्दों मे,</p>
<blockquote><p>&#8216;कथा बहुत प्राचीन है। उस समय काशी में एक विशाल मन्दिर था। कहा जाता है कि ब्रम्हा ने जब इस संसार की रचना की, उसने इस मंदिर में हीरे की बनी हुई तीन छड़ें रखी और फिर इनमें से एक में छेद वाली सोने की ६४ तश्तरियां रखीं सबसे बडी नीचे और सबसे बडी उपर। फिर ब्रम्हा ने वहां पर एक पुजारी को नियुक्त किया। उसका काम था कि वह एक छड की तश्तरियां दूसरी छड़ में बदलता जाए। इस काम के लिए वह तीसरी छड़ का सहारा ले सकता था। परन्तु एक नियम का पालन जरूरी था। पुजारी एक समय केवल एक ही तश्तरी उठा सकता था और छोटी तश्तरी के उपर बडी तश्तरी वह रख नहीं सकता था। इस विधि से जब सभी ६४ तश्तरियां एक छड से दूसरी छड़ में पहुंच जाएंगी, सृष्टि का अन्त हो जाएगा।</p>
<p>आप कहेंगे, &#8220;तब तो कथा की सृष्टि का अन्त हो जाना चाहिए था। ६४ तश्तरियों को एक छड़ से दूसरी छड़ में स्थानान्तरित करने में समय ही कितना लगता है।&#8221;</p>
<p>नहीं, यह &#8216;ब्रम्ह-कार्य&#8217; इतनी शीघ्र समाप्त नहीं हो सकता। मान लीजिए कि एक तश्तरी के बदलने में एक सेकेंड का समय लगता है। इसके माने यह हुआ कि एक घंटे में आप ३६०० तश्तरियां बदल लेंगे। इसी प्रकार एक दिन में आप लगभग १००,००० तश्तरियों और १० दिन में लगभग १,०००,००० तश्तरियां बदल लेंगे।</p>
<p>आप कहेंगे, &#8220;इतने परिवर्तनो में तो ६४ तश्तरियां निश्चित रूप से एक छड़ से दूसरी छड़ में पहुंच जाएगीं।&#8221; लेकिन आपका अनुमान गलत है । उपरोक्त &#8216;ब्रम्ह-नियम&#8217; के अनुसार ६४ तश्‍तरियों को बदलने में पुजारी महाशय को कम से कम ५००,०००,०००,००० वर्ष लगेंगे ।</p>
<p>इस बात पर शायद यकायक आप विश्वास न करें । परन्तु गणित के हिसाब से कुल परिवर्तनों की संख्या होती है, (२^६४)-१ अर्थात १८,४४६,७४४,०७३,७०९,५५१,६१५&#8217;</p>
</blockquote>
<p>आपने गौर किया कि यह वही नम्बर है जितने गेहूं के दाने राजा को देने थे। इसका हल भी गुणाकर मुले की किताब मे इस प्रकार है,</p>
<blockquote><p>&#8216;उपरोक्त गणना को एक संवाद द्वारा स्पष्ट कर देना उचित होगा । अपने बचपन की एक घटना मुझे याद आती है। एक दिन मेरे बडे भाई साहब ने सिक्कों का एक खेल समझाया। उन्होंने मेज पर तीन प्लेटें रखीं और इनमें से एक में 5 अलग अलग सिक्के रखें, क्रमश: एक के उपर एक &#8211; रूपया, अठन्नी, चवन्नी, एकन्नी और एक पैसा। इन पांचों सिक्‍कों को, इसी क्रम में, दूसरी प्लेट में रखना था। परन्तु तीन नियमों का पालन जरूरी था,</p>
<p>(१) एक समय  में  केवल एक  ही  सिक्का उठाया जा  सकता  था।<br />
(२) छोटे  सिक्के पर बडे  सिक्के को रखने की मनाही  थी।<br />
(३) इस परिवर्तन &#8211; क्रिया में तीसरी प्लेट का उपयोग किया जा सकता था। परन्तु अन्त में सभी सिक्के दूसरी प्लेट में पहुंच जाने चाहिए थे, और वह भी अपने आरंभिक क्रम में ( रूपया, अठन्नी, चवन्नी, एकन्नी और पैसा) &#8211; एक के उपर दूसरा।<br />
&#8220;नियम तुम्हें समझ में आ गए ‍ होंगे, अब अपना काम शुरू  करो ! &#8221;  भैया ने मुझसे कहा।<br />
मैंने पैसा उठाया और तीसरी तश्तरी में रखा। फिर इकन्नी उठाकर दूसरी तश्तरी में रखी। फिर चवन्नी उठाई, परन्तु इसे कहां रखूं? (सिक्‍कों के आकार पर विचार न करें, इनके मूल्यों के अनुसार ही इन्‍हें हम छोटा-बडा मानेंगे)। यह तो दोनों से बड़ी है।<br />
भाई साहब  ने मदद की,&#8221; पैसे को इकन्नी पर रखो। तब तुम्हें तीसरी तश्तरी खाली मिलेगी।&#8221;<br />
मैंने वैसा ही किया । परन्तु इससे मेरी कठिनाइयों का अन्त नहीं हुआ। अब अठन्‍नी कहां रखूं? थोडा सोचने पर रास्ता निकल आया। पैसे को मैंने दूसरी तश्तरी से पहली तश्तरी में रख दिया और इकन्नी को तीसरी तश्तरी में चवन्नी के उपर। फिर पहली तश्तरी का पैसा तीसरी तश्तरी में इकन्नी पर रख दिया। अब अठन्नी रखने के लिए दूसरी तश्तरी खाली थी । इसी प्रकार, कई परिवर्तनों के बाद, सभी सिक्के दूसरी तश्तरी में बदलने में मुझे सफलता मिली।<br />
भाई साहब ने प्रशंसा करते हुए पूछा, &#8220;अच्छा, अब यह  तो  बताओ कि तुमने कुल कितने परिवर्तन किये ?&#8221;<br />
&#8220;नहीं  जानता, मैंने गिनती ही नहीं  की ।&#8221; मैंने जवाब दिया।<br />
&#8220;खैर  आओं  हम  गिनती करें। मान लो कि पांच की बजाय हमारे पास केवल दो ही सिक्के हैं   इकन्नी और पैसा । तब कितने परिवर्तन होंगे ?&#8221;<br />
&#8220;तीन।&#8221;  उत्तर आसान  था।<br />
&#8220;और  यदि  तीन  सिक्के  हों  तो?&#8221;<br />
मैंने  थोडा  और  हिसाब  लगाकर  उत्तर  दिया  &#8212; &#8220;३+१+३= ७ परिवर्तन।&#8221;<br />
&#8220;और  चार  सिक्के  हों  तो?&#8221;<br />
&#8220;७+१+७= १५ परिवर्तन, मैंने  उत्साह  से कहा।<br />
&#8220;बहुत  अच्छे ! और यदि  पांच  सिक्के  हों  तो?&#8221;<br />
&#8220;१५+१+१५= ३१ परिवर्तन,&#8221;  मैंने  उत्तर दिया।<br />
&#8220;अब तुम इस समस्या को ठीक  तरह  से  समझ गए  हो। परन्तु मैं तुम्हें और  सरल  तरीका बताता हूं।&#8221;  भाई  ने  कहा।<br />
इन  संख्याओं &#8211; ३, ७, १५, ३१, &#8230;  &#8211; को   तुम  निम्न तरीके  से  रख सकते हो,<br />
३  =  (२x२) -1<br />
७  =  (२x२x२) &#8211; 1<br />
१५ = (२x२x२x२) &#8211; 1<br />
३१ = (२x२x२x२x२) &#8211; 1<br />
इस (उपरोक्त‍त) तालिका पर विचार करने से यह स्प‍ष्ट हो जाता है कि जितने सिक्के हों, उतनी बार २ को अपने आप से गुणा करके और फिर उसमें से १ को घटा देने से इच्छित परिवर्तनों की संख्या प्राप्त होती है । जैसे, यदि ५ की बजाय ६ सिक्के हों तो हमें (२x२x२x२x२x२) &#8211; १ या १२७ परिवर्तन होंगे।&#8217;</p>
</blockquote>
<p align="center">पहेली के अन्य रूप<br />
नारद जी की छड़ी पहेली के कई स्तर हैं और कई अन्य रूप। यह पहेली जिस रूप मे पूछी गयी है वह इसका सबसे आसान रूप है इस पहेली के कुछ कठिन स्तर हैं उनके बारे मे बात करने से पहले इसका एक दूसरा रूप देखें।</p>
<p>नारद जी को अपने भक्तों को लड्डू बांटने हैं नारद जी थोड़े से नये युग के हो गये हैं वे लड्डू डिब्बे मे रख कर देना चाहते हैं। समय न बर्बाद हो इसलिये पहले से पैक करके रखना है वे अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते जिसने जितने मांगे उतने दे दिये उनके पास ७ लड्डू हैं डिब्बों की कमी है इसलिये कम से कम डिब्बों का प्रयोग करना है। हर एक डिब्बे मे कितने लड्डू पैक किये जांये कि यदि उनसे कोई १ से ७ तक जितने भी लड्डू मांगे, वे दे सकें।</p>
<p>इसका जवाब है कि उन्हे ३ डिब्बे चाहिये और पहले मे १, दूसरे २, और तीसरे मे ४ लड्डू रखने होंगे।</p>
<p>चलिये अब इसके दूसरे स्तर पर चले &#8211; लड्डूवों कि संख्या बढ़ा देते हैं। मान लिया जाय कि १०२३ लड्डू हों तो हर डिब्बे मे कितने लड्डू रखे जायेंगे। इसका जवाब है १० डिब्बे और उनमे लड्डू निम्न क्रम मे रखें जायेंगे<br />
१, २, ४, ८, १६, ३२, ६४, १२८, २५६, ५१२</p>
<p>यदि १००० लड्डू होते तो पहले ९ डिब्बे मे तो उतने ही पर आखरी डिब्बे मे ५१२-२३=४८९ लड्डू रखने होंगे। यदि नारद जी के पास ५१२ से १०२३ तक लड्डू हों तो उन्हे हमेशा १० डिब्बों की जरूरत होगी। पहले ९ डिब्बों मे उतने ही जिनका योग है ५११ और दसवें मे बाकी सारे।</p>
<p>चलिये थोड़ा और ऊपर चले। यदि उनके पास अनगिनत लड्डू हों तो वह डिब्बों मे किस तरह से रखें। जवाब सरल है उनको निम्न क्रम मे रखें<br />
१, २, ४, ८, १६, ३२, ६४, १२८, २५६, ५१२, १०२४, २०४८, &#8230;..<br />
