Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for the ‘दर्शन’ Category

मेरे घर में आने वाली एक बुलबुल

मॉकिंगबर्ड का चित्र विकिपीडिया से

‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ उपन्यास बीसवीं सदी के उत्कर्ष अमेरीकी साहित्य में गिना जाता है। इसने अमेरीकी जन मानस पर गहरा असर किया।  यह पुस्तक एक वास्तविक घटना तथा उस पर चले केस (स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ केस) पर आधारित थी। इस उपन्यास का प्रकाशन १९६० में हुआ था। २०१० में इसके प्रकाशन के ५० साल पूरे हुऐ। उसी साल मैंने उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में यह श्रृंखला, इस पुस्तक तथा उस घटना जिससे यह पुस्तक प्रेरित थी, लिखी। इसकी आखरी कड़ी छुटपुट पर लिखी थी। इन सब को यहां यहां संकलित कर रख रहा हूं। इसे आप कड़ियों में नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

इसकी अधिकतर कड़ियों को, आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये नीचे  लिंक के बगल में  ब्रैकेट () के अन्दर लगे ► चिन्ह पर चटका लगायें। अधिकतर ऑडियो फाइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप –

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ब्रैकेट के अन्दर चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।
भूमिका: ।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम: ।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं: ।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है: ।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है: ।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है: ।। क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’  हर्पर ली की जीवनी है: ।। बचपन के दिन भी क्या दिन थे: ।। पुनः लेख – ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ: ।। अरे, यह तो मेरे ध्यान में था ही नहीं।।

(और ज्यादा…)

Advertisements

Read Full Post »

यह चिट्ठी रिश्तों के बारे में है, उनसे निकलती खुशबू, जीवन के भावात्मक पहलू दर्द, प्रेम, मित्रता के बारे में है।

यह मेरे ‘उन्मुक्त‘ चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुकी है। इसका कुछ भाग मेरी पत्नी शुभा ने अपने चिट्ठे ‘मुन्ने के बापू‘ पर लिखा है। उसके कहने पर, उन चिट्ठियों को भी यहां जोड़ रहा हूं। यह लेख इन सारी कड़ियों को सम्पादित कर, प्रकाशित किया जा रहा हूं। यदि आप इसे कड़ियों में पढ़ना चाहते हैं तो नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

भूमिका।। सबसे प्रिय गीत, प्रिय क्षण – दर्द की यादें हैं। sweetest songs are those that tell of saddest thought।। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन, बीते हुए दिन वो मेरे प्यारे पल छिन।। प्यार में अफसोस नहीं ।। रोमन हॉलीडे – पत्रकारिता।। अनन्त प्रेम।। अम्मां – बचपन की यादों में।। यहां सेक्स पर बात करना वर्जित है।। करो वही, जिस पर विश्वास हो।। जो करना है वह अपने बल बूते पर करो।। अम्मां – अन्तिम समय पर।। मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी।। पुराने रिश्तों में नया-पन, नये रिश्तें बनाने से बेहतर है।। प्रेम तो है बस विश्वास, इसे बांध कर रिशतों की दुहाई न दो।। निष्कर्ष – प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो।। पुनः लेख – जीना इसी का नाम है।। (और ज्यादा…)

Read Full Post »

यह लेख रिचार्ड फाइनमेन के लिखे पत्रों संग्रहीत कर लिखी गयी पुस्तक ‘क्या आपके पास सोचने का समय नहीं है’ (Don’t you have time to think) की पुस्तक समीक्षा है और इन पत्रों के माध्यम से उनके दर्शन, उनके जीवन के मूल्यों पर भी एक नज़र डालती है।

(और ज्यादा…)

Read Full Post »

(यह कहानी नहीं, सच है। लेकिन यह किसी एक लड़की या महिला की कहानी नहीं है। यह उन कई महिलाओं और लड़कियों की दास्तान और अनुभवों को मिला कर लिखी गयी है जिनसे मुझे मिलने का, बात करने का, मौका मिला –  और जीवन की सच्चाई भी पता चली। उर्मिला एक काल्पनिक नाम है। मैं आज तक किसी लड़की या महिला से नहीं मिला जिसका नाम उर्मिला हो। )

(और ज्यादा…)

Read Full Post »

इस चिट्ठी में बताया गया है कि क्यों ज्योतिष, अंक, और हस्तरेखा विद्या के पीछे कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है।


(और ज्यादा…)

Read Full Post »

%d bloggers like this: