पेटेंट और पौधों की किस्में एवं जैविक भिन्नता

April 8, 2007

प्रकृति में पायी जाने वाली वस्तुओं के गुणों का पेटेंट नहीं कराया जा सकता है पर प्रकृति में प्राप्त वस्तुओं या इसके गुणों का प्रयोग कर यदि कोई नवीन उत्पाद बनाया जाय तो उसको पेटेंट कराया जा सकता है। एक सार्वजनिक प्रक्रिया या उत्पाद, अथवा परंपरागत जानकारी को पेटेंट नहीं किया जा सकता है क्योंकि यह नवीन आविष्कार नहीं है। इनको दोहरा कर दूसरी प्रक्रिया या प्राप्त उत्पाद को भी पेटेंट नहीं कराया जा सकता है क्योंकि यहां भी यह नवीन आविष्कार नहीं कहे जा सकते हैं।

हमारे देश में रासायनिक प्रक्रियाओं द्वारा तैयार किये गये उत्पाद या खाद्य पदार्थ, या औषधि, पर पेटेंट नहीं दिया जा सकता था। इसका अर्थ यह नहीं है कि इस तरह के उत्पाद हमारे देश में होते नहीं थे, या उनका हमारे देश में प्रयोग नहीं किया जाता था। हमारे देश में केवल इनका पेटेंट नहीं होता था हालांकि बाहर के देशों में, इस तरह की कोई भी रोक नहीं थी तथा वहां इस तरह के उत्पाद का पेटेंट होता था। ट्रिप्स के अन्दर इस तरह की कोई रोक नहीं लगायी जा सकती है इसलिये अब इस तरह के पेटेंट अपने देश में भी दिये जाने लगे हैं।

हमने जैविक भिन्नता (Biological Diversity) अधिनियम २००२ बनाया हैं इसको बनाने के निम्न कारण हैं।

  • जैविक भिन्नता का संरक्षण करना;
  • जैविक भिन्नता के संघटकों का ठीक प्रकार से प्रयोग करना; और
  • जैविक साधन की जानकारी के प्रयोग से प्राप्त होने वाले लाभ का उचित एवं न्यायपूर्ण बंटवारा होना।

बहुत सारे देशों में उन उत्पाद पर पेटेंट मिल गये है जिन पर हम पेटेंट नहीं देते थे और बहुत से पेटेंट पारम्परिक जानकारी या पूर्वकला की जानकारी न मिल पाने के कारण दिये जा चुके हैं। इस तरह के बहुत सारे पेटेंट चावल, गेहूं, नीम, हल्दी, इसपगोल, सौंफ, धनिया, जीरा, सूरजमुखी, मूंगफली, अरंडी रेड़ी, करेला, जामुन, ब्रिजल और आंवला के प्रयोग के बारे में हैं जिनकी हमें परम्परागत जानकारी थी। इसमें से कुछ तो समाप्त कर दिये गये हैं पर, अधिकतर अभी भी हैं।

बासमती चावल

राइस टेक एक अमेरिकन कम्पनी है यह कासमती और टैक्समती के नाम से चावल बेच रही थी। 1994 में राइस टेक ने 20 तरह के बासमती चावल के लिए पेटेंट प्राप्त करने के लिए यू.एस. पेटेंट एण्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन (यू.एस.पी.टी.ओ.) में एक आवेदन पत्र दाखिल किया। यू.एस.पी.टी.ओ. ने 1997 में सभी पेटेंटों को मंजूर कर दिया। हमने अप्रैल 2000 में तीन पेटेंटों की पुन: परीक्षा के लिए एक आवेदन पत्र प्रस्तुत किया । यह आवेदन पत्र उच्चतम न्यायालय के Research Foundation for Science Technology & Ecology and others Vs. Ministry of Agriculture and others (1999) 1 SCC 655 में की गयी कार्यवाही के अन्दर किये गये।

राइसटेक ने इन तीन के साथ एक और पेटेंट को वापस ले लिया। बाद में राइसटेक से 11 अन्य पेटेंटों को भी वापस लेने के लिए भी कहा गया जो कि उसने वापस ले लिया। राइसटेक को पेटेंट का नाम भी Basmati Rice lines and Grains से बदल कर Bas 867 RT 1121 and RT 117 करना पड़ा पर अन्त में राइसटेक को अगस्त 2001 में बांसमती पर पांच पेटेंट दिये गये।

बासमती चावल हिमालय की तराई में पैदा होता है। इसी तरह से इसके नाम का प्रचलन भी हुआ। बासमती चावल को, विश्व के अन्य भाग में पैदा नहीं किया जाता है। किसी अन्य स्थान पर पैदा किया गया चावल को बासमती नहीं कहा जा सकता है। बासमती एक भौगोलिक सूचक है। हमने राइसटेक को दिये जाने वाले पेटेंट पर अपनी आपत्ति, पेटेंट को न दिये जाने के कारणों के आधार पर, दिया था लेकिन बासमती का एक ‘भौगोलिक सूचक’ के रूप में दावा नहीं किया था। इस समय, राइसटेक अमेरिका में पैदा किया गये चावल को, बासमती कहते हुए बेच सकता है। यह अजीब बात है कि अमेरिका में बासमती चावल पैदा हो सकता है।

हमने भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण और संरक्षण) अधिनियम 1999 बताया है । हमें बासमती को एक भौगोलिक सूचक के रूप में दर्ज करना चाहिये फिर आगे कार्यवाही करनी चाहिये ताकि कोई भी इसके नाम का गलत लाभ न ले सके।

गेहूं

यूलिवर नाम की कम्पनी गलेटी नामक गेहूं का बीज बनाती थी। इसे मोसेन्टो ने खरीद लिया। उसके पश्चात इस पर यूरोपियन पेटेंट कार्यालय के म्यूनिख कार्यालय से इस पर २१-५-२००३ को एक पेटेंट प्राप्त किया। हमारे देश में नपहाल (Nap Hal) नाम का एक सामान्य किस्म का गेहूं होता है गलेटी में वहीं गुण हैं जो कि नपहाल में हैं इसका प्रयोग चपाती बनाने में किया जाता है। नपहाल में अन्य गेहूं की किस्मों से कम ग्लूटेन (Gluten) होता है जो इसकी Viscoelasticity को कम कर देता है। यह पकाने के दौरान कम फूलती है। यह कुरकुरे ब्रेड बनाने में प्रयोग किया जाता है। इस पेटेंट के खिलाफ कार्यवाही करने पर इसे २३-१-२००४ को रद्द कर दिया गया।

हल्दी: Turmeric

हल्दी के कई गुण हैं इसमें कई तरह की बीमारियां जैसे कि वातज रोग (Rheumatoid) और जोड़ों का दर्द (Osteoarthritis) को ठीक करने की क्षमता है। इस पर कई तरह के पेटेंट मिल चुके हैं। इस पर एक पेटेंट, मिस्सीसिप्पी विश्वविद्यालय में दो भारतीयों को, इसके घाव भरने के गुण के लिये, मार्च 1995में दिया गया। यह दिया गया। हमने पूर्व कला के आधार पर इस पेटेंट को चुनौती देते हुए यू.एस.पी.टी.ओ. के यहां एक आपत्ति दाखिल की। इस आपत्ति को स्वीकार कर लिया गया और यह पेटैंट रद्द कर दिया गया है।

नीम: Azadirachta Indica

नीम (Azadirachta Indica) सर्व रोग निर्वारणी है। बहुत सारी कम्पनियों को नीम के गुण का प्रयोग करने वाले उत्पादों पर पेटेंट दिया गया है। इनमें से कई भारतीय कम्पनियां भी हैं। इनमें से केवल एक पेटेंट को रद्द किया गया है। यह पेटेट डब्‍लू.आर. ग्रेस तथा यू.एस. कृषि विभाग को नीम तेल के जीवन (Self life) बढाने के लिए मंजूर किया गया था।

नीम के तेल की शेल्फ लाइफ (Shelf life) को बढ़ाने के लिये इसे एप्रॉटिक सालवेन्ट (aprotic solvent) में कुचला जाता है। मोटे तौर एप्रॉटिक सालवेन्ट, अपने में घुले पदार्थो के साथ हाइड्रोजन आयन (प्रोटान) का आदान-प्रदान नहीं करते हैं। वे हाइड्रोजन बौन्ड (bond) बनाने में भाग नहीं लेते हैं, उदाहरणार्थ ईथर, कीटोन्स, बेन्जीन। प्रॉटिक सालवेन्टस ( Protic Solvents) में हाइड्रोजन दूसरे परमाणु के ऋणात्मक परमाणु के साथ जुड़े होते हैं और हाईड्रोजन बौन्डिंग में भाग लेते है, उदाहरणार्थ, पानी और अल्कोहल।

पर्यावरण ग्रुप के एक संघ ने नीम की शेल्फ लाइफ बढ़ाने वाले पेटेंट को चुनौती दी। यूरोपियन पेटेंट आफिस ने इसी आधार पर १०-५-१९९९ को यह कहते हुये रदद कर दिया कि यह आविष्कार नवीन नहीं था और वह भारतवर्ष में सार्वजनिक रूप में प्रयोग किया जाता था।

निष्कर्ष

अभी तक कुछ ही पेटेंट रद्द किये गये हैं। इस तरह के अनेकों पेटेट हैं जो कि गलत रूप से दे दिये गये हैं, यह इन पेटेंटों में ईसपगोल, सौंफ, धनिया, जीरा, सूरजमुखी, मूंगफली, अरंडी, रेड़ी, करेला, जामुन, बैंगन के गुणों को प्रयोग कर प्राप्त किये गए हैं। यह सारे हमारे आयुर्वेद का हिस्सा रहे और पूर्व कला के रूप में जाने जाते थे। इन्हें भी रद्द करवाना चाहिए। पेटेंट रद्द करवा पाना बहुत महंगा तरीका है। हमें अपनी परम्परागत सूचना इंटरनेट पर डालनी चाहिये ताकि यह पूर्व कला के तौर पर जानी जाय और कोई अन्य इस पर पेटेंट न प्राप्त कर सके।