यानि कि उन्हे २ की पावर मे रखें।</p>
<p>इस पहेली का एक इससे भी कठिन स्तर है पर उसकी यहां जरूरत नहीं है इस लिये छोड़ देता हूं, वह फिर कभी।</p>
<p align="center">शतरंज के जादू और सृष्टि का अन्त का इस पहेली के हल से सम्बन्ध<br />
क्या आपने नारद जी की छड़ी की पहेली के जवाब पर गौर किया। नारद जी की छड़ जितने दिन रुकना चाहेंगे उतनी लम्बी छड़ होगी पर टुकड़े हमेशा १, २, ४, ८, १६ &#8230;.. के होंगे। यदि इसे लड्डू के रूप मे देखें तो डिब्बों मे लड्डू हमेशा १, २, ४, ८, १६, &#8230;. के नम्बर से रखने होंगे। यह सब नम्बर दो को दो से एक बार या दो से कई बार गुणा करके मिले हैं या यह कह लीजये कि ये दो की पावर (power) हैं। शतरंज के खानो मे गेहूँ के दाने और सृष्टि का अन्त मे छड़ों के बदलाव की संख्या का भी सम्बन्ध २ की पावर से है।</p>
<p>शतरंज का जादू और सृष्टि का अन्त इस पहेली के एक ही रूप हैं तथा नारद जी की छड़ी या नारद जी के लड्डू इसका दूसरा रूप हैं नारद जी की छड़ी या लड्डू &#8211; जोड़ से शुरू होकर उसके टुकड़ों तक जाती है तो शतरंज का जादू &#8211; टुकड़ों से शुरू होकर उसके जोड़ तक जाता है। यानि कि नारद जी की छड़ी कि पहेली का अन्त शतरंज के जादू की शुरुवात है और शतरंज का जादू का अन्त नारद जी की छड़ी की शुरुवात है: यह पहेलियां एक दूसरे विलोम रूप हैं।</p>
<p align="center">इस पहेली के हल का कमप्यूटर विज्ञान से सम्बन्ध<br />
अब कुछ शब्द इसके हमारे साथ के सम्बन्ध से, हालांकि इसकी वृस्तित चर्चा कभी और &#8211; शायद &#8216;गणित, चिप और कमप्यूटर विज्ञान सिरीस&#8217; मे &#8211; यहां केवल भूमिका।</p>
<p>इस विषय पर चर्चा शुरू करने से पहले मैने कहा था कि इस पहेली का सम्बन्ध उससे भी है जिससे हम सब जुड़े हैं। जी हां, इन नम्बरों का बहुत गहरा सम्बन्ध कमप्युटरों से है आप देखें तो पायेंगे कि इन नम्बरों मे दो खास बाते हैं।<br />
पहली, यह वह नम्बर हैं,</p>
<ul>
<li>जिसकी दूरी पर नारद जी की छड़ को काटने पर सबसे कम बार काटा जायेगा; या</li>
<li>यह वह नम्बर है जिसमे लड्डुवों को डिब्बों मे रखने पर सबसे कम डिब्बों की जरूरत होगी; और</li>
<li>जिनकी सहायता से हम हर दिन को अलग अलग छड़ से मिला कर निश्चित रूप से चिन्हित कर सकते हैं; या</li>
<li>जिनकी सहायता से जो भक्त जितने लड्डू चाहे उसे अलग अलग डिब्बों मे रख कर दे सकते हैं।</li>
</ul>
<p>दूसरी, यह वह नम्बर हैं,</p>
<ul>
<li>जिसकी दूरी पर नारद जी की छड़ को काटने पर सबसे कम बार काटा जायेगा; या</li>
<li>यह वह नम्बर है जिसमे लड्डुवों को डिब्बों मे रखने पर सबसे कम डिब्बों की जरूरत होगी; और</li>
<li>इनकी सहायता से हम हर दिन को अलग अलग छड़ से मिला कर निश्चित रूप से चिन्हित कर सकते हैं; या</li>
<li>जो भक्त जितने लड्डू चाहे उसे अलग अलग डिब्बों की सहायता से दे सकते हैं।</li>
</ul>
<p>कमप्यूटर विज्ञान मे दो बाते अत्यंत आवश्यक और महत्वपूर्ण हैं</p>
<ul>
<li>किसी कार्य को कितने कम से कम steps में किया जा सकता है; और</li>
<li>हम analog से digital पर कैसे पहुंचे।</li>
</ul>
<p>हम digital तभी हो सकतें है जब हम किसी भी चीज को नम्बरों के द्वारा निश्चित रूप चिन्हित कर सकें। यह यदि आप नारद जी की छड़ी के हल पर गौर करें तो उससे यह दोनो कार्य होते हैं।</p>
<p>हमारा जीवन, हमारी गणित, डेसीमल सिस्टम पर आधारित है, यानि कि १० नम्बरों से (०, १, २, ३, ४, ५, ६, ७, ८, और ९) बाकी सारे नम्बर लिखे जा सकते हैं। बाइनरी सिस्टम दो नम्बर पर आधारित होता है इसमे दो नम्बर ० और १ हैं इसी से बाकी नम्बर लिखे जाते हैं कम्प्यूटर विज्ञान बाइनरी सिस्टम पर आधारित है तथा १, २, ४, ८, १६ &#8230;. नम्बर इन दोनो सिस्टम को आपस मे जोड़ते हैं। यह नम्बर (१, २, ४, ८, १६ &#8230;.) हमारी दुनिया को डिजिटल-दुनिया से, कम्प्यूटर की दुनिया से, जोड़ते हैं।</p>
