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इस चिट्ठी में,  डार्विन, प्राणियों की उत्पत्ति, विकासवाद, मज़हबों में सृजनवाद, सृजनवादियों की विकासवाद के विरुद्ध आपत्तियों, इन दोनो विचारधाराओं से जुड़े विवाद, तथा इससे जुड़े चर्चित मुकदमों की चर्चा है।
यह लेख कई कड़ियों में मेरे ,मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर, चार्लस् डार्विन के जन्म के २००वें साल पर लिखा गया था।
इसकी कुछ कड़ियों को, आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये नीचे  लिंक के बगल में  ब्रैकेट ( ) के अन्दर लिखे ► चिन्ह पर चटका लगायें। यह ऑडियो फाइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इन्हें आप,

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ब्रैकेट के अन्दर चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें। इन्हें डिफॉल्ट करने के तरीके या फायरफॉक्स में सुनने के लिये मैंने यहां विस्तार से बताया है।

भूमिका ()।। डार्विन की समुद्र यात्रा ()।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया ()।। सेब, गेहूं खाने की सजा ()।। भगवान, हमारे सपने हैं ()।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री ()।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य ()।। मुझे फिर कभी ग़ुलाम देश में न जाना पड़े ()।। ऐसे व्यक्ति की जगह, बन्दरों से रिश्ता बेहतर है ()।। विकासवाद उष्मागति के दूसरे नियम का उल्लंघन करता है ()।। समय की चाल – व्यवस्था से, अव्यवस्था की ओर ।। मैंने उसे थूकते हुऐ देखा है ()।। यदि विकासवाद जीतता है तो इसाइयत बाहर हो जायगी ()।। विकासवाद पढ़ाना मना करना, मज़हबी निष्पक्षता का प्रतीक नहीं ()।। सृजनवाद धार्मिक मत है विज्ञान नहीं है ()।। ‘इंटेलिजेन्ट डिज़ाईन’ – सृजनवादियों का नया पैंतरा ()।। यू हैव किल्ड गॉड, सर ()।। हम न मानेंगे, हमारे मूरिसान लंगूर थे ()।।

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इस चिट्ठी में, हमारी कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा का वर्णन है।

सुबह झील से, ताज गार्डन रिट्रीट कुमारकॉम

यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।

क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे – महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।। कुमाराकॉम पक्षीशाला में।। क्या खांयेगे – बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट।। आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया।। भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न की निजी।। रात के खाने पर, सिलविया गुस्से में थी।। मुझे, केवल कुमारी कन्या ही मार सके।। आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया।। आप,  टाइम पत्रिका पढ़ना छोड़ दीजिए।। पति, पत्नी के घर में रहते हैं।। पसन्द करें – कौन सी मछली खायेंगे।।

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इस चिट्ठी में हमारी हैदराबाद यात्रा का वर्णन है।

हैदराबाद में दर्शनीय स्थल

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वामन, राजा बलि से याचना करते हुऐ चित्र विकिपीडिया से।

इस चिट्ठी में चर्चा है कि हमें क्यों मुक्त सॉफ्टवेयर और मुक्त मानक का प्रयोग करना चाहिये।

आज सितंबर माह का तीसरा शनिवार है। यह दिन मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस (Freedom software Day) के रूप में मनाया जाता है। इसलिये यह चिट्ठी आज प्रकाशित की जा रही है।

आप सोच रहे होंगे कि ‘मुक्त मानक (Open Format) और ‘वामन की वापसी’ (The Return of Vaman)’ कहानी में क्या संबन्ध है?

कुछ समय पहले मुझे काम से साउथ अफ्रीका जाना पड़ा। इस चिट्ठी  में, वहीं की यात्रा का वर्णन है।

क्रुगर पार्क साउथ अफ्रीका में सूर्यास्त

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इस चिट्ठी  में, हमारी सिक्किम और कालिम्पॉङ यात्रा का वर्णन है।

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प्रभू ईसा को देख, चकित होते हुऐ चरवाहे - चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से।

यह श्रृंखला मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। इसकी शुरुवात मैंने इस प्रश्न के उत्तर में शुरू की कि,

बेथलेहम का तारा क्या था?

इसमें तीन विषय – बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियों – पर चर्चा है।

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