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इस चिट्ठी में, २०११ विश्व क्रकेट कप के सेमी फाईनल मैच में सचिन तेंदूलकर का एलबीडब्लू आउट न दिये जाने का कारण है। यह लेख मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर तीन कड़ियों में प्रकाशित हुआ है। आप चाहें तो नीचे लिखी कड़ियों पर चटका लगा कर उन्हें पढ़ सकते हैं।


मैंने यह चित्र यहां से लिया है। Cartoon by Nicholson from “The Australian” newspaper: http://www.nicholsoncartoons.com.au

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यह हमारी मथुरा-वृन्दावन यात्रा का विवरण है।

कन्हाई चित्रकला का नमूना

यह विवरण मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।
इसकी कुछ कड़ियों को, आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये नीचे  लिंक के बगल में  ब्रैकेट ( ) के अन्दर लिखे लिंक पर चटका लगायें। अधिकतर ऑडियो फाइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप निम्न प्रोग्रामों में सुन सकते हैं –

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
ब्रैकेट के अन्दर चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।
रस्किन बॉन्ड ()।। कन्हैया के मुख में, मक्खन नहीं, ब्रह्माण्ड दिखा।। जहाँपनाह, मूर्ति-स्थल नापाक है – वहां मस्जिद न बनायें।। कृष्ण-जन्मभूमि मन्दिर को महमूद गजनवी ने लूटा।। गाय या भैंस के चमड़े को अन्दर नहीं ले जा सकते।। बांके बिहारी से कुछ न मांग सका।। देना है तो पशु वध बन्द करवा दें।। माई स्वीट लॉर्ड।। चित्रकला से आध्यात्म।। शायद भगवान कृष्ण यहीं होंगे।। महिलायें जमीन पर लोट रही थीं।। हमारे यहां भरतपुर से अधिक पक्षी आते हैं।। भारतीय़ अध्यात्मिकता की नयी शुरुवात – गोवर्धन कथा।। Continue Reading »

कुछ समय पहले मैंने श्रंखला ‘तू डाल डाल, मैं पात पात’ नाम से अपने  ‘उन्मुक्त’ चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित की थी। इसकी कुछ चिट्ठियों में कोर्ट गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त, इससे सम्बन्धित पुस्तकों  और इसका साइबर अपराध से सम्बन्ध की  चर्चा  तथा कुछ में साइबर अपराधों के बारे में चर्चा थी। इस श्रंखला को दो भाग में करके यहां प्रकाशित किया गया है।  इसके पहले भाग में कोर्ट गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त, उस पर कुछ पुस्तकों, और उनकर साइबर अपराध से संबन्ध की चर्चा है। यह भाग ‘अपूर्णता और साइबर अपराध‘ नाम से प्रकाशित किया गया है। यह दूसरा भाग है इसमें साइबर कानून और साइबर अपराधों की चर्चा है। इस भाग के लेखों को यदि आप  कड़ियों में पढ़ना चाहें, तो नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

कुछ समय पहले, मैंने श्रंखला ‘तू डाल डाल, मैं पात पात’ नाम से एक श्रंखला अपने  ‘उन्मुक्त‘ चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित की थी। इसकी कुछ चिट्ठियों में कोर्ट गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त, इससे सम्बन्धित पुस्तकों  और इसका साइबर अपराध से सम्बन्ध की  चर्चा  थी तथा कुछ में साइबर अपराधों के बारे में चर्चा थी। इस श्रंखला को दो भाग में करके यहां प्रकाशित किया जा रह है।
यहां इसके पहले भाग कोर्ट गर्डल के अपूर्णता सिद्धान्त और उस पर कुछ पुस्तकों एवं इसके साइबर अपराध के संबन्ध की की चर्चा है। अगले भाग में चर्चा केरेंगे साइबर अपराधों की। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

भूमिका।। नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है।।  ईश्वर का आस्तित्व नहीं।।  नाई, महिला है।।  मिस्टर व्हाई – यह कौन हैं।। गणित, चित्रकारी, संगीत – क्या कोई संबन्ध  है।। क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं।। भाषायें लुप्त हो जाती हैं – गणित के सिद्घान्त नहीं।। अन्तरजाल, एकांतता का अन्त है।। अनन्तता समझो, ईश्वर के पास पहंचो ।। ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो ।।

चित्र – फिल्म ‘इंडिपेंडेन्स डे’ से

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कुछ समय पहले मुझे काम से चेन्नई जाना पड़ा। हमने पॉन्डचेरी का भी प्रोग्राम बना लिया।  इस चिट्ठी  में, इसी यात्रा का वर्णन है।

पॉन्डेचेरी समुद्र तट पर शाम


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मेरे घर में आने वाली एक बुलबुल

मॉकिंगबर्ड का चित्र विकिपीडिया से

‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ उपन्यास बीसवीं सदी के उत्कर्ष अमेरीकी साहित्य में गिना जाता है। इसने अमेरीकी जन मानस पर गहरा असर किया।  यह पुस्तक एक वास्तविक घटना तथा उस पर चले केस (स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ केस) पर आधारित थी। इस उपन्यास का प्रकाशन १९६० में हुआ था। २०१० में इसके प्रकाशन के ५० साल पूरे हुऐ। उसी साल मैंने उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में यह श्रृंखला, इस पुस्तक तथा उस घटना जिससे यह पुस्तक प्रेरित थी, लिखी। इसकी आखरी कड़ी छुटपुट पर लिखी थी। इन सब को यहां यहां संकलित कर रख रहा हूं। इसे आप कड़ियों में नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं।

इसकी अधिकतर कड़ियों को, आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये नीचे  लिंक के बगल में  ब्रैकेट () के अन्दर लगे ► चिन्ह पर चटका लगायें। अधिकतर ऑडियो फाइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप –

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ब्रैकेट के अन्दर चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।
भूमिका: ।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी – कोर्टरूम: ।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं: ।। कैमल सिगरेट के पैकेट पर, आदमी कहां है: ।। अश्वेत लड़कों ने हमारे साथ बलात्कार किया है: ।। जुरी चिट्ठे में जालसाज़ी की गयी है: ।। क्या ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’  हर्पर ली की जीवनी है: ।। बचपन के दिन भी क्या दिन थे: ।। पुनः लेख – ‘बुलबुल मारने पर दोष लगता है’ श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ: ।। अरे, यह तो मेरे ध्यान में था ही नहीं।।

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इस चिट्ठी में हमारी देवभूमि हिमाचल यात्रा का वर्णन है।

यह मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में प्रकाशित हो चुका है। यदि इसे आप कड़ियों में पढ़ना चाहें तो नीचे चटका लगा कर जा सकते हैं।

वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा – अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। उसकी यह अदा भा गयी।। यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।। रास्ता तो एक ही है, भाग कर जायेंगे कैसे।। वह कुछ असमंजस में पड़ गयी।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। अपनी टूर दी फ्रांस – हिमाचल की साइकिल रेस।। और वह शर्मा गयी।। पता नहीं हलुवा घी में,  या घी हलुवे में तैर रहा था।। अभी तक इसका पैसा नहीं निकल पाया है।। नग्गर में, रोरिख संग्रहालय।। मेरे दिल में आज क्या है।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देते।। तुमसे मिल कर, न जाने क्यों और भी कुछ याद आता है।। हम हिन्दुस्तानी तो एक दूसरे की देखा देखी करते हैं।। लाईये मैं आपके हाथ में बांध देती हूं।।

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