<p>विज्ञान के हर क्षेत्र के विषेशज्ञों का योगदान, कमप्यूटर विज्ञान में है पर सबसे बड़ा योगदान गणितज्ञों का है। कम्प्यूटर विज्ञान अपने पठार पर पहुंच रहा है और इसका ज्यादा विस्तार applications में हो रहा है। पर</p>
<ul>
<li>क्या कम्प्यूटर विज्ञान का विस्तार यहीं समाप्त हो जायगा और केवल applications  मे सीमित हो जायेगा? या</li>
<li>क्या इसमे कोई क्रान्ति (quantm jump) आयेगी?</li>
<li>यदि आयेगी तो किस तरफ से आने की सम्भावना सबसे अधिक है?</li>
</ul>
<p>जाहिर है कि क्रान्ति गणित की तरफ से आयेगी  और इसमे शायद गणित के निम्न दो क्षेत्र महत्वपूण भूमिका निभायें।</p>
<ul>
<li>Artificial Intelligence</li>
<li>Knot theory/ Topology</li>
</ul>
<p>इसकी चर्चा हम  फिर कभी करेंगे</p>
<p>कम्प्यूटर विज्ञान मे क्रान्ति गणित के किसी भी क्षेत्र से आये पहेलियां उसका हमेशा से उसका हिस्सा रहेंगी। इसलिये बहुत सारी कमप्यूटर फर्म नौकरी देने से पहले पहेलियों कि भी परीक्षा लेती हैं। गूगल ने तो कुछ समय पहले अमेरिका की सड़कों पर, सार्वजनिक रूप से पहेली बूझ कर, नौकरी दी। उसके बारे मे इन्टरनेट पर देख सकते हैं। इसलिये गणित और पहेलियों को नज़रअन्दाज मत कीजये, उन्हे मुन्ने और मुन्नी के साथ सुलझाते जाईये। क्या मालुम स्वयं आप या आपका मुन्ना या मुन्नी कम्प्यूटर विज्ञान मे क्रान्ति ले आये।
</p>
<p align="center"><a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2006/08/powers-of-2-puzzles-and-computer.pdf" id="p49" title="२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान">२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान</a></p>
<p align="center">यह इस  लेख की pdf फाईल है इसे आप डाउनलोड कर सकते हैं।<br />
नोट<br />
(१) यह लेख <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/">उन्मुक्त</a> चिठ्ठेपर &#8216;नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू&#8217; के नाम से कई कड़ियों मे प्रकाशित चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के बनाया गया है।<br />
(२) मेरे हर चिठ्ठे की तरह इस लेख की सारी चिठ्ठियां भी कौपी-लेफ्टेड हैं। आपको इनका प्रयोग व संशोधन करने की स्वतंत्रता है। मुझे प्रसन्नता होगी यदि आप ऐसा करते समय इसका श्रेय मुझे (यानि कि उन्मुक्त को) दें और अच्छा हो कि इस चिट्ठे की चिट्ठी से लिंक दे दें।</p>
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			<media:title type="html">उन्मुक्त</media:title>
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	</item>
		<item>
		<title>पहेलियां और मार्टिन गार्डनर</title>
		<link>http://unmukth.wordpress.com/2006/07/11/puzzles-martin-gardner/</link>
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		<pubDate>Tue, 11 Jul 2006 14:12:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>उन्मुक्त</dc:creator>
				<category><![CDATA[गणित/ पहेली]]></category>
		<category><![CDATA[पुस्तक समीक्षा]]></category>

		<guid isPermaLink="false">https://unmukth.wordpress.com/2006/07/11/puzzles-martin-gardner/</guid>
		<description><![CDATA[जिस तरह से गणित के महत्व को नकारा नहीं जा सकता, उसी तरह से पहेलियों को भी नज़र अन्दाज नहीं किया जा सकता। पहेलियां आदि काल से हमारा हिस्सा रहीं हैं और रहेंगी। वे न हमारा मनोरंजन करती हैं पर हमारे दिमाग को चुस्त एवं तरो-ताजा भी रखती हैं।