नोट: यह लेख उन्मुक्त चिठ्ठे पर कई कड़ियों मे प्रकाशित चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के बनाया गया है। यदि आप इसे, उन्मुक्त चिठ्ठे पर पढ़ना चाहें तो इसकी अन्तिम कड़ी यहां पर देखें। वहीं से पहले की कड़ियों पर जा सकते हैं।


पेटेंट और कंप्यूटर प्रोग्राम

October 16, 2006

भूमिका

यह विवादास्पद विषय है कि कंप्यूटर प्रोग्राम पेटेंट कराया जा सकता है कि नहीं। इस बारे में अलग-अलग देशों के नियम भी भिन्न हैं। इसमें कराये जाने के तरीके पर भी विवाद है इसको समझने के लिये इस विषय को तीन भागों में बांटना उचित होगा,

  • अलग-अलग देशों में क्या नियम हैं?
  • यदि कं‍प्यूटर प्रोग्राम पेटेंट हो सकते हैं तो उसकी क्या कालावधि होनी चाहिये?
  • कं‍प्यूटर प्रोग्राम को पेटेंट कराने का क्या तरीका होना चाहिये ?

पहला भाग भी अपने में बहुत बड़ा है इसे भी कुछ कड़ियों में करना होगा।

  • अमेरिका में पेटेंट का कानून
  • अमेरिका में पेटेंट का कानून यदि कं‍प्यूटर प्रोग्राम औद्योगिक प्रक्रिया के साथ हो
  • अमेरिका में पेटेंट का कानून यदि कं‍प्यूटर प्रोग्राम व्यापार के तरीके के साथ हो
  • अमेरिका में कं‍प्यूटर प्रोग्राम से जुड़े पेटेंट के कुछ उदाहरण
  • यूरोप में पेटेंट का कानून
  • भारतवर्ष में पेटेंट का कानून

अमेरिका में पेटेंट का कानून

पेटें‍ट आविष्कार के लिये दिये जा सकते हैं। भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा 3 बताती है कि क्या आविष्कार नहीं है और जो आविष्कार नहीं है उसका पेटें‍ट नहीं कराया जा सकता है। अमेरिका के पेटेंट कानून में ऐसी कोई सीमा नहीं है। अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने चक्रवर्ती केस (Diamond Vs. Chakravarty 447,45303:65 LED 2d 144) में पेटेंट कानून की व्याख्या की है। न्यायालय ने कहा कि अमेरिकी काग्रेंस, उन सब का पेटें‍ट करने का आशय रखती है जो कि मनुष्य द्वारा निर्मित की जाती हैं पर यह भी स्पष्ट किया कि,

  • इसका यह अर्थ नहीं है कि पेटें‍ट कानून की कोई सीमाएं नहीं हैं और प्रत्येक खोजों को पेटें‍ट कराया जा सकता है;
  • प्रकति के नियम, भौतिक घटनाए, तथा विचारों को पेटेंट नहीं कराया जा सकता है;
  • भूमि में खोजा गया नवीन खनिज या जंगल में पाया गया नवीन पौधा को पेटेंट नहीं कराया जा सकता है।
  • न तो आइं‍स्टाइन अपने प्रसिद्ध नियम ई=एमxसी^२ को पेटें‍ट नहीं कर सकते थे और न ही न्यूटन गुरूत्वकर्षन के नियम को पेटें‍ट करा सकते थे।
  • ऐसी खोजें, प्रकृति की अभिव्यक्तियां हैं, ये सभी व्यक्तियों के लिए स्वतंत्र हैं तथा किसी के भी लिए अनन्य रूप से आरक्षित नहीं हैं।

पार्कर केस (Parker vs Flook) 437, US. 504 : 57 L.Ed 2d 451) में अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने कहा कि गणितीय सूत्र का पेटेंट नहीं कराया जा सकता है।

अमेरिकी पेटेंट अधिनियम न तो कंप्यूटर प्रोग्राम और न ही व्यापार करने के तरीकों के बारे में अलग से जिक्र करता है। गॉटसचाल्क केस (Gottschalk vs Benson 40 US 63= 34 L.Ed 2d 273) में, अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने यह तय किया कि डेसीमल नम्बरो को शुद्ध बाइनरी नम्बरों में बदलने वाले कं‍प्यूटर प्रोग्राम को पेटेंट नहीं किया जा सकता है। यह इसलिये क्योंकि इसे मंजूर करने का परिणाम एक विचार के लिए अनुचित रूप से पेटेंट जारी करना होगा।

संक्षेप में अमेरिका में, न तो एलगोरथिम (Algorithm) को पेटेंट कराया जा सकता है, न ही कं‍प्यूटर प्रोग्राम यदि वह अकेले में हो। लेकिन यदि कं‍प्यूटर प्रोग्राम, औद्योगिक प्रक्रिया या व्यापार तरीके का एक हिस्सा हो तो क्या यही स्थिति रहेगी? चलिये इसके बारे में चर्चा करें।

