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इस चिट्ठी में, हमारी कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा का वर्णन है।

सुबह झील से, ताज गार्डन रिट्रीट कुमारकॉम

यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।

क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे – महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।। कुमाराकॉम पक्षीशाला में।। क्या खांयेगे – बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट।। आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया।। भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न की निजी।। रात के खाने पर, सिलविया गुस्से में थी।। मुझे, केवल कुमारी कन्या ही मार सके।। आपका प्रेम है कि आपने मुझे अपना मान लिया।। आप,  टाइम पत्रिका पढ़ना छोड़ दीजिए।। पति, पत्नी के घर में रहते हैं।। पसन्द करें – कौन सी मछली खायेंगे।।

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इस चिट्ठी में हमारी हैदराबाद यात्रा का वर्णन है।

हैदराबाद में दर्शनीय स्थल

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वामन, राजा बलि से याचना करते हुऐ चित्र विकिपीडिया से।

इस चिट्ठी में चर्चा है कि हमें क्यों मुक्त सॉफ्टवेयर और मुक्त मानक का प्रयोग करना चाहिये।

आज सितंबर माह का तीसरा शनिवार है। यह दिन मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस (Freedom software Day) के रूप में मनाया जाता है। इसलिये यह चिट्ठी आज प्रकाशित की जा रही है।

आप सोच रहे होंगे कि ‘मुक्त मानक (Open Format) और ‘वामन की वापसी’ (The Return of Vaman)’ कहानी में क्या संबन्ध है?

कुछ समय पहले मुझे काम से साउथ अफ्रीका जाना पड़ा। इस चिट्ठी  में, वहीं की यात्रा का वर्णन है।

क्रुगर पार्क साउथ अफ्रीका में सूर्यास्त

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इस चिट्ठी  में, हमारी सिक्किम और कालिम्पॉङ यात्रा का वर्णन है।

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प्रभू ईसा को देख, चकित होते हुऐ चरवाहे - चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से।

यह श्रृंखला मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। इसकी शुरुवात मैंने इस प्रश्न के उत्तर में शुरू की कि,

बेथलेहम का तारा क्या था?

इसमें तीन विषय – बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियों – पर चर्चा है।

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मैं काम के सिलसिले में बर्लिन गया था। वहां के लिये, भारत से कोई सीधी उड़ान नहीं थी। इसलिये दिल्ली से वियाना और वहां से बर्लिन गया था। लौटते समय, घूमने के लिये वियाना रुका था। इस चिट्ठी में वियाना यात्रा का वर्णन है।

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इस चिट्ठी में मेरी बर्लिन यात्रा का वर्णन है।

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इस चिट्ठी में वेब के इतिहास, उसके आविष्कार, उसके भविष्य, उसके कारण उठ रही मुश्किलों, सवालों, कानूनी अड़चनों और उनके समाधान के बारे में चर्चा की गयी है। यह लेख मेरे उन्मुक्त और छुट-पुट चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। इसकी अलग अलग कड़ियों को आप नीचे दिये गये लिंक पर चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

इसकी अधिकतर कड़ियों को, आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये नीचे  लिंक के बगल में  ब्रैकेट ( ) के अन्दर लिखे लिंक पर चटका लगायें। अधिकतर ऑडियो फाइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ब्रैकेट के अन्दर चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।

टिम बरनर्स् ली ()।। इंटरनेट क्या होता है ()।।  वेब क्या होता है ()।। वेब २.० ()।। सॅमेंटिक वेब क्या है? ( )।। इंटरनेट का प्रयोग – मौलिक अधिकार है।। लिकिंग, क्या यह गलत है ()।। चित्र जोड़ना ठीक नहीं ()।। बैंडविड्थ की चोरी – क्या यह गैर कानूनी है () ।। बैंडविड्थ की चोरी – कब गैरकानूनी है ()।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं ( )।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है ()।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग ()।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद ()।। गोलमाल है भाई गोलमाल ()।। गाना, विडियो अपलोड करने वालों – सावधान।। अन्तरजाल पर कानून में टकराव ()।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग ()।। शॉ फैनिंग, नैपस्टर सॉफ्टवेयर, और उस पर चला मुकदमा ()।। कज़ा केस ()। ग्रॉकस्टर केस ()।। ग्रॉकस्टर केस में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला ()।।

 

 

 

अन्तरजाल, नव युग का सबसे रोचक आविष्कार है। इसने मानव सभ्यता को जितना अधिक प्रभावित किया उससे अधिक किसी और आविष्कार ने नहीं। आइये सबसे पहले इसके आविष्कारक ‘टिम बरनर्स् ली’, के बारे में जाने।

 

 

(Cartoon by Peter Steiner. The New Yorker, July 5, 1993 issue [Vol.69 no. 20] page 61 – taken from here.) Continue Reading »

 

यह चिट्ठी रिश्तों के बारे में है, उनसे निकलती खुशबू, जीवन के भावात्मक पहलू दर्द, प्रेम, मित्रता के बारे में है।

यह मेरे ‘उन्मुक्त‘ चिट्ठे पर कई कड़ियों में प्रकाशित हो चुकी है। इसका कुछ भाग मेरी पत्नी शुभा ने अपने चिट्ठे ‘मुन्ने के बापू‘ पर लिखा है। उसके कहने पर, उन चिट्ठियों को भी यहां जोड़ रहा हूं। यह लेख इन सारी कड़ियों को सम्पादित कर, प्रकाशित किया जा रहा हूं। यदि आप इसे कड़ियों में पढ़ना चाहते हैं तो नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

भूमिका।। सबसे प्रिय गीत, प्रिय क्षण – दर्द की यादें हैं। sweetest songs are those that tell of saddest thought।। कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन, बीते हुए दिन वो मेरे प्यारे पल छिन।। प्यार में अफसोस नहीं ।। रोमन हॉलीडे – पत्रकारिता।। अनन्त प्रेम।। अम्मां – बचपन की यादों में।। यहां सेक्स पर बात करना वर्जित है।। करो वही, जिस पर विश्वास हो।। जो करना है वह अपने बल बूते पर करो।। अम्मां – अन्तिम समय पर।। मैं तुमसे प्यार करता हूं कहने के एक तरीका यह भी।। पुराने रिश्तों में नया-पन, नये रिश्तें बनाने से बेहतर है।। प्रेम तो है बस विश्वास, इसे बांध कर रिशतों की दुहाई न दो।। निष्कर्ष – प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो।। पुनः लेख – जीना इसी का नाम है।। Continue Reading »

इस चिट्ठी में, काश्मीर यात्रा का वर्णन है।

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इस चिट्ठी पर मेरी गोवा यात्रा का वर्णन है।

 

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यह बच्चन जी की जीवनी का चौथा एवं अंतिम भाग है। बच्चन जी इलाहाबाद में क्लाईव रोड पर जिस बंगले में रहते थे, उसके कमरों में दरवाजे, खिड़कियों और रोशनदान को मिलाकर १०-१० खुली जगहें थी, इसलिये उसका नाम उन्होंने दशद्वार रख दिया। Continue Reading »

बसेरे से दूर

‘बसेरे से दूर’, बच्चन जी की आत्म कथा का तीसरा भाग है। इसमें उस समय की बात है जब वे इलाहाबाद से दूर रहे।

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नीड़ का निर्माण फिर बच्चन जी की जीवनी का दूसरा भाग है, यह भाग उनकी पहली पत्नी श्यामा की मृत्यु से शुरू होकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पुनः दाखिले, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नियुक्ति, तेजी जी से मिलन, अमिताभ एवं अजिताभ पुत्र रत्न की प्राप्ति, और उनके शिखर पर पहुंचने की कथा है। इस दौरान उन्होने अपने बसेरे का निर्माण किया शायद इसलिये इस भाग का नाम उन्होंने ‘नीड़ का निर्माण फिर’ रखा। Continue Reading »

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