मार्टिन गार्डनर (Martin Gardner) ने अपनी एक [...]<img alt="" border="0" src="http://stats.wordpress.com/b.gif?host=unmukth.wordpress.com&blog=230997&post=44&subd=unmukth&ref=&feed=1" />]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div class='snap_preview'><br /><p>जिस तरह से गणित के महत्व को नकारा नहीं जा सकता, उसी तरह से पहेलियों को भी नज़र अन्दाज नहीं किया जा सकता। पहेलियां आदि काल से हमारा हिस्सा रहीं हैं और रहेंगी। वे न हमारा मनोरंजन करती हैं पर हमारे दिमाग को चुस्त एवं तरो-ताजा भी रखती हैं।</p>
<p>मार्टिन गार्डनर (<a href="http://en.wikipedia.org/wiki/Martin_gardner">Martin Gardner</a>) ने अपनी एक किताब की भूमिका मे पहेलियों के महत्व को इस प्रकार से समझाया है,</p>
<blockquote><p>&#8216;In one of <a class="zem_slink" title="L. Frank Baum" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/L._Frank_Baum">L. Frank Baum</a>&#8217;s funniest fantasies, &#8216;The Emerald City of Oz&#8217;, Dorothy (together with the wizard and her uncle and aunt) visit the city of Fuddlecumjig in the quadling section of Oz. Its remarkable inhabitants, the fuddles, are made of pieces of painted wood cleverly fitted together like three dimensional jigsaw puzzles. As soon as an outsider approaches they scatter in a heap of disconnected pieces on the floor so that the visitor will have the pleasure of putting them together again. As Dorothy&#8217;s party leaves the city, aunt Em remarks:<br />
“Those are certainly strange people, but I really can&#8217;t see what use they are, at all.”<br />
“Why, they amused us for several hours,” replies the wizard. “That is being of use to us, I am sure.”<br />
“I think they&#8217;re more fun than playing solitaire or mumbletypeg,” uncle Henry adds. “For my part, I&#8217;m glad we visited the fuddles.”</p></blockquote>
<p align="center"><strong>द विन्ची कोड</strong></p>
<p style="text-align:left;">इस वर्ष (२००६) की सबसे बहुचर्चित पहेली, एक ज़ज साहब के द्वारा एक फैसला देते समय पूछी गयी। यह फैसला &#8216;द विन्ची कोड&#8217; नामक पुस्तक के बौधिक सम्पदा अधिकार से सम्बन्धित मुकदमे मे दिया गया है। इस फैसले के तथ्य इस प्रकार हैं।</p>
<p>डैन ब्राउन ने &#8216;द विन्ची कोड&#8217; (da vinci code) नाम की पुस्तक लिखी है तथा इसे रैन्डम हाउस ने छापी है। यह काल्पनिक कहानी है। लेखक के शब्दों में यह <a href="http://www.danbrown.com/novels/davinci_code/plot.html">यहां</a> है।</p>
<p>इसकी कहानी कुछ इस तरह की है कि यीशू मसीह ने शादी की थी तथा उनके वंशज भी हैं यह बात वेटिकन ने छिपा कर रखी है। एक संग्रहाध्यक्ष को यह मालुम थी। उसकी हत्या हो जाती है। वह मरते समय लियोनार्दो द विन्ची के एक चित्र की आकृति बनाते हुये, फिबोनाकी सिरीस (अन्त मे नोट-१ देखें) के नम्बरो के साथ, संकेत के रूप में छोड़ जाता है। आगे क्या होता है यह जानने के लिये तो किताब पढ़नी पड़ेगी पर रैन्डम हाऊस के उपर इस किताब के पीछे एक मुकदमा दायर हो गया और हमें तो इसके फैसले से मतलब है।</p>
<p>कुछ साल एक और किताब &#8216;द होली ब्लड ऐन्ड होली ग्रेल&#8217; तीन लेखकों ने छापी थी उसमें से दो ने रैन्डम हाउस के उपर एक मुकदमा यह कहते हुऐ दायर किया कि</p>
<ul>
<li>द विन्ची कोड की पुस्तक में उनकी किताब का सार  ले लिया है;</li>
<li>इससे उनके बौधिक सम्पदा अधिकारों का हनन हुआ है।</li>
</ul>