कं‍प्यूटर प्रोग्राम - औद्योगिक प्रक्रिया के साथ

कं‍प्यूटर प्रोग्राम, औद्योगिक प्रक्रिया के साथ हो तो उसे पेटेंट कराया जा सकता है कि नहीं, इस सम्बन्ध में सबसे चर्चित और शायद सबसे विवादित मुकदमा डार्ह केस (Diamond Vs. Diehr, (1981) 450 U.S.. 175: 67 L.E.D. 2d घ/55) है। इस मुकदमे में जिस आविष्कार को पेटंट कराया जा रहा था उसमें कं‍प्यूटर प्रोग्राम को रबर साफ करने की एक प्रक्रिया के साथ प्रयोग किया गया था। रबर को साफ करने के लिये उसे गर्म किया जाता है उसे कितनी देर गर्म किया जाय यह उसके तापमान पर निर्भर है तापमान ज्यादा तो कम समय के लिये गर्म किया जायेगा यदि तापमान कम तो ज्यादा समय के लिये गर्म किया जायेगा यह आर्हेनियस नियम के अनुसार निश्चित होता है। जिस ढांचे के अन्दर रबर को गर्म किया जाता था उसके अन्दर के तापमान को कंप्यूटर में डाला जाता था जो आर्हेनियस नियम के अनुसार समय की गणना करता था और ठीक समय ढांचे को खोल देता था ताकि रबर बाहर आ जाये। सवाल यह था कि क्या यह आविष्कार था जिसका पेटें‍ट कराया जा सकता है।

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने चार के मुकाबले पांच से अपना फैसला सुनाया कि,

  • यह पेटेंट कराया जा सकता है; और
  • पेटेंट होने योग्य दावा मात्र केवल इस बात से पेटेंट करने के लिये अयोग्य नहीं हो जाता है कि उसमें गणितीय फार्मूला, या कं‍प्यूटर प्रोग्राम, या कं‍प्यूटर का प्रयोग हुआ है।

संक्षेप में, एक कं‍प्यूटर प्रोग्राम यदि किसी एक औद्योगिक प्रक्रिया का हिस्सा है तो उसके साथ में पेटें‍ट हो सकता है। यहीं से शुरु हुआ कं‍प्यूटर प्रोग्राम का, अमेरिकी पेटेंट कानून के साथ सफर। ऐसा सफर जो कि कईयों के मुताबिक एक खतरनाक मोड़ पर आ पहुंचा है।

कं‍प्यूटर प्रोग्राम - व्यापार के तरीके के साथ

परम्परागत तौर पर, मात्र प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित प्रक्रियाओं को ही पेटेंट किया जा सकता था। अनेक दूसरे कार्यकलाप जिनके अन्तर्गत व्यापार के ढंग या आंकड़ा विश्लेषण जो कि प्रक्रियाएं कही जा सकती है, को पेटेंट नहीं किया जाता था। पर र्डाह केस के बनाय अमेरिका में पेटें‍ट देने की प्रक्रिया में बदलाव आया है। यू.एस. पेटेंट एन्ड ट्रेड आफिस (यू.एस.पी.टी.ओ.) ने पेटेंट करने के मार्गदर्शन की मैन्युवल में परिवर्तन किया है। इसकी कं‍प्यूटर प्रोग्राम के लिए व्यापार के तरीकों से सम्बन्धित पूर्वतर पॉलिसी जो { (पैराग्राफ 706.03 (क) } निम्नलिखित थी।

‘Though seemingly within the category of a process or method, a method of doing business can be rejected as not being within the statutory classes.’

इसे बदल कर निम्न कर इस प्रकार कर दिया गया है।

‘Office personnel have had difficulty in properly treating claims directed to methods of doing business. Claims should not be categorized as methods of doing business. Instead such claims should be treated like any other process claims’.

उर्पयुक्त परिवर्तन को मद्देनजर रखते हुये स्टेट स्ट्रीट केस (State Stree Bank vs Signature Finencial Group 149 F3d ,1352) में अमेरिका के एक अपीली न्यायालय ने कहा कि कोई प्रक्रिया पेटेंट करने योग्य है या नहीं, यह इस पर नहीं तय होना चाहिए कि प्रक्रिया व्यापार करती है पर यह देखना चाहिये कि, पेटेंट की जाने वाली प्रक्रिया एक उपयोगी तरीके से प्रयोग की जा रही है अथवा नहीं। अमेरिका में व्यापार के तरीकों के के लिए दिये पेटेंट के कुछ उदाहरण निम्न है :

  • सामान खरीदने की स्वीकृत देने के लिये एक क्लिक का प्रयोग करना;
  • लेखा लिखने की एक आन-लाइन पद्धति;
  • आन-लाइन पारिश्रमिक प्रोत्साहन पद्धति;
  • आन-लाइन बारम्बार क्रेता कार्यक्रम; और
  • उपभोक्ता को अपने दिये गये दाम पर सर्विस की सूचना प्राप्त करने की सुविधा।

संक्षेप में, अमेरिका में विचार पेटें‍ट नहीं कराये जा सकते पर जब विचार व्यावहारिक तौर पर एक उपयोगी, कंक्रीट तथा मूर्त परिणाम देते हैं तो उन्हें पेटें‍ट कराया जा सकता है। आजकल अमेरिका में यू.एस.पी.टी.ओ. के मैन्युवल में व्यापार के तरीके के पेटें‍ट के ऊपर एक अध्याय है और उपयोगी व्यापार के तरीके तथा आंकड़ा विश्लेषण के लिए कंप्यूटर प्रोग्राम के पेटें‍ट मंजूर हो रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और जापान ने भी अमेरिका का अनुसरण किया है।