<p>यह मुकदमा इंगलैंड मैं चला तथा न्यायमूर्ती पीटर स्मिथ ने इसे ७ अप्रैल २००६ को <a href="http://www.hmcourts-service.gov.uk/images/judgment-files/baigent_v_rhg_0406.pdf">खारिज कर दिया</a>। इस मुकदमे मे कुछ शब्दों का एक अक्षर तिरछे (italics) में टाईप है। यह कुछ अजीब बात है। फैसले मे पूरे, पूरे शब्द तो अकसर तिरछे रहते हैं पर किसी शब्द का एक अक्षर कभी तिरछा नहीं रहता। पहले तो लोगों ने यह समझा कि यह गलती है पर बाद मे यह लगा कि इसमे भी कोई रहस्य हो।</p>
<p>पहले नौ तिरछे अक्षरों को देखें तो वे smithcode हैं, या इन्हे ठीक से रखें तो यह हो जाता है smith code. जज़ साहब का नाम भी smith है। इससे लगा कि वह भी &#8216;द विन्ची कोड&#8217; की तरह रहस्यमयी बात कहना चाहते हैं। लेकिन बाद के तिरछे अक्षरों का कोई मतलब नहीं निकल रहा था। जज़ साहब ने पहले तो अपने फैसले के बारे में कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया पर बाद में ईमेल से पुष्टि की यह एक पहेली है। उन्होने किताब के उस पेज नम्बर पर इशारा किया जहां पर फिबोनाकी सिरीस का जिक्र है (अन्त मे नोट-२ देखें)। इन नम्बरों की सहायता से तिरछे अक्षरों का रहस्य खुला (अन्त मे नोट-३ देखें)। वे सौ साल पहले, नेवी के एडमिरल जैकी फिशर के बारे मे लोगों का ध्यान आर्कषित करना चाह रहे थे। शायद पहले कभी किसी जज़ ने इस तरह से अपने फैसले मे पहेली नहीं बूझी है।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>मैं और मार्टिन गार्डनर का संसार</strong></p>
<p>नवीन युग में गणित को लोकप्रिय बनाने में जितना काम मार्टिन गार्डनर ने किया शायद उतना किसी और ने नही किया। मैंने १९६० के दशक में स्नातक की कक्षा में कदम रखा। उस समय, मेरे अमेरिका में रहने वाले एक चाचा ने, मेरे लिये साईंटिफिक अमेरिकन (अन्त मे नोट-४ देखें) नाम की पत्रिका भिजवानी शुरू की। मार्टिन गार्डनर उस समय इसमें मनोरंजनात्मक गणित पर एक स्तम्भ लिखा करते थे। इस तरह, से मेरा उनसे पहली बार परिचय हुआ।<img class="alignright" title="Martin Gardner" src="http://lh4.ggpht.com/_VD9tZkRYrQ0/St5WUt9_QQI/AAAAAAAABrk/oxKIghm1S8c/Martin%20Gardner.jpg" alt="" width="226" height="166" /></p>
<p style="text-align:left;">
<p align="center">
<p style="text-align:right;"><em>मार्टिन गार्डनर का यह चित्र न्यूयॉर्क के <a href="http://www.nytimes.com/2009/10/20/science/20tier.html?_r=1&amp;emc=eta1">इस  लेख</a> से लिया गया है।</em></p>
<p align="center"><strong>मार्टिन गार्डनर की पुस्तकें </strong></p>
<p style="text-align:left;">साईंटिफिक अमेरिकन मे मार्टिन गार्डनर के लेखों मे बहुत सारे लेख पहेलियों के बारे में होते थे। यह बहुत ज्ञानवर्धक और मनोरंजक थे। मार्टिन गार्डनर के लेख मुझे तब से पसन्द हैं। मार्टिन गार्डनर ने आगे चल कर कई पुस्तकें भी लिखीं जिसमें कई पहेलियों के बारे में थीं। उनमे से मेरी मन पसन्द पुस्तकें निम्न हैं।</p>
<ul>
<li>Mathematical puzzles and diversions;</li>
<li>More mathematical puzzles and diversions;</li>
<li>Further mathematical diversions;</li>
<li>mathematical carnival;</li>
<li>Mathematics magic and mystery;</li>
<li>Entertaining mathematical rules;</li>
<li>Science fiction, puzzle tales;</li>
<li>Aha! gotcha, paradoxes to puzzle and delight.</li>
</ul>
<p>मार्टिन गार्डनर ने न केवल पहेलियों के बारे में किताबें लिखीं पर विज्ञान के कुछ पहलुवों के बारे में भी लिखा है। इनमे से कुछ किताबें अलग अलग नाम से प्रकाशित की गयीं हैं। मैं नही कह सकता कि ऐसा क्यों किया गया पर इसके कारण कुछ भ्रम अवश्य पैदा होता है। इस तरह की कुछ अच्छी पुस्तकें हैं,</p>
<ul>
<li>The Ambidextrous Universe.</li>
<li>Science: Good, Bad, and Bogus यह <a class="zem_slink" title="Fads and Fallacies in the Name of Science" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Fads_and_Fallacies_in_the_Name_of_Science">Fads and Fallacies in the Name of Science</a> नामक किताब का नया रूपान्तर है। इसमें ये ESP और UFO के अन्धविश्वास को दूर करते हैं।</li>
<li>The Relativity Explosion. यह Relativity for the Million नामक किताब का नया रूपान्तर है।</li>
</ul>
<p>मार्टिन गार्डनर की पहेलियों पर तथा विज्ञान पर लिखीं पुस्तकें बहुत आसान भाषा में, सरल तरीके से लिखी गयी हैं और पढ़ने लायक हैं। पर उनकी कुछ और किताबें जो कि दर्शन पर लिखी गयीं हैं, उनके बारे में यह नहीं कहा जा सकता है। इनमे से कुछ पुस्तकों को मैं समाप्त ही नही कर पाया, यह पुस्तकें निम्न हैं,</p>
<ul>
<li>The whys of a Philosophical Scrivener; और</li>
<li>The Night is Large.</li>
</ul>
<p>पहेलियों की अन्य पुस्तकें<br />
मार्टिन गार्डनर की पुस्तकों के अलावा पहेलियों की अन्य अच्छी पुस्तकें निम्न हैं,</p>
<ol>
<li>Vicious circle and infinity: an anthology of paradoxes by Patrick Hughes &amp; George Brecht;</li>
<li>The lady orthe tiger? and other logical puzzles by <a class="zem_slink" title="Raymond Smullyan" rel="wikipedia" href="http://en.wikipedia.org/wiki/Raymond_Smullyan">Raymond Smullyan</a>;</li>
<li>What is the name of the book? The riddle of Dracula and other logical puzzles by Raymond Smullyan;</li>
<li>The Moscow Puzzles by Boris A. Kordemsky;</li>
<li>Which way did the bicycle go? &#8230; and other intriguing mathmatical mystries by Joseph De Konhauser, Dan Velleman, Stan Wagon; और हिन्दी में</li>
<li>गणित की पहेलियां  लेखक गुणाकर मुले।</li>
</ol>
<p>यह सब बहुत अच्छी हैं। इसमे से पहली चार पेंग्विन ने तथा पांचवीं Mathematical Association of America Dolciani Mathematical Exposition no. 18 ने छापी है। इसमे से पांचवीं पुस्तक का स्तर ऊंचा है, थोड़ी गणित ज्यादा है।</p>
<p>उपर लिखी अनुमोदित पुस्तकें बहुत अच्छी हैं और मेरी मन पसन्द हैं। साईंटिफिक अमेरिकन अब भारतवर्ष में प्रकाशित होने लगी है। आप इन्हे पढ़िये। यदि आपके मुन्ने या मुन्नी ग्यारवीं कक्षा या उसके उपर पढ़ते हों तथा विज्ञान मे रुचि रखते हों, तो इसे उनके लिये मंगवाइये।</p>
<p align="center"><strong>यह पुस्तकें  कहां से खरीदें</strong></p>
<p style="text-align:left;">मैने यह पुस्तकें पिछले ४० सालों में पढ़ी हैं इस बीच इन सब के प्रकाशक बदल गये और कईयों के नाम भी। इसलिये महत्वपूण यह है कि इस समय इनका क्या नाम है तथा कौन प्रकाशक है। यह पता करने का सबसे अच्छा तरीका, www.amazon.com पर जा कर किताबों के मेनू पर इस बात का पता करना। मैने कई पुस्तकें यहां से अपने अमेरिकी दोस्तों से मंगवायी है पर यह पुस्तकें मंहगी पड़ती हैं। इसलिये पुस्तक के बारे मे पता करने का यह तरीका तो ठीक है पर खरीदने के लिये नहीं।</p>
<p>आजकल अपने देश में भी, इन्टरनेट पर बहुत सारे पुस्तकों के स्टोर खुल गये हैं। जो अच्छे हैं और भरोसे मन्द भी। मैं इनमे से <a href="http://www.firstandsecond.com/">एक  से</a> किताबें मंगवाता हूं। आप कहीं भी हों किताबें अपने देश के किसी इन्टरनेट बुक स्टोर से मंगवा सकते हैं। यहां भी आप मेनू पर ढ़ूढ़ सकते हैं।</p>