अमेरिका में व्यापार करने के तरीको सुधार लाने के लिये Business Patent Improvement Act 2000 लाया गया था पर यह अभी तक पारित नहीं किया गया है और शायद यह कभी भी पारित नहीं हो।

यूरोप में पेटेंट का कानून

यूरोपियन पेटें‍ट कनवेशंन १९७३ (ई.पी.सी.) का अनुच्छेद ५२(२) कहता है कि मानसिक कार्य करने की प्रक्रिया, खेल खेलने के तरीके, व्यापार तरीके, और कं‍प्यूटर प्रोग्राम आविष्कार नहीं माने जायेगें। यानी कि, कं‍प्यूटर प्रोग्राम और व्यापार तरीकों को पेटेंट नहीं किया जा सकता। यही ई.पी.सी. के सदस्य देशों का भी कानून है। किन्तु व्यवहार में, यह नियम बदल गया है। इस तरह के पेटेंटों के लिए यदि आवेदन पत्र - कंप्यूटर प्रोग्राम या व्यापार के तरीकों की जगह - तकनीकी में बढ़ोत्तरी की तरह प्रस्तुत किये जांय तो उन पर विचार किया जा रहा है।

यूरोप के भिन्न भिन्न देशों अलग अलग नियम है और यूरोपियन कमीशन उसमें समानता लाने का वह प्रयास कर रहा है। वह इसमें सफल होगा कि नहीं यह तो भविष्य ही बतायेगा।

भारतवर्ष में पेटेंट का कानून

भारतवर्ष में पेटें‍ट अधिनियम की धारा ३ को २००२ संशोधन के द्वारा संशोधित किया गया है। इसने पेटेंट अधिनियम में धारा ३ (K) को प्रतिस्थापित किया है। इसमें गणित, व्यापार के तरीकों, कं‍प्यूटर प्रोग्राम अकेले में (Computer Programme per se), अल्गोरिथम को अविष्कार नहीं माना गया है। यानि कि यह पेटेंट नहीं हो सकते हैं।

यहां ‘कं‍प्यूटर प्रोग्राम’ को per se के द्वारा प्रतिबन्धित किया गया है। Per se का अर्थ अकेले में या अपने आप में है। इसका अर्थ यह हुआ कि कंप्यूटर प्रोग्राम अपने आप में अविष्कार नहीं है पर इसका यह भी अर्थ हुआ कि यदि वह अकेले में न हो तो अविष्कार माने जा सकते हैं और उसका पेटेंट भी हो सकता है। आगे न्यायालय इसका क्या मतलब निकालेगें - क्या हम अमेरिका की राह जायेंगे या यूरोप की - यह तो केवल भविष्य ही बता सकता है।

कं‍प्यूटर प्रोग्राम के पेटेंट की कालावधि

पुरानी तकनीक में प्रशिक्षणा‍र्थियों को प्रशिक्षण देने में लगभग सात वर्ष लगते थे तथा प्रशिक्षणार्थियों की दो पीढ़ियों को प्रशिक्षित करने में चौदह वर्ष लगते थे इसलिए पहले पेटेंट को चौदह वर्षो के लिए दिया जाता था। इंगलैण्ड में बीसवीं शताब्दी के शुरू में इसे बढ़ा कर सोलह साल कर दिया गया। हमने भी इसी का अनुसरण किया और पेटेंट १६ साल के लिए दिया जाने लगा किया गया । पेटेंट अधिनियम में इसे पुन १४ साल कर दी गयी। हांलाकि कुछ श्रेणियों के लिए पांच या सात साल ही रही। ट्रिप्स पेटेंट के लिए बीस वर्षो के लिए पेटेंट को संरक्षण करने को कहता है । हमने भी २००२ संशोधन द्वारा यही किया किया है।

सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति ज्यामितीय ढ़ंग से गतिशील है। अनेक लोग यह कहते हैं कि,

  • यदि कं‍प्यूटर प्रोग्राम या इन्टरनेट पर व्यापार करने के तरीके के लिये पेटें‍ट दिया जाय तो उसके लिये 20 वर्षो की कालावधि अत्यधिक लम्बी है;
  • कंप्यूटर प्रोग्राम हर दो साल में बदल जाता है;
  • दो साल से ज्यादा समय के लिये पेटें‍ट की कालावधि बेकार है।

पर यह तब तक नहीं किया जा सकता जब तक ट्रिप्स में बदलाव न किया जाय।

कं‍प्यूटर प्रोग्राम को पेटेंट कराने तरीका

जब कंप्यूटर प्रोग्राम से सम्बन्धित किसी प्रक्रिया या उत्पाद का पेटें‍ट कराया जाता है तब कंप्यूटर प्रोग्राम का सोर्स कोड नहीं बताया जाता है उसे केवल फ्लो चार्ट के द्वारा दिखाया जाता है। यह भी विचारणीय प्रश्न है कि, क्या यह‍ सही है? क्या यह उस प्रक्रिया या उत्पाद की पूरी जानकारी देता है? आशा है कि इस प्रश्न का भी उत्तर जल्दी मिलेगा।