<p>पहेलियों या विज्ञान से सम्बंधित किताबें न तो हर किताबों कि दुकानो पर मिलती हैं न ही हर दुकान वालों को इन किताबों का ज्ञान होता है हांलाकि कुछ बड़ी किताबों की चेन (जैसे क्रौसर्वड, लैन्डमार्क) खुल गयी हैं, वंहा मिल जाती हैं। मैं दिल्ली-गुड़गांव, अहमदाबाद, बम्बई कि क्रौसर्वड पर तथा चेन्नाई एवं बैंगलोर की लैन्डमार्क पर गया हूं कभी मौका मिले तो जरूर जाइये, अच्छी दुकाने हैं।</p>
<p>दिल्ली में इस तरह की किताबों की सबसे अच्छी दुकान कनौट प्लेस में बुक-वर्म है। यह छोटी दुकान है पर इस तरह कि किताबों के लिये सबसे अच्छी है। इसके मालिक को जितना अच्छा ज्ञान इस तरह की किताबों के बारे में है, शायद उतना किसी और किताब के दुकान मालिक को नहीं है। कभी लखनऊ जाने का मौका मिले तो कपूरथला में पहली मंजिल पर, युनिर्वसल की दुकान पर जाना न भूलें।</p>
<p>उन्मुक्त</p>
<p align="left">नोट: १. फिबोनाकी सिरीस १ नम्बर से शुरू होती है बाद के नम्बर पिछले दो नम्बर का जोड़ होते हैं। यानि कि सिरीस में नम्बर १, (०+१) =१, (१+१)=२, (१+२)=३, (२+३)=५, (३+५)=८, इत्यादि होते हैं। इनका प्रकृति से अपना सम्बन्ध है इसके बारे मे जानने के लिये <a href="http://www.mcs.surrey.ac.uk/personal/r.knott/fibonacci/fibnat.html" target="_blank">यहां</a> देखें।</p>
<p>२. यह सब आप कुछ  विस्तारसे पढ़ना चाहें तो यह सब न्यू यौर्क टाईम्स के इस लेख में <a href="http://www.nytimes.com/2006/04/27/books/27code.html" target="_blank">यहां</a> है।</p>
<p>३. यदि आप इस पहेली का हल  कुछ विस्तारसे पढ़ना चाहें तो न्यू यौर्क टाईम्स का <a href="http://www.nytimes.com/2006/04/28/arts/28code.html">यह</a> लेख देखें। डैन टेन्च वकील हैं तथा गार्जियन नाम के अखबार के लिये लिखते हैं। उन्होने इसका हल निकाला और यदि आप उन्ही की भाषा में इसका हल पढ़ना चाहें तो वह <a href="http://books.guardian.co.uk/danbrown/story/0,,1763534,00.html" target="_blank">यहां</a> पर है।</p>
<p>४. यह लेख <a href="http://unmukt-hindi.blogspot.com/" target="_blank">उन्मुक्त</a> चिठ्ठे पर तीन प्रकाशित चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के बनाया गया है।</p>
<p align="center">इस चिट्ठी की pdf फाईल <a href="http://unmukth.files.wordpress.com/2006/07/puzzles-and-martin-gardner.pdf">puzzles-and-martin-gardner.pdf</a> है। इसे आप चाहें तो इसे डाउनलोड कर के पढ़ सकते हैं या इसका वितरण कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:center;"><strong>संबन्धित लेख</strong></p>
<ul>
<li><a href="http://www.nytimes.com/2009/10/20/science/20tier.html?_r=1&amp;emc=eta1">For Decades, Puzzling People With Mathematics</a></li>
<li><a href="http://tierneylab.blogs.nytimes.com/2009/10/19/martin-gardners-aha-moments/">Martin Gardner’s Aha! Moments</a></li>
<li style="text-align:left;"><a href="http://tierneylab.blogs.nytimes.com/2009/10/19/monday-puzzle-martin-gardners-birthday-celebration/">Monday Puzzle: Martin Gardner’s Birthday Celebration</a></li>
<li><a href="http://www.boston.com/ae/books/articles/2009/10/04/drabbles_pattern_in_the_carpet_pieces_her_life_into_history_of_jigsaw_puzzles/?rss_id=Boston+Globe+--+Book+reviews">Remembrance of puzzles past</a></li>
<li><a href="http://www.murderousmaths.co.uk/games/getofftheearth.htm">The Sam Loyd Get Off The Earth Puzzle</a></li>
<li><a href="http://www.mathpuzzle.com/loyd/">Sam Loyd&#8217;s Cyclopedia of 5000 Puzzles, Tricks, and Conundrums</a> (With Answers)</li>
</ul>
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