निष्कर्ष

कंप्यूटर प्रोग्राम पेटें‍ट हो सकता है कि नहीं, के बारे में कानून स्पष्ट नहीं है। फिर भी, यदि सब किसी न किसी तरह से कंप्यूटर प्रोग्राम पेटें‍ट करा रहे हैं तो हमें भी पीछे नहीं रहना चाहिये - यदि कंप्यूटर प्रोग्राम पेटें‍ट हो सकता है तो उसे पेटेंट कराना चाहिये। यदि यह समय या खर्च के कारण पेटें‍ट नहीं कराया जा सकता है तो इसको वेबसाइट पर प्रकाशित करना चाहिये। इस कारण यह पूर्व कला के रूप में रहेगा और कम से कम दूसरे लोग इसको पेटेंट कराने में समर्थ नहीं होंगे।

नोट

  1. यह लेख मेरे उन्मुक्त चिठ्ठे () पर पेटेंट और कंप्यूटर प्रोग्राम नाम से कई कड़ियों मे प्रकाशित चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के बनाया गया है। इसकी आखरी कड़ी यहां है जहां से आप पहले की कड़ियों में जा सकते हैं।
  2. यदि आप इसे सुनना चाहें तो इसे मेरे पॉडकास्ट बकबक पर सुन सकते हैं।

पेटेंट

August 28, 2006

भूमिका

बौद्धिक सम्पदा अधिकार मस्तिष्क की उपज हैं और इनमे सबसे महत्वपूर्ण हैं - पेटेंट। पेटेंटी, पेटेंट का उल्लंघन करने वाले तरीके या उत्पाद के निर्माण को न्यायालय द्वारा रूकवा सकता है। बहुत से लोग यह कहते हैं कि पेटेंट तकनीक को आगे बढाता हैं पर बहुत से लोग यह भी कहते हैं कि इस युग में पेटेंट तकनीक की प्रगति पर बाधा पहुंचा रहा है। इसलिये य‍ह जरूरी है कि हम पेटेंट को समझें और देखें कि वह हमारे देश की उन्नति में बाधा न बने।

पेटेंट की चर्चा हम निम्न क्रम से करेंगे।

  1. Agreement on the Trade Related Aspect of Intellectual Property Rights, (TRIPS या ट्रिप्स );
  2. इतिहास की दृष्टि मे पेटेंट ;
  3. अपने देश में पेटेंट कानून का इतिहास;
  4. पेटेंट प्राप्त करने की विधि का सरलीकरण;
  5. पेटेंट किसके लिये दिया जा सकता है; और
  6. पेटेंटी के अधिकार एवं दायित्व।

ट्रिप्स (TRIPS)

20वीं शताब्दी के अन्त होते, होते यह लगने लगा था कि 21वीं शताब्दी में बौद्धिक सम्पदा अधिकार महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। इसलिये 1980 के दशक में General Agreement of Trade and Tariff (G A T T या गैट ) के आंठवें चक्र में, अमेरिका ने यह कहना शुरू किया कि इन अधिकारों को भी गैट में रखा जाय। 1990 के दशक में विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation) (WTO या डब्लू.टी.ओ.) की स्थापना हुई इसके चार्टर में कई समझौते हैं उनमें से एक Agreement on the Trade Related Aspect of Intellectual Property Rights, ( TRIPS या ट्रिप्स ) है। हम डब्लू. टी. ओ. के सदस्य हैं इसलिए यह हम पर भी लागू है । ट्रिप्स सात प्रकार की बौद्धिक संपत्ति अधिकारों की चर्चा करता है:

  1. Copyright and Related Rights, प्रतिलिपि प्राप्त करने तथा उससे सम्बन्धित अधिकार (कौपीराईट एवं रिलेटेड राईटस)
  2. Trade Mark, ट्रेड मार्क
  3. Geographical Indication, भौगोलिक उपदर्शन
  4. Industrial Design, औद्योगिक डिज़ाईन
  5. Patents, पेटेंट
  6. Layout- designs (Topography ) of Integrated Circuit, इन्टीग्रेटेड सर्किट की डिज़ाईन
  7. Protection of undisclosed Information,अप्रकाशि‍त सूचना का संरक्षण या Trade Secret ट्रेड सीक्रेट

ट्रिप्स, बौद्धिक सम्पत्ति के अधिकारों के न्यूनतम मानकों को तय करता है और सदस्य देशों को उसके अनुपालन के लिए बाध्य करता है । इसीलिये हमें बौद्धिक संपदा अधिकार से सम्बन्धित कानूनों को संशोधित करना पडा। यह संशोधन करने के लिये अलग अलग तरह के देशों के लिये अलग समय की सीमा है। हमें 31-12-2004 तक कानून में संशोधन करना था। हमारी सरकार के अनुसार यह कर दिया गया है।

बौद्धिक सम्पदा अधिकार के क्षेत्र में बहुत कुछ करना बाकी है जो कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर ही उठा कर किया जा सकता है। हमें, इसके लिये प्रयत्न करना चाहिये।

इतिहास की दृष्टि में

‘पेटेंट’ का शब्द, लैटिन के शब्द Lilterae Patents से आया है। पेटेंट का अर्थ है ‘खुला’, और Lilterae Patents का शाब्दिक अर्थ है ( Letters patents) या खुले पत्र। पुराने जमाने में शासको या सरकारों के द्वारा पदवी‚ हक‚ विशेष अधिकार पत्र के द्वारा दिया जाता है। यह शासकीय दस्तावेज होता था और इन्हे चूंकि सार्वजनिक रूप से दिया जाता था, इसलिए यह हमेशा ‘खुले’ रहते थे।

यूरोप में 6वीं शताब्‍दी में से इस तरह के पत्र दिये जाते थे। यह शासक की ओर से विदेशी भूमि की खोज तथा उस पर विजय के लिये जारी किये जाते थे। आजकल पेटेंट शब्द का प्रयोग आविष्कारों के संबंध में होता है। इस तरह का प्रयोग पहली बार 15वीं शताब्दी के आस-पास आया। सर्वप्रथम, पेटेंट कानून जैसा इसे आज समझा जाता हैं, 14 मार्च, 1474 को वियाना सिनेट (Venetian Senate) के द्वारा को पारित किया गया।

पेटेंट‚ आविष्कारकों को अनन्य (Exclusive) अधिकार देता है । यह बहुत जल्दी इटली से यूरोप के अन्य देशों तक फैल गया। जिन देशों के पास प्रौद्योगिकी नहीं थी, उन्होंने प्रौद्योगिकी को स्थापित करने के लिए विदेशी आविष्कारकों को पेटेंट देना शुरू कर दिया। इंगलैंड में पहले इसकी अवधि नहीं थी पर ब्रिटिश संसद ने 1623 में नया कानून बनाकर इसे 14 वर्षो तक सीमित कर दिया।

अमेरिका के संविधान के अनुच्छेद 1 अनुभाग 8 के अन्तर्गत अमेरिकी कॉग्रेस को विज्ञान और कलाओं की प्रगति के लिये कानून बनाने का अधिकार है। इस परिप्रेक्ष्य में कांग्रेस ने 1790 में पहला पेटेंट कानून पारित किया। फ्रान्स ने इसके अगले वर्ष पेटेंट कानून बनाया। 19वीं शताब्दी के अंत तक अनेक देशों ने अपना (जिसमें भारतवर्ष भी सम्मिलित है ) पेटेंट कानून बनाया।

 

भारतवर्ष में पेटेंट कानून का इतिहास

भारतवर्ष में पहला पेटेंट सम्बन्धित कानून, १८५६ में पारित अधिनियम था। इसे २५ फरवरी‚ १८५६ को गवर्नर जनरल की अनुमति प्राप्त हो गयी थी पर यह कानून १८५७ में अधिनियम सं. ९ के द्वारा इसलिये खारिज कर दिया गया कि इसे बनाने के पूर्व इंगलैंड की महारानी की मंजूरी नहीं प्राप्त की गयी थी।

नये अविष्कार के उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिये १८५९ में, अधिनियम सं. १५ पारित किया। बाद में यह Inventions and Designs Act 1888 के द्वारा प्रतिस्थपित कर दिया गया। इसके बाद १९११ में Indian Patents and Designs Act १९११ आया। 1967 में भारत सरकार ने पार्लियामेंट में पेटैंट बिल पेश किया जो Patent Act १९७० (पेटेंट अधिनियम ) के रूप में पास हुआ। पेटेंट अधिनियम को तीन बार संशोधित किया गया है। कुछ संशोधन तो ट्रिप्स के मुताबिक कानून बनाने के लिये किये गये और कुछ अपने अधिकारों (जैसे परम्परागत सूचना) को सुरक्षित करने के लिये किये गये। यह संशोधन निम्न हैं,

  • संशोधन अधिनियम सं. १७, १९९९ (१९९९ संशोधन);
  • संशोधन अधिनियम सं. ३८,२००२ (२००२ का संशोधन);
  • संशोधन अधिनियम सं. १५, २००५ (२००५ का संशोधन)।

 

पेटेंट प्राप्त करने की प्रक्रिया का सरलीकरण

प्रत्येक देश का अपना पेटेंट कानून है। साधारण तौर पर आविष्कारको को प्रत्येक देश में पेटेंट के लिए आवेदन देना आवश्यक है, जहां वे अपने आविष्कारों का प्रयोग करना चाहते हैं। हर देश में अलग अलग आवेदन पत्र देना कठिन कार्य है। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए निम्न अन्तर्राष्ट्रीय प्रयास किये गये हैं।

  • देशों में पेटेंट संबंधी अन्तरों को कम करने का पहला प्रयास International Convention for the protection of Industrial Property था। इसे पेरिस में 1883 में अंगीकार किया गया है। इसे अनेक बार संशोधित किया गया। इसने आविष्कारकों को किसी एक सदस्य देश में आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रथम तारीख का लाभ अन्य सदस्य राज्यों में आवेदन पत्र दाखिल करने की तिथि के लिये दिया ।
  • Patent Cooperation Treaty 1970 (P.C.T. या पी.सी.टी.) पेटेंट के लिये आवेदन पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में सुविधा प्रदान करती है। यह पेटेंट के लिये आवेदन पत्र का मानकीकृत फॉरमैट बताती है और इसके साथ उन्हे दाखिल करने की केन्द्रीयकृत सुविधा भी देती है। हमने इसके अनुच्छेद 64 के उप अनुच्छेद 5 के अलावा‚ इसे7-12-98 को स्वीकार किया है।
  • European patent Convention, 1977 में लागू हुआ। इसके द्वारा एक यूरोपियन पेटेंट कार्यालय की स्थापना हुई। इसके द्वारा दिया गया पेटेंट, आवेदक द्वारा नामित सदस्य देशों में पेटेंट का कार्य करता है।
  • World Intellectual Property Organisation WIPO (वाईपो) ने Patent Law Treaty (PLT) (पी.एल.टी.) बनायी है। यह 1 जून 2000 को अंगीकार कर ली गयी है। हमने इस पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं किये हैं। पी.एल.टी., पी.सी.टी. के अधीन है और विभिन्न देशों में पेटेंटो को प्राप्त करने की प्रक्रिया को और सरल बनाती है। यह पेटेंट के Substantive Law को प्रभावित नहीं करती है।
  • Substantive Patent Law को एक लय में लाने के लिए वाईपो, Substantive Patent Law Treaty (SPLT) (एस.पी.एल.टी.) का आयोजन कर रही है । जहां तक मुझे मालुम है हम इसमें भाग नहीं ले रहे। हमें इसमें भाग लेकर अपनी बात कहनी चाहिये।

 

आविष्कार

पेटेंट आविष्कारों के लिए दिया जाता है। ‘आविष्कार’ का अर्थ उस प्रक्रिया या उत्पाद से है, जो कि औद्योगिक उपयोजन (Industrial application) के योग्य है। अविष्कार नवीन एवं उपयोगी होना चाहिये तथा इसको उस समय की तकनीक की जानकारी में अगला कदम होना चाहिए। यह आविष्कार उस कला में कुशल व्यक्ति के लिए स्पष्ट (Obvious) भी नहीं होना चाहिये।

आविष्कार को पेटेंट अधिनियम की धारा 3 के प्रकाश में भी देखा जाना चाहिये । यह धारा परिभाषित करती है कि क्या आविष्कार नहीं होते हैं । किसी बात को आविष्कार तब तक नहीं कहा जा सकता है जब तक वह नवीन न हो । यदि किसी बात का पूर्वानुमान किसी प्रकाशित दस्तावेज के द्वारा किया जा सकता था या पेटेंट आवेदन के प्रस्तुत करने के पूर्व विश्व में और कहीं प्रयोग किया जा सकता था तो इसे नवीन नहीं कहा जा सकता। यदि कोई बात सार्वजनिक क्षेत्र में है या पूर्व कला के भाग की तरह उपलब्ध है तो उसे भी आविष्कार नहीं कहा जा सकता। हमारे देश में परमाणु उर्जा से सम्बन्धित आविष्कारों का पेटें‍ट नहीं कराया जा सकता है।

 

पेटेंटी के अधिकार एवं दायित्व

पेटेंट एक सम्पत्ति है जो कि विरासत में प्राप्त की जा सकती है। पेटेंटी उसे किसी और को दे (assign) सकता है, या बन्धक रख सकता है। यदि दूसरे लोगों ने यदि पेटें‍टी से लाइसेंस न लिया हो तो, पेटेंटी उन्हें अपने पेटेंट का प्रयोग करने से या उसका विक्रय करने से रोक सकता है। उसे अधिकार है कि वह लाइसेंस के द्वारा दूसरे लोगों को यह कार्य करने के लिये अनुमति दे और इसके लिये वह रॉयल्टी भी ले सकता है। यदि कोई व्यक्ति, पेटेंटी से बिना लाइसेंस लिए या उसके पेटेंट का अनाधिकृत प्रयोग करता है तो पेटेंटी उस पर हर्जाने का मुकदमा या injunction का मुकदमा दायर कर उचित अनुतोष प्राप्त कर सकता है।

ट्रिप्स, ट्रेड मार्क या कॉपीराईट के उल्लंघन के मामलों में दाण्डिक प्रक्रियाओं एवं शास्तियों का प्रावधान बनाने के लिए सदस्यों को कहता है लेकिन पेटेंट के उल्लंघन के लिए नहीं। हमने भी पेटेंट का उल्लंघन करने वाले के लिये दाण्डिक अभियोजन का उपबन्ध नहीं किया है। हां झूठ बोलकर पेटेंट प्राप्त करने पर दाण्डिक अभियोजन की बात अवश्य है।

उन्मुक्त
ईमेल: unmukt.s@gmail.com

नोट:-

 

  • यह लेख उन्मुक्त चिठ्ठे पर पेटेंट नाम से कई कड़ियों मे प्रकाशित चिठ्ठियों को संग्रहीत कर के बनाया गया है।
  • यदि आप इसे सुनना चाहें तो इसे मेरे पॉडकास्ट बकबक पर सुन सकते हैं